<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033</id><updated>2012-02-10T02:19:46.854-08:00</updated><title type='text'>vinod mishra ka blog</title><subtitle type='html'></subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>154</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-7066274159296171254</id><published>2012-01-28T02:51:00.000-08:00</published><updated>2012-01-28T02:51:36.268-08:00</updated><title type='text'>"आज़ादी का मतलब क्या" अब तक सीख नहीं पायी केंद्र सरकार</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-XTUZH2O5ytQ/TyPS0F_AlmI/AAAAAAAAAdo/rhYV46r-9g0/s1600/SHIKARA.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="217" src="http://4.bp.blogspot.com/-XTUZH2O5ytQ/TyPS0F_AlmI/AAAAAAAAAdo/rhYV46r-9g0/s320/SHIKARA.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;भारत सरकार &amp;nbsp;प्रायोजित हालिया सर्वे चौकाने वाले है .कश्मीरी नौजवानों के इर्द गिर्द घूमते हुए सवालो को लेकर कराये गए इस सर्वे में ५४ फिसद नौजवानों ने माना है की "आज़ादी " कश्मीर मसले का एकमात्र हल है . ९५ फिसद नौजवानों ने अपने को भारत के राजनितिक व्यवस्था से अलग माना है .सर्वे में ऐसे कई खुलासे है. जो बताते है कश्मीर का अधिकांश&amp;nbsp;नौजवान देश की मुख्यधारा से जुड़ने के बजाय अपनी इस्लामिक पहचान को कायम दायम रखने के लिए प्रतिबद्ध है .तो क्या यह माना जाय यह गुस्सा नौजवानों का भारत के खिलाफ है या केंद्र सरकार की गलत नीतिया नौजवानों में भारत के प्रति नफरत बढाया है या फिर ओमर अब्दुल्लाह हुकूमत ने &amp;nbsp;नौजवानों को निराश किया है ?.&lt;br /&gt;.पिछले महीने एक इंटरव्यू मे मुख्यमंत्री&amp;nbsp;ओमर अब्दुल्लाह ने &amp;nbsp;माना था कि " सियासी तौर वे&amp;nbsp; कोई चमत्कार दिखाने के लायक नही है ना ही वे अपने आपको लोगों के बीच बेच पाए है ".यानि शेख अब्दुल्ला की तीसरी पीढ़ी को कांग्रेस की मरकजी सरकार ने &amp;nbsp;कश्मीर मे तुरुप के पत्ते की तरह इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश की लेकिन यह दाव पूरी तरह से खाली गया .हालत यह है कि जो काम पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद नही कर सका .वादी मे सरगर्म अलगाववादी संगठन नही कर सके वह काम ओमर अब्दुल्ला अपने चंद वर्षों के शासन मे कर दिखाया. २००९ और २०१० में .कश्मीर वादी के दस जिले लगातार &amp;nbsp;महीनो &amp;nbsp;अस्तव्यस्त रहे .पुलिस और प्रदर्शनकारियों की झड़प ने &amp;nbsp;१०० से ज्यादा बच्चों&amp;nbsp; की जान ली&amp;nbsp; .वादी के कामकाज महीनो&amp;nbsp;ठप्प रहे .लेकिन ओमर अब्दुल्लाह सरकार का कोई बाल बाका भी&amp;nbsp; नहीं कर सका .यह अवाम की चुनी सरकार थी लेकिन आवाम के गुस्से का इस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला था ,ऐसा केंद्र सरकार का अस्वासन था .दरअसल नौजवानों &amp;nbsp;का &amp;nbsp;गुस्सा &amp;nbsp;ओमर अब्दुल्ला सरकार के खिलाफ था लेकिन बड़ी चालाकी से इस नाकामी के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहरा दिया गया .कहा गया कि राहुल गाँधी&amp;nbsp; ओमर अब्दुल्ला को हर हाल मे मुख्यमंत्री बने रहने की वकालत कर रहे है जाहिर है कश्मीर मे शांति बहाली के लिए गृह मंत्रालय को दुसरे आप्शन ढूंढने पड़े&lt;br /&gt;.&lt;br /&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;कश्मीर भारत का अहम् हिस्सा है जाहिर है लोगों की मुश्किलों पर भी गौर करने की जरूरत है लेकिन अगर लोगों की शिकायत भ्रष्ट और अक्षम स्थानीय सरकार से है लेकिन बदले मे अगर श्रीनगर के सी आर पी ऍफ़ के बंकरों को हटाया जाय तो माना जायेगा कि केंद्र&amp;nbsp;सरकार खुद समस्या से मुह चुरा रही है .गृह मंत्रालय के हालिया सर्वे में नौजवानों ने माना है की भ्रष्टाचार वादी के सबसे बड़ी समस्या है आम लोगों में भारत के खिलाफ गुस्से को बरक़रार रखने में इस भ्रष्टाचार का अहम् किरदार है . &amp;nbsp;पिछले वर्षों मे ६०० से ज्यादा नौकरशाह और राजनेताओं पर करोडो रूपये डकार लेने का आरोप सामने आये हैं ,लेकिन ओमर की &amp;nbsp;सरकार एक भी व्यक्ति परआजतक&amp;nbsp;केस दर्ज नही कर सकी है .एक एक मंत्री के घरों के रंग रोगन पर करोडो अरबो खर्च किये जा चुके है लेकिन यह पूछने वाला नही है कि लोगों के पैसे की लूट पर यह सरकार चुप क्यों है ? खुद ओमर अब्दुल्लाह के तीन मंत्रियों पर दुबई और दुसरे शहरों में प्रोपर्टी बनाने का आरोप है .जाहिर है ओमर अब्दुल्ला अपनी हालत बेहतर समझते है सो भ्रष्टाचार और अक्षमता पर बोलने के बजाय उन्होंने मसले कश्मीर मे नयी&amp;nbsp; नयी सियासी पेंच डालने की कोशिश करते रहे&amp;nbsp; है .ओमर अब्दुल्ला को लगा कि पी ड़ी पी का सियासी आधार अलगाववाद है सो उन्होंने झट से यह कह दिया कि कश्मीर का भारत के साथ पूर्ण विलय अभी होना बाकी है यानि कश्मीर की जो हैसियत गिलानी साहब देखते है वही हैसियत ओमर अब्दुल्ला के लिए भी है लेकिन वे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर कायम है .हाल के दिनों में उन्होंने अलगाववादियों से अफ्सफा का मुद्दा झटक लिया है .&lt;br /&gt;&amp;nbsp;अरबी में एक कहावत काफी प्रचलित है कि जिसने ज्यादा दुनिया घूमा हो वह उतना ही ज्यादा झूठ बोलता है . ओमर अब्दुल्ला अपने खानदान की नाकामयाबी को छुपाने के लिए सीधे झूठ और भ्रम&amp;nbsp; का सहारा ले रहे है . उन्हें&amp;nbsp; यह याद दिलाने कि जरूरत है कि १९४८ में जब पाकिस्तानी फौज ने कश्मीर पर आक्रमण किया था तो कश्मीर के हजारों लोगों ने पाकिस्तानी गुरिल्लाओं को रोका था . सैकडो की तादाद में लोग शहीद हुए थे . बारामुल्ला में पाकिस्तानी फौज ने सैकडो बहनों की असमत्दरी की थी .भारत में कश्मीर विलय का एलान होने के साथ ही भारतीय फौज ने पाकिस्तानी आक्रमणकारियों को मार भगाया था . भारतीय फौज के स्वागत में लाखों की तदाद में जमा होकर कश्मीरियों ने भारत के प्रति अपने समर्थन का इजहार किया था . याद रखने वाली बात यह भी है कि वह शेख अबुल्लाह ही थे जिनके कहने पर पंडित नेहरु संयुक्त राष्ट्र गए और उन्होंने&amp;nbsp;कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के हवाले कर दिया था ,जिसे हम पाकिस्तान मक्बूजा कश्मीर के नाम से जानते है . ओमर साहब को यह भी याद दिलाने की जरूरत है कि युसूफ शाह(सैयद शालाहुद्दीन ) १९८९ तक एक आम कश्मीरी एक आम भारतीय ही था . भारतीय लोकतंत्र में उसे गहरी आस्था थी और उसने एम् एल ए के लिए पर्चा भी भरा था . लोग कहते है कि युसूफ शाह की जीत पक्की थी . लेकिन फारूक अब्दुल्लाह ने उसके सपने पर पानी फेर दिया उसे एम् एल ए नहीं बनने दिया गया . युसूफ शाह सैयेद शालाहुद्दीन बन गया . वह हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर चीफ &amp;nbsp; बन बैठा . और जब कश्मीर में आतंकवाद का दौर शुरू हुआ तो फारूक अब्दुल्ला कश्मीर छोड़कर लन्दन भाग खड़े हुए . राजीव गांधी की भावुकता का नाजायज फायदा उठाकर फारूक अब्दुल्लाह १९९६ में ही दुबारा मुख्यमंत्री&amp;nbsp; बनकर लौटे .जम्हूरियत का जितना बलात्कार ओमर साहब के खानदानो ने &amp;nbsp;किया&amp;nbsp; शायद ऐसा नगा रक्स&amp;nbsp; &amp;nbsp;भारत में कही हुआ हो . लेकिन कहा गया की कश्मीर के लोग भारत के वजाय पाकिस्तान जाना चाहते है..&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-hwEQBF4vGmE/TyPTAEKa_XI/AAAAAAAAAdw/AGh1jUIqTCA/s1600/kashmir+girl.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" src="http://3.bp.blogspot.com/-hwEQBF4vGmE/TyPTAEKa_XI/AAAAAAAAAdw/AGh1jUIqTCA/s320/kashmir+girl.jpg" width="294" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;पिछले &amp;nbsp;वर्षों में भारत सरकार&amp;nbsp;ने &amp;nbsp;तीन &amp;nbsp;लाख &amp;nbsp;हजार करोड़ से ज्यादा खर्च कश्मीर मे &amp;nbsp;शायद इस भ्रम में किया&amp;nbsp;है कि विकास की रफ़्तार के सामने में अलगाववाद की आवाज धीमी पड़ जायेगी । लेकिन ऐसा नही हुआ । पैसे की बौछार से कश्मीर में रियल स्टेट में बूम है । कस्बाई इलाके में भी शोपिंग मौल खुल गए हैं । लेकिन जब भी कोई आग भड़कती है&amp;nbsp;तो वादी में जीवे जीवे पाकिस्तान की आवाज सबसे ज्यादा गूंजती है.... । क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश कि क्या पैसा कश्मीर मसले का समाधान है ? भ्रष्टाचार के आकंठ मे&amp;nbsp;&amp;nbsp;डुबे&amp;nbsp;&amp;nbsp;कश्मीर&amp;nbsp;के सियासतदान&amp;nbsp;&amp;nbsp;कभी भी यह स्वीकार नही करते है कि लोगों का भरोसा उन्होंने खोया है बल्कि हर बार वे कश्मीर को एक अलग समस्या बताते हुए सारा ठीकरा केंद्र के सर फोड़ देता देता है &amp;nbsp;.कश्मीर के लोग पाकिस्तान की हालत से भली भाति वाकिफ है सो वह गिलानी साहब के कहने से पाकिस्तान नही चले जायेंगे .उन्हें यह भी पता है अगर जनमतसंग्रह हुए भी तो उन्हें भारत और पाकिस्तान मे से किसी एक को चुनना होगा .आज़ादी का तीसरा विकल्प नही है .उन्हें यह भी पता है कि जनमत संग्रह कराने के लिए पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र की शर्तों को मानना होगा और उसे पाक अधिकृत कश्मीर से लेकर गिलगित बल्तिस्तान से अपने फौज हटाने होंगे और उन इलाकों को भारतीय फौज के हवाले करने होंगे .क्या पाकिस्तान कभी संयुक्त राष्ट्र की शर्तो को मानने के लिए तैयार होगा ?.क्या पाकिस्तान कभी भी इन इलाकों से पंजाब ,सिंध और पख्तून के लाखों लोगों को निकाल बाहर&amp;nbsp;करेगा? .पाकिस्तान खुद संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्ताव को बीते दिनों की बात कह रहा है लेकिन कश्मीर मे अलगाववादी संयुक्त राष्ट्र की बात करते है .जाहिर है वे लोगों से झूठ बोल रहे है और उनका यह झूठ तबतक चलता रहेगा जबतक कश्मीर मे भ्रष्टाचार कायम रहेगा और राजगद्दी की वंश परंपरा चलती रहेगी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;याद कीजिये ओमर अब्दुल्ला का वह जोशीला भाषण । विश्वास प्रस्ताव पर संसद में महज दो मिनट के भाषण से वे मिडिया के हीरो बन गए थे ।अलगाववाद की भाषा&amp;nbsp;बोलकर&amp;nbsp;ओमर अब्दुल्ला&amp;nbsp;&amp;nbsp;कश्मीर में नौजवानों के बीच अपनी पहचान बनाई थी . उन्हें लोगों ने हाथो हाथ लिया था । कांग्रेस के आलाकमान इस भाषण से इतने प्रभावित हुए थे कि जब बारी मुख्यमंत्री चुनने की आई तो उन्होंने सिर्फ़ ओमर अब्दुल्ला के लिए हामी भरी । लेकिन इस अब्दुल्ला ने जल्द ही सबको निराश किया ।&lt;br /&gt;पिछले ६० वर्षों में भारत सरकार ने जितना तब्बजो कश्मीर को दिया है .उतना ध्यान शायद ही कोई राज्य आपनी ओर कर पाया हो । कश्मीर में इन वर्षों में जो माहौल बना है उसके लिए इस देश को भारी कुर्बानिया भी देनी पड़ी है । पैसे का हिसाब किताब आप भूल जाए । सबसे बड़ी बात यह कि कश्मीर में अमन पाने के लिए &amp;nbsp;२०००० से ज्यादा जवानों ने कुर्बानिया दी है , और जब अमन के इस माहोल को आगे ले चलाने की बात आती है तो&amp;nbsp; अब्दुल्ला उसी आर्मी को सियासी मोहरा बनाते है .गृह मंत्रालय के सर्वे में नौजवानों से कई सवाल पूछे गए लेकिन स्थानीय सरकार को लेकर ओमर अब्दुल्लाह को लेकर एक भी सवाल नहीं पूछे गए .जाहिर है अलगाववाद के नाम पर दुकान चलाने वालों ने केंद्र सरकार को एक और पेंच में फसा दिया है&lt;br /&gt;कांग्रेस का समर्थन ओमर अब्दुल्ला को अगर इसलिए है कि वह राहूल के दोस्त है तो यह हमें नही भूलना चाहिए कि कभी इस देश ने पंडित नेहरू और शेख अब्दुल्ला की दोस्ती के कारण काफ़ी नुकशान सहा है । ये परेशानी आज तक पीछा नही छोड़ रही । अगर इसी दोस्ती के नाम पर यह सिलसिला जारी रहा तो कश्मीर में पाने के वजाय हम ज्यादा खोएंगे ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-7066274159296171254?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/7066274159296171254/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=7066274159296171254&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/7066274159296171254'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/7066274159296171254'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2012/01/blog-post_28.html' title='&quot;आज़ादी का मतलब क्या&quot; अब तक सीख नहीं पायी केंद्र सरकार'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-XTUZH2O5ytQ/TyPS0F_AlmI/AAAAAAAAAdo/rhYV46r-9g0/s72-c/SHIKARA.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-6869850656586251843</id><published>2012-01-07T00:23:00.000-08:00</published><updated>2012-01-07T00:23:47.580-08:00</updated><title type='text'>सावधान आप उत्तर -प्रदेश में है !</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-LA_nYeXx9eM/TwgBAqSZx8I/AAAAAAAAAdg/-MHOL0ozNWA/s1600/up.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/-LA_nYeXx9eM/TwgBAqSZx8I/AAAAAAAAAdg/-MHOL0ozNWA/s1600/up.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;जात न पूछो साधू से ,यानी सज्जन ,सुशील और विनम्र लोगों की कोई जात नहीं होती .लेकिन अपने उत्तर प्रदेश में जात न केवल सामाजिक पहचान से जुडी हुई है ,बल्कि यह व्यक्ति को सत्ता पर काबिज होने का अनोखा नुस्खा भी देती&amp;nbsp; है साथ ही समाज में दबंगई का प्रमाणपत्र भी .जीत हर कीमत के शर्त पर उत्तर प्रदेश में संघर्षरत बीजेपी को यह बात आखिर में समझ आई कि चौथे नंबर के लिए भी उसे जात समीकरण बनाने होंगे .भ्रष्टाचार और लोकपाल&amp;nbsp; के मुद्दे पर अलग -थलग पड़ी कांग्रेस से लोगों का मोहभंग होने लगा था और लोग बीजेपी को विकल्प मानने लगे थे .लेकिन उत्तर प्रदेश में बसपा के निष्कासित महारथियों को गले लगाकर पार्टी ने यह एहसास करा दिया है कि नैतिकता और सचरित्र &amp;nbsp;की बात बौधिक बहस की बात तो&amp;nbsp; हो सकती है लेकिन चुनाव जितने के कारगर उपाय नहीं हो सकते .यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में पार्टी ने &amp;nbsp;चाल, चरित्र और चेहरा पूरी तरह से बदल लिया है .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सपा से निष्कासित सांसद राज बब्बर ने २००३ में यह नारा दिया था "जिस गाड़ी में सपा का झंडा ,उस गाडी में है मुलायम का गुंडा ".मायावती ने इसका विस्तार देते हुए पिछले चुनाव में नारा दिया "चढ़ गुंडों की छाती पर ,बटन दबेगा हाथी पर ".भय मुक्त समाज का ,सर्वजन समाज का नारा देकर मायावती प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई .लेकिन जातीय दबंगों का बोलबाला जारी रहा .शासन और सत्ता को ढाल बनाकर दबंगों ने अपना लूट -पाट जारी रखा .एकबार फिर उन्ही दबंगों और जातियों के समीकरण बैठकर हर पार्टी सत्ता की कुंजी अपने हाथ करने को उत्साहित है .&lt;br /&gt;बसपा हो या सपा या फिर कांग्रेस को हर पार्टी को पता है कि बगैर ठोस मुद्दे के अपने बूते सरकार बनाना नामुमकिन है .यही वजह है कि मुलायम सिंह कांग्रेस से एक कदम दुरी रखकर वही सेकुलर राजनीती का दंभ भर रही है तो कांग्रेस के पास यह सेकुलर मुद्दा उसका कोपीराईट है . केंद्र में .कांग्रेस को पार्टी का समर्थन जारी रहेगा यह बात सपा के सर्वे सर्वा मुलायम सिंह कहरहे है .लेकिन पार्टी के दुसरे नंबर के शीर्ष नेता अखिलेश यादव हर सभा में राहुल को जमकर मजम्मत कर रहे है .उधर बसपा ने &amp;nbsp;भी केंद्र में कांग्रेस को अपना समर्थन जारी रखा है लेकिन उत्तर -प्रदेश में कांग्रेस को अपना दुश्मन नंबर वन बता रही है .यह हालत वी पी सिंह और बीजेपी के बीच गुप्त&amp;nbsp; चुनावी समझोता की याद दिलाती है .वी पी सिंह ने अपने को सेकुलर बताने के लिए बीजेपी को अपनी चुनावी सभावों से दूर रखा यहाँ तक की मथुरा के एक चुनावी मंच पर वी पी सिंह चढ़ने से इसलिए मना कर दिया था क्योंकि उस मंच पर कुछ झंडे बीजेपी के लगे थे .लेकिन पुरे प्रदेश में बीजेपी के साथ जनता दल का शीट शेयरिंग समझोते के तहत हुआ था .&lt;br /&gt;यानी यह सेकुलर दिखने की कवायद उत्तर -प्रदेश में सिर्फ मुसलमानों के २० फिसद वोट को लेकर है .कांग्रेस हो या सपा या फिर बसपा अपने जातीय समीकरण को मुसलमान के साथ मिलाकर सत्ता पर काविज होने का आसन फ़ॉर्मूला ढूंढ़ती है .बिहार के नीतीश कुमार कुमार के फोर्मुले को अपनाकर राहुल गांधी की टीम ने पहले मायावती के दलित से महादलित को अलग करने की कोशिश की है .यानी १४ फिसद दलित वोट से मायावती के ८ फिसद जाटव को अलग थलग करने की कोशिश है .स्मरण हो कि इन्ही महादलितो के घर रात्रि विश्राम कर कंद मूल खाकर राहुल ने पिछले वर्षो में &amp;nbsp;शबुरी को उपकृत किया है आज पार्टी उनसे उसकी कीमत मांग रही है .पार्टी को यह पक्का यकीन है कि ६ फिसद महादलित ,८ फिसद अतिपिछडा,पिछड़ा मुस्लिम तबका&amp;nbsp; और बीजेपी से वापस आ चुके सवर्णों के वोट से पार्टी अपना १०-१२ फिसद वोट के कलंक को धो सकती है .जाहिर है अगर उत्तर -प्रदेश में पार्टी ने अपना वोट प्रतिशत बढ़ा लिया तो न केवल प्रदेश की सत्ता की चावी कांग्रेस के पास होगी बल्कि केंद्र के अगले चुनाव में उसकी बढ़त बरक़रार रहेगी .८७ रिजर्व सीट पर अपनी पुरानी दावेदारी वापस लाने के लिए राहुल ने पी एल पुनिया और अशोक तोमर को लगाया है तो बीजेपी और सपा से अलग हुई कुर्मी -लोध को अपने पाले में लाने के लिए अपने बूढ़े शेर वेणी प्रसाद को लगाया है .इसी अति पिछड़ा समूह को अपने पाले में लाने के लिए बीजेपी आज शिव का रूप धारण कर बाबू सिंह कुशवाहा और दुसरे दागी साबिक मंत्रियो का साथ ले रही है .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन सबसे दुखद पहलु इन चुनावो में अन्ना टीम और इंडिया अगेंस्ट करप्सन को हासिये पर चले जाना है .अन्ना बीमार है और उनकी टीम मायूसी में मर्सिया पढ़ रही है पांच राज्यों के .चुनावो में सक्रिय भूमिका निभाने का एलान करके आज अन्ना की टीम लोगों से सलाह मांग रही है तो यह मना जाएगा कि यह आन्दोलन अभी भी जनमानस के बीच अपना संपर्क नहीं बना पाया है .एक अन्ना के बीमार होने से अगर यह टीम आज सकते में &amp;nbsp;है तो &amp;nbsp;इसे &amp;nbsp;दूसरी&amp;nbsp;सम्पूर्ण क्रांति क्रांति कहना बेमानी होगी .अन्ना की टीम यह भली भाति जानती है कि उत्तर -प्रदेश के जातीय दंगल में उनका जनलोकपाल चूं चू का मुरब्बा ही साबित होने वाला है .भ्रष्टाचारियो की जमात &amp;nbsp;जात का ढाल ओढ़कर&amp;nbsp;अन्ना टीम के तमाम नारे को यहाँ निष्क्रिय कर सकती है .यही वजह है कि अन्ना से पहले किरण बेदी यह घोषणा कर रही है कि चुनाव प्रचार में उनकी कोई भूमिका नहीं होगी .सावधान आप उत्तर -प्रदेश में है !&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-6869850656586251843?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/6869850656586251843/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=6869850656586251843&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/6869850656586251843'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/6869850656586251843'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2012/01/blog-post.html' title='सावधान आप उत्तर -प्रदेश में है !'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-LA_nYeXx9eM/TwgBAqSZx8I/AAAAAAAAAdg/-MHOL0ozNWA/s72-c/up.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-8662092654110320984</id><published>2011-12-23T04:40:00.000-08:00</published><updated>2011-12-23T04:40:03.427-08:00</updated><title type='text'>संसद को त्याग कर ही बीजेपी सरकार बना सकती है</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-3P7O-wNc-rc/TvR2jcddV4I/AAAAAAAAAdQ/5znkzG7uBDU/s1600/parliament.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="112" src="http://2.bp.blogspot.com/-3P7O-wNc-rc/TvR2jcddV4I/AAAAAAAAAdQ/5znkzG7uBDU/s320/parliament.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;संसद और सड़क के बीच, सांसद और सिविल सोसाइटी के बीच ,बेईमान और इमानदार के बीच लोकपाल बिल को लेकर छिड़ी बहस अपने आखिरी पड़ाव पर है .देश की संसद का यह अनोखा बिल पिछले ४० साल में ११ बार नए संशोधन के साथ संसद में आया लेकिन हर बार राजनितिक इच्छाशक्ति के अभाव के &amp;nbsp;कारण यह बिल पास नहीं हो सका .वजह भ्रष्टाचार कभी देश के चुनावो का मुद्दा नहीं बना .वजह देश की राजनीती भ्रष्टाचार की संस्कृति को आत्मसात कर चुकी है .लेकिन इस वजह का श्रेय कमोवेश आमलोगों को भी जाता है .यह सवाल पूछा जाना लाजिमी है की पिछले २० वर्ष से सत्ता और राजनीती में अपना वर्चस्व रखने वाले लालू जी ,मुलायम सिंह ,रामविलास पासवान ,मायावती और देश के दर्जनों क्षेत्रीय पार्टिया क्या अपने उच्च आदर्शो के कारण बने हुए है या &amp;nbsp; &amp;nbsp;इस आदर्श के पीछे उनकी दौलत है .देश के प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों का &amp;nbsp;भ्रष्टाचार से रिश्ता उतना ही पुराना है जितनी&amp;nbsp; पुरानी हमारी संसदीय व्यवस्था है .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन फिर भी यह भ्रष्टाचार कभी चनावी मुद्दा नहीं बन सका इसका जवाब मौजूदा लोकपाल बिल है .लोकपाल बिल में आज भ्रष्टाचार मुद्दा नहीं है बल्कि बड़ी चालाकी से सरकार ने बहस को आरक्षण के बहस में उलझा दिया है .सरकार यह बात बेहतर जानती है आरक्षण एक ऐसा तुरुप का पत्ता है जिसका इस्तेमाल न सिर्फ चुनाव जितने के लिए किया जा सकता है बल्कि समाज को विभिन्न धुर्वो में बांटा जा सकता है . ९ सदसीय लोकपाल में अनुभवी लोगों को शामिल करने के वजाय सरकार ने सदन के जरिये एक नयी बहस चलादी है कि लोकपाल में ओ बी सी के कितने प्रतिनिधि होंगे ,एस सी और एस टी के कितने लोग होंगे ,कितने मुसलमान होंगे ,कितने पंडित होंगे और कितने अनुभवी लोग .यानी इस देश की संसद भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए यह बहस करने के लिए तत्पर नहीं है कि देश के १० लाख करोड़ से ज्यादा कला धन कैसे वापस आये ?भ्रष्टाचार से त्रस्त आम लोगों को इससे कैसे मुक्ति दिलाये .? लेकिन अपनी प्रभुसत्ता के लिए व्याकुल सांसद यह बार बार दुहरा रहे है कि संसद सर्वोच्च है .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संसद की प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी अगर यह कहती है कि लोकपाल पर सरकार पहले मैच फिक्सिंग कर चुकी है .तो यह सवाल उनसे पूछा जाना लाजिमी है कि भ्रष्टाचार को अहम् मुद्दा बनाने में इस पार्टी का क्या योगदान है ?जन लोकपाल के जरिये अन्ना हजारे ने देश के लाखो -करोडो लोगों को जुवान दी है उन्हें यह एहसास कराया है कि देश के भ्रष्ट राजनेता और भ्रष्ट नौकरशाह का गठजोड़ तोड़े बगैर देश में सुशासन लाना नामुमकिन है .अन्ना का आमरण अनशन आज भी उनकी ताकत और पूंजी है और पहली बार उन्होंने हमारी संसदीय व्यवस्था को यह दिखा दिया है कि जन संसद आज भी संसद पर भारी है .संसद देश के १.५० अरब लोगों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है .लेकिन क्या इस देश की संसद को यह अधिकार है कि जनभावना को दरकिनार करके सिर्फ अपनी प्रभुसत्ता दिखाने के लिए अन्ना के आन्दोलन को मजाक साबित कर दे .आज लोकपाल बिल सरकार अफरा -तफरी में पास कराने में लगी हुई है इसकी वजह भी अन्ना का आन्दोलन ही है .प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजेपी आज &amp;nbsp;मुद्दों के मामले में दिवालिया बना हुआ है .पार्टी सिर्फ विरोध कर रही है उसके पास लोगों को कहने के लिए कुछ नहीं है .अगर वह इस मुगालते में है कि अन्ना आन्दोलन की कमाई वह अकेले चुनाव में खर्च करेगी तो यह उसकी भूल है .अगर लोकपाल बिल को लेकर बीजेपी वाकई गंभीर है और भ्रष्टाचार से देश को मुक्ति दिलानी चाहती है तो इस मुद्दे पर उसे संसद से त्यागपत्र देकर सरकार के खिलाफ सड़क पर संघर्ष करना चाहिए .बीजेपी को यह मान लेनी चाहिए बगैर सड़क पर उतरे संसद पर उसका कब्ज़ा मुश्किल है .अन्ना ने रास्ता जरूर दिखा दिया है .....&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-8662092654110320984?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/8662092654110320984/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=8662092654110320984&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/8662092654110320984'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/8662092654110320984'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/12/blog-post_23.html' title='संसद को त्याग कर ही बीजेपी सरकार बना सकती है'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-3P7O-wNc-rc/TvR2jcddV4I/AAAAAAAAAdQ/5znkzG7uBDU/s72-c/parliament.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-3034459709458211050</id><published>2011-12-06T05:26:00.000-08:00</published><updated>2011-12-06T05:26:32.236-08:00</updated><title type='text'>कपिल सिब्बल का  फेसबुक प्रोफाइल</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-iCTCgdU9En4/Tt4X7bQsISI/AAAAAAAAAdE/4a79T7OmlcQ/s1600/kapppp.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/-iCTCgdU9En4/Tt4X7bQsISI/AAAAAAAAAdE/4a79T7OmlcQ/s1600/kapppp.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;ऍफ़ डी आई के मामले में प्रधानमंत्री के सख्त रबैये से लोगों को यह एहसास हो गया था कि रिटेल सेक्टर में कोई बड़ा चमत्कार होने वाला है .देश के तमाम छोटे बड़े अख़बारों में ऍफ़ डी आई के फायदे को लेकर बड़ा इश्तिहार निकला गया .टीवी चैनलों पर आकर सरकार के मंत्रियों ने इसकी तारीफ में बड़ी बड़ी बातें की लेकिन &amp;nbsp;यह बात लोगों की समझ &amp;nbsp;में नहीं आई .यानी सरकार जिसे आर्थिक क्रांति मान रही थी लेगों ने उसे धोखा करार दिया .तो क्या लोग अखबार नहीं पढ़ते है ?टीवी नहीं देखते है ?या फिर सरकार सरकार पर कोई भरोसा नहीं है ?सरकार का यह फैसला इतना ही शानदार था तो इसे वापस क्यों लिया गया ? सोसल नेटवर्किंग साईट को लेकर कपिल सिब्बल के उग्र रूप से सरकार की हतासा समझी जा सकती है .टेलिकॉम मिनिस्टर श्री सिब्बल फेसबुक ,ट्वीटर और दुसरे साईट पर लगाम लगाना चाहते है .वजह लोग अख़बार या टीवी के प्रोपगंडा से उकता गए है अब ओ मौलिक&amp;nbsp;सुचना का आदान प्रदान करना चाहते है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकार का बहाना है कि इन साईट पर आपतिजनक मसाले डाले जा रहे है .लेकिन सवाल यह है कि सरकार के खिलाफ हर चीज आपतिजनक हो सकती है .फिर चीन और भारत में फर्क क्या है .कपिल सिब्बल जी वर्षों से जिस नागरिक अधिकार और स्वतंत्रता के लड़ाई( मोटी फीस लेकर ) अदालतों में लड़ते रहे है ,वही आज सरकारी चोंगा पहनकर इस आज़ादी को छिनना चाहते है .क्या वाकई में सरकार डरी हुई है ,मीडिया के नवप्रयोग से सहमी हुई है ?भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना का आन्दोलन सरकार के सुचना तंत्र को बेनकाव कर दिया है .अरब स्प्रिंग के जरिये पुरे मिडील इस्ट में मजबूत सत्ता को &amp;nbsp;सोकल नेटवर्किंग साईट ने धरासायी कर दिया है .तानाशाहों की लम्बी पारी को वहां के अखबारों ने नहीं बल्कि फेसबुक ने बोल्ड कर दिया था .वीकी लीक से आज पूरी दुनिया की सरकार आहात है .जाहिर है सरकार इस वेब दुनिया की ताक़त को पहचानती है .लेकिन सवाल यह है कि सुचना की इस ताकत को कमजोर करने के लिए सरकार क्यों बल प्रयोग करना चाहती है ?सुचना तंत्र पर सरकार का पूरा नियंत्रण है फिर वेब पर नियंत्रण को लेकर सरकार कंपनी के प्रवंधकों को क्यों धमका रही है .सोसिअल नेटवर्किंग साईट पर गलत सुचना पर नियंत्रण का पूरा अधिकार युजेर्स के पास है वो जब चाहे उसे ख़ारिज कर सकता है फिर सरकार की दखल की जरूरत क्यों पड़ी है ?१.५० अरब की आवादी वाले देश में आज भी महज 2 करोड़ लोग इन्टरनेट ने से जुड़ पाए है जबकि इस वेब दुनिया में साझीदार करने वालों की संख्या ५ -१० लाख से ज्यादा नहीं है .लेकिन फिर भी सरकार डरी हुई है .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आई टी के क्षेत्र में नव क्रांति ने लोगों को ज्यादा मुखर बना दिया है .सरकार मानती है कि सुचना क्रांति के इस युग में सत्ता को सामंती दायरे से बाहर निकलना होगा .इसी पहल में कांग्रेस अपने दुलारे राजकुमार को समाज के अंतिम व्यक्ति से संवाद करने के लिए प्रेरित किया है .लेकिन विडंबना यह है कि राहुल जी न तो उस दलित पिछड़े से संवाद बना प् रहे है न ही कांग्रेस और सरकार के मीडिया मनेजर आम लोगों से संवाद स्थापित कर पा रहा है .मेरे जैसा अदना सा आदमी अगर अपना फ्रेंड सर्किल २० हजार बना सकता है तो सरकार के लिए यह मुश्किल नहीं है कि अपने खिलाफ सुचना का प्रतिउत्तर देने के लिए कभी भी एक बड़ा नेटवर्क बना सकती है .लेकिन ऍफ़ डी आई के मामले में सरकार के &amp;nbsp;रवैये ने यह साफ़ कर दिया है कि उसने अपना आत्मविश्वास खो दिया है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-3034459709458211050?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/3034459709458211050/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=3034459709458211050&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3034459709458211050'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3034459709458211050'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/12/blog-post.html' title='कपिल सिब्बल का  फेसबुक प्रोफाइल'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-iCTCgdU9En4/Tt4X7bQsISI/AAAAAAAAAdE/4a79T7OmlcQ/s72-c/kapppp.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-6838754804130829462</id><published>2011-10-22T04:01:00.000-07:00</published><updated>2011-10-22T04:01:39.730-07:00</updated><title type='text'>धारा ३७० यानी भ्रष्टाचारियों का कवच</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-ZGOKb-9vlec/TqKifQCJ1tI/AAAAAAAAAc8/I3xjTZfY2N0/s1600/kaaa.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" rda="true" src="http://4.bp.blogspot.com/-ZGOKb-9vlec/TqKifQCJ1tI/AAAAAAAAAc8/I3xjTZfY2N0/s1600/kaaa.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;कश्मीर की&amp;nbsp; सियासत पर उम्दा&amp;nbsp;विश्लेषण और सटीक टिपण्णी इस बार&amp;nbsp; आमलोगों ने की है .सितम्बर तक आनेवाले पर्यटकों की संख्या ११ लाख थी .वही इस दौर में माता वैष्णो देवी और बाबा अमरनाथ गुफा दर्शन के लिए ७५ लाख लोग रियासत पहुंचे .कश्मीर में अमन के लिए यह आमलोगों का शांति के लिए निवेश था .जाहिर है&amp;nbsp; आम हिन्दुस्तानियों का कश्मीर से यात्रा और पर्यटन के तालुक्कात ने धरा ३७० के असर को फीका किया है .राज्य के खजाने में सबसे ज्यादा राजस्व वैष्णो देवी श्रायण बोर्ड से मिलता है वही .दूर दराज के पहाड़ी इलाकों में बाबा अमरनाथ की यात्रा स्थानीय लोगों की जिन्दगी में उमंग भर देती है .यानी कश्मीर में लोगों की सरगर्मी बढ़ेगी तो अलगाववाद खुदबखुद दम तोड़ता नज़र आएगा .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;जम्मू कश्मीर देश का ऐसा एकलोता राज्य है जहा यह पता करना थोडा&amp;nbsp;मुश्किल&amp;nbsp;है&amp;nbsp;सत्ता&amp;nbsp;पक्ष&amp;nbsp;या&amp;nbsp;विपक्ष&amp;nbsp;कौन&amp;nbsp;कितने&amp;nbsp;देर&amp;nbsp;तक&amp;nbsp;भारत&amp;nbsp;के&amp;nbsp;हिमायती&amp;nbsp;है ..कास्तकार&amp;nbsp;से&amp;nbsp;लेकर&amp;nbsp;मुलाजिम&amp;nbsp;को&amp;nbsp;आर्थिक मदद या तनख्वाह देने के लिए राज्य सरकार को केंद्र से मदद की जरूरत है .पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह कहते है "रियासत अपने संसाधन से अपने मुलाजिम को २ महीने की तनख्वाह भी नहीं दे सकती "लेकिन राज्य के आर्थिक विकास के लिए धारा ३७० को और अधिक प्रभावी बनाने की बात की जा रही है .बिहार ,उत्तर प्रदेश ,उड़ीसा,पश्चिम बंगाल जैसे पिछड़े राज्यों के तुलना में जम्मू कश्मीर को मिलने वाली केंद्रीय सहायता कई गुणा ज्यादा है .रियासत को प्रधानमंत्री के विशेष पकेज कई राज्यों के सालाना बजट से ज्यादा है. लेकिन फिर भी कश्मीर में अलगाववाद हावी है .मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्लाह कहते है "पिछले वर्षों में वादी में नौजवानों ने इस आर्थिक पकेज के लिए कुर्वनिया नहीं दी है ,कश्मीर का मसला राजनितिक है इसका आर्थिक सहयता से हल नहीं किया जा सकता ."ओमर अब्दुल्ला अपनी जगह बिलकुल सही फरमाते है वर्ना तीन साल से लगातार विवाद और अक्षम मुख्यमंत्री होने के वाबजूद ओ सरकार के मुखिया बने हुए है .करोडो रूपये के घोटाले के आरोप उनके मंत्री और अफसरों पर लगे है लेकिन कभी कोई करवाई नहीं .केंद्रीय मदद के अरबो रूपये का बंदरबाट पिछले कई वर्षो से जारी है लेकिन कभी किसी आरोपी पर कारवाई नहीं हुई .क्योंकि कश्मीर एक राजनितिक मसला है यहाँ आर्थिक घोटाले की तहकीकात की इजाज़त नहीं दी जा सकती .धारा ३७० यहाँ सियासी लीडरों के लिए कवच का काम करता है जिसमे वे कई कानूनी पहल से परे है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;इस कानूनी दायरे से मुख्यधारा की सियासत करने वाले ही नहीं बाहर है बल्कि अलगाववादी नेता इसे कश्मीर के अस्तित्व से जोड़ते है .प्रमुख&amp;nbsp;अलगाववादी&amp;nbsp;नेता &amp;nbsp;गिलानी साहब पर करोडो रूपये के हवाला फंडिंग और टैक्स चोरी के इल्जाम लगे लेकिन गिलानी साहब को कभी भी इसके लिए किसी कोर्ट से बेल लेने की जरूरत नहीं पड़ी ,क्योंकि वो भारत के खिलाफ है .जाहिर है भारत के खिलाफ होना और बोलना कश्मीर की सियासत को खुल्लम खुल्ला लूट की इजाज़त देता है .विकीलिक्स के एक खुलासे में यह कहा गया की अपनी अपनी सियासत को जारी रखने के लिए पैसों की वरसात पाकिस्तान से भी हो रहा है और भारत से भी .ये अलग बात है की बरसाती पानी के तरह बहते इस पानी को कौन अपने घर की ओर मोड़ लेता है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;पिछले साठ वर्षो में कश्मीर की सियासत का आधार सिर्फ टाइम पास रहा है .हर सरकार के दौर में समस्या अगली सरकार के लिए छोड़ दी जाती है .भारत सरकार के वार्ताकारों की रिपोर्ट इसका जीता जगता उदाहरण है .आज कश्मीर में जो हालत बदले है उसकी कामयाबी का सेहरा हर कोई लेने के लिए अपने अपने तरीके से दलीले दे रहा है .यह जानते हुए की इन वर्षो में न केवल राजनितिक नेतृत्व बल्कि नौकरशाह इस मसले को लेकर पूरी तरह से असफल रहे है .मसले का समाधान किसी हाईपॉवर कमिटी से नहीं हो सकता .मुल्क के आम आदमी की भूमिकाऔर &amp;nbsp;संवाद बढाकर इस मसले का हल किया जा सकता है &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-6838754804130829462?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/6838754804130829462/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=6838754804130829462&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/6838754804130829462'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/6838754804130829462'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/10/blog-post.html' title='धारा ३७० यानी भ्रष्टाचारियों का कवच'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-ZGOKb-9vlec/TqKifQCJ1tI/AAAAAAAAAc8/I3xjTZfY2N0/s72-c/kaaa.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-6401985726297359077</id><published>2011-09-08T04:09:00.000-07:00</published><updated>2011-09-08T05:53:32.140-07:00</updated><title type='text'>आतंकवाद के खिलाफ हमें चाहिए एक और अन्ना</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-QW2Nw-SH69k/TmiiUdWfQ5I/AAAAAAAAAc4/ywElCHQv9lU/s1600/delhi+blast2.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="150" src="http://4.bp.blogspot.com/-QW2Nw-SH69k/TmiiUdWfQ5I/AAAAAAAAAc4/ywElCHQv9lU/s200/delhi+blast2.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; धमाके जारी&amp;nbsp; हैं ..बहस जारी है ...पिछले सात साल में २७ धमाके ..सैकड़ो लोगों की मौत ..हजारों घायल लेकिन जनता खामोश है .. मनमोहन सिंह सरकार के वरिष्ठ मंत्री सुबोध कान्त सहाय&amp;nbsp; कहते है "लोग अब इन धमाकों के आदी हो चुके हैं.."शायद ये बोम्ब धमाके रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गए है. दिल्ली हाईकोर्ट धमाके में १२ लोगों की जान गयी और ७० लोग जख्मी हुए .लेकिन इससे पहले भी कई धमाके हुए हैं और नतीजा कुछ भी हाथ नहीं आया .२४ घंटे के खबरिया चैनेल को खबर चाहिए , सरकार की ओर से खबर नहीं मिलेगी तो चैनेल अपने तरीके से खबरों का विश्लेषण करेंगे जाहिर है सरकार मीडिया मनेजमेंट हर समय कुछ न कुछ स्कूप जरूर मुहैया करेगी .ये खबरों का खेल है इसे खेलना सरकार बखूबी जानती है. मनमोहन सिंह की पहली पारी में अलग अलग धमाकों में ४ हजार से ज्यादा लोग मारे गए फिर भी अगले चुनाव में मनमोहन सिंह न केबल सत्ता में दुबारा लौटे बल्कि यह भी साबित कर दिया कि इस देश में आतंकवाद कभी चुनावी मुद्दा नहीं हो सकता और अगर यह&amp;nbsp; कभी मुद्दा नहीं हो सकता तो सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाना और ठोस करवाई की उम्मीद करने का हक कम से कम लोगों ने खो दिया है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; लगातार हो रहे ब्लास्ट से आहत पत्रकार अमित कुमार कहते है"सरकार और देश के राजनेता यह तय नहीं कर पा रहे है कि वह किसके साथ जाय&amp;nbsp; सरकार के प्रधानमंत्री आतंकवाद से लड़ने का हर बार अज्म दोहराते है .उसी सरकार के एक बड़े नेता आतंक में लिप्त लोगों के लिए जोर शोर से वकालत करते है.लेकिन फिर भी हम अवोध बालक की तरह कुछ ठोस करवाई चाहते है " २६\११ के मुंबई हमले में स्थानीय स्लीपंग सेल की भूमिका को पूरी तरह से नकार दिया गया क्योंकि जांच खास समुदाय के गुमराह लोगों की ओर जा रही थी .क्योंकि ये सियासत का मामला है इसलिए जांच एजेंसी को समझौता करना पड़ा. लेकिन उसी मुंबई में दुबारा धमाके हुए २६ लोग मारे गए&amp;nbsp; लेकिन पुलिस के हाथ कुछ नहीं लगा क्योंकि इन धमाको में एक बार फिर पुलिस ने एक बार फिर बड़ा खुलासा सामने लाया "पाकिस्तान और आई एस आई के इशारे पर धमाके हुए "लेकिन किसने इस धमाके को अंजाम दिया ?कौन लोग इन धमाको में शामिल थे इसे ढूंढ़ पाने में गृह मंत्री चिदम्बरम के एन आई ए और काउंटर टेर्रोरिस्म सेंटर के तमाम विश्लेषण फेल साबित हुए.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; &amp;nbsp; &amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; शिवराज पाटिल के बाद गृह मंत्री की भूमिका में आये पी चिदम्बरम से देश ने कुछ ज्यादा उम्मीद बाँध ली इसमें चिदम्बरम का क्या कशुर था .चिदम्बरम उसी मनमोहन सिंह सरकार के गृह मंत्री है जो कभी शिवराज पाटिल हुआ करते थे.फर्क सिर्फ इतना है चिदम्बरम अंग्रेजी बोलते है और प्रोफेसनल दिखते है.लेकिन पाटिल जी ने यह पहले साफ कर दिया था कि वे गृह मंत्री किसी काबिलियत के कारण नहीं बने है बल्कि ये सोनिया जी की कृपा है.यही बात कमोवेश प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में भी कही जाती है.यानी सरकार और पार्टी &amp;nbsp;कौन चला रहे है?इस व्यवस्था पर नारायणमूर्ति सवाल उठा चुके है . आतंकवाद से लड़ने के तमाम इरादे क्यों असफल रहे इसका जवाब खुद मनमोहन सिंह के पास भी नहीं है.&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; लेकिन इसका जवाब किसी राजनेता के पास भी&amp;nbsp; नहीं है.दिल्ली बम धमाके&amp;nbsp; के महज चंद घंटे के बाद संसद में चर्चा में भाग लेते हुए मुलायम सिंह ने सरकार को चेताया कि जाँच में किसी खास समुदाय के लोगों की धड्पकड़&amp;nbsp; रोकनी होगी .यानी मुलायम धमाके में पीड़ित लोगों के सांत्वना के दो शब्द में भी अपने वोट बैंक को नहीं भूलते .इस हालत में वोट बैंक को लेकर सियासत करने वाली कांग्रेस से ज्यादा उम्मीद करना बैमानी होगी. बीजेपी की हालत यह है कि आतंकवाद पर बोलते ही पहला निशाना उसका मुसलमान होता है. बीजेपी जिस दिन आतंकवाद के मुद्दे पर&amp;nbsp; मुसलमानों का भरोसा जीत लेगी उस दिन यह पार्टी देश में सबसे बड़ा जनाधार वाली पार्टी होगी लेकिन वह ऐसा कर नहीं पाएगी . भ्रष्टाचार को देश की संस्कृति मानने वाले लोगों को अन्ना हजारे का आन्दोलन ने गलत साबित&amp;nbsp; किया है और इसे पुरे देश में एक मुद्दा बना दिया है.आतंकवाद के खिलाफ देश को जगाने के लिए एक और अन्ना की दरकार है.&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: justify;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-6401985726297359077?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/6401985726297359077/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=6401985726297359077&amp;isPopup=true' title='4 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/6401985726297359077'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/6401985726297359077'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/09/blog-post.html' title='आतंकवाद के खिलाफ हमें चाहिए एक और अन्ना'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-QW2Nw-SH69k/TmiiUdWfQ5I/AAAAAAAAAc4/ywElCHQv9lU/s72-c/delhi+blast2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-8768047227994472254</id><published>2011-06-24T04:05:00.000-07:00</published><updated>2011-06-24T04:05:38.864-07:00</updated><title type='text'>यह सियासी ड्रामा किसके लिए है</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-gzwxVIR0vP8/TgRvXcvt9hI/AAAAAAAAAcw/iQSCBuXlMJI/s1600/pakistan.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/-gzwxVIR0vP8/TgRvXcvt9hI/AAAAAAAAAcw/iQSCBuXlMJI/s1600/pakistan.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;भारत पाकिस्तान के रिश्ते पर जमे बर्फ को पिघलाने की कोशिश एक बार फिर तेज हुई है .मुंबई हमले के बाद ठप्प पड़े बातचीत की पहल को मजबूती दी जा रही है .कश्मीर से लेकर आतंकवाद तक सारे मुद्दे पर खुलकर बहस हो रही है .लेकिन यहाँ यह सवाल उठाना लाजिमी है कि कौन है ये लोग जो भारत पाकिस्तान के बीच जटिल मसले को चुटकी बजा कर हल करना चाहते है .पाकिस्तान के मोहम्मद अकरम कहते है "नेहरु गए ,जिन्ना गए ,इंदिरा गयी ,बेनजीर गयी ,वाजपेयी साहब आये लेकिन मसला वही का वही है ,क्या पाकिस्तान के यही&amp;nbsp;अफलातून इस मुद्दे को सुलझाएंगे ,जिनपर अवाम का एतमाद नहीं है .हुकूमत यहाँ कौन चला रहा है यह पाकिस्तानी अवाम को भी नहीं मालूम है क्या इंडिया को नहीं पता कि वजीरे आजम युसूफ रजा गिलानी की यहाँ क्या हैसियत&amp;nbsp; है ."&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;भारत को पाकिस्तानी हुकुमरानो की भले ही हैसियत पता नहीं हो लेकिन अमेरिका को उनकी हैसियत मालूम है ,सो पाकिस्तान को भरोसा में लिए बगैर अमेरिका ने दुनिया के सबसे खतरनाक दहशतगर्द ओसामा बिन लादेन को मार डाला .पाकिस्तानी फौज के सुरक्षित पनाहगाह में घुसकर अमेरिका की यह करवाई इस सच को दुनिया के सामने ला दिया था कि पाकिस्तान एक बिखरा हुआ मुल्क है जिसे अलग पॉवर सेंटर ने अपने बीच बाट लिया है .वहां कहने के लिए अवाम की चुनी हुई सरकार है जिसका मुखिया गिलानी है ,वहा संवैधानिक सत्ता के मुखिया सद्र जरदारी है .लेकिन फौज वहां आर्मी ऑफ़ द पीपुल है तो आई एस आई को स्टेट विदीन स्टेट का दर्जा हासिल है .सचिव स्तर के मौसेदे में आतंकवाद ,सियाचिन ,सिर्क्रिक जैसे मुद्दे पहले से तय थे लेकिन पाकिस्तानी फौज को खुश करने के लिए इस चर्चा में कश्मीर को भी जोड़ा गया .यानी पाकिस्तानी फौज मसले कश्मीर पर अपने को सबसे बड़ा पैरोकार मानती है .आवामी मसले और सियासी मसले से उनका कोई सरोकार नहीं है जाहिर है उनकी रूचि सिर्फ कश्मीर में है .एक गरीब मुल्क के १९ फिसद बजट को वहां की फौज चट कर जाती है सिर्फ इसलिए कि वह पाकिस्तान के अवाम को यह बताने में कामयाब रही है कि पाकिस्तान को सबसे बड़ा खतरा भारत से है और इस खतरे से निपटने की पूरी गारंटी सिर्फ पाकिस्तानी फौज ही दे सकती है .६4 साल के पाकिस्तान में लगभग ४८ साल तक वहां की फौज ने हुकूमत की बागडोर अपने हाथ में रखी है .इस दौर में जेनरल कियानी ने तीन साल का एक्सटेंसन लेकर एक तरह से वहां साइलेंट कूप का ही संकेत दिया है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;ब्लीडिंग इंडिया बाय थोसेंड्स कट्स की पालिसी पर पाकिस्तान आज भी कायम है ,क्योंकि उसे पता है कि मुंबई हमले होने के बाद भी आज न कल भारत एकबार फिर बातचीत की पहल करेगा .पिछले २० वर्षों में हमने विभिन्न आतंकवादी हमले में १.५० लाख से ज्यादा लोगों को खोया है लेकिन हर बार बातचीत की पहल में आगे बढ़कर दोस्ती का हाथ बढ़ाते है .पाकिस्तानी फौज ,आई एस आई और आतंकवादी संगठन को लेकर हमने दुनिया भर में चर्चा की है लेकिन आजतक किसी ने हमारी चिंता पर कोई पहल नहीं की है .अमेरिका खुद अफगानिस्तान में फसा हुआ है तो उसे इसकी कुंजी आई एस आई और फौज के हाथ मिलती है .अमेरिका आज कियानी और पासा से सीधा संवाद बना रहा है .मुंबई हमले के आरोपी हेडली और राणा के खुलासे के बावजूद अमेरिका आई एस आई ऑफिसर मेज इकबाल और दुसरे फौजी ऑफिसर को बचाने में लगा है .अमेरिका यह जनता है कि उससे अरबो डालर लेकर भी पाकिस्तानी फौज गद्दारी कर रही है लेकिन फिर भी अमेरिका फौज से अपना संवाद तोड़ नहीं सका है .लेकिन हम अमेरिका से यह उम्मीद करते है कि हमारी पैरवी वह पाकिस्तानी फौज से करे .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;संसद पर हमले के बावजूद वाजपेयी ने जनरल&amp;nbsp;मुशरफ &amp;nbsp;से बातचीत की पहल की थी .दुनिया ने उन्हें दशक का सबसे काबिल राजनीतिज्ञ मना था .वाजपेयी के राजनैयिक प्रतिभा को पाकिस्तानी अवाम ने खास तौर से सराहा था .वाजपेयी जंग नहीं चाहते थे ,जंग शायद पाकिस्तानी अवाम &amp;nbsp;भी नहीं चाहते . मौजूदा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जंग जैसी फालतू चीजो से परहेज करते हुए पाकिस्तान की इकोनोमी में अपना सहयोग देना चाहते है &amp;nbsp;.उनका दर्शन है आर्थिक रूप से मजबूत पाकिस्तान भारत के पक्ष में है .आज पाकिस्तान की जी &amp;nbsp;डी पी में सबसे ज्यादा योगदान विदेशी मुल्कों का ही है .जो उसे आतंकवाद के खिलाफ जंग के नाम पर मिल रहा है .इस हालत में क्या हम पाकिस्तान से यह उम्मीद करसकते&amp;nbsp; है कि वह आतंकवाद से मुहं मोड़ लेगा .क्या हम वहां की हुकूमत से यह उम्मीद कर सकते है कि उसकी फौज और आई एस आई दूसरा मुंबई जैसे हमले नहीं कराएगी .अगर पाकिस्तान की हुकूमत ऐसी कोई गारंटी नहीं दे सकती है तो सलमान बशीर और निरुपमा राव की बातचीत से बेहतर है जनरल बी के सिंह और जनरल कियानी के बीच ही सीधी बात हो .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-8768047227994472254?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/8768047227994472254/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=8768047227994472254&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/8768047227994472254'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/8768047227994472254'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/06/blog-post_24.html' title='यह सियासी ड्रामा किसके लिए है'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-gzwxVIR0vP8/TgRvXcvt9hI/AAAAAAAAAcw/iQSCBuXlMJI/s72-c/pakistan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-6863235458274324454</id><published>2011-06-01T03:25:00.000-07:00</published><updated>2011-06-01T03:25:40.112-07:00</updated><title type='text'>संसद पर एन जी ओ भारी</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-DegfnpkOnOU/TeYTeRT5DhI/AAAAAAAAAcs/VmKrzV29dHw/s1600/baba.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/-DegfnpkOnOU/TeYTeRT5DhI/AAAAAAAAAcs/VmKrzV29dHw/s1600/baba.jpg" t8="true" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;२४ घंटे के खबरिया चैनल में सिर्फ बाबा रामदेव .अंग्रेजी सहित दूसरी भारतीय भाषा के अख़बारों में सिर्फ बाबा &amp;nbsp;रामदेव .यानी खबरों का सरोकार इनदिनों बाबा रामदेव से है जो&amp;nbsp;१अरब १२ करोड़ जनता की सरकार को धमका रहे है .केंद्र की हर दिल अजीज और लोकप्रिय यु पी&amp;nbsp;ए &amp;nbsp;सरकार जिसे दुबारा सत्ता में आने का मौका देश की जनता ने दिया वह एक अदना सा बाबा के सामने गिरगिरा रही है .बाबा रामदेव भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ&amp;nbsp;राजधानी&amp;nbsp;दिल्ली&amp;nbsp;में &amp;nbsp;आमरण अनशन करने वाले है लेकिन नींद सरकार की उडी हुई है .नेहरु जी और इंदिरा जी के बाद मनमोहन सिंह तीसरे कांग्रेसी प्रधानमंत्री है जिन्होंने देश पर ७ साल से अधिक राज किया है लेकिन एक अदना सा बाबा जिसकी बाजीगरी सांस तेज खीचने में है उसने प्रधानमंत्री की&amp;nbsp;साँसे&amp;nbsp;&amp;nbsp;अटका दी है .प्रधानमंत्री बाबा को मनाने के लिये चिठ्ठी लिख रहे है .आयकर विभाग से लेकर इ डी के आला अधिकारी कालाधन और आयकर चोरी का रहस्य और सरकार की मजबूरी से बाबा को अवगत करा रहे है .लेकिन बाबा तो बाबा है टी वी के जरिये पूरी दुनिया को अबतक योग रहस्य बताते रहे है अब उसी टीवी के जरिये&amp;nbsp;वो&amp;nbsp;&amp;nbsp;लोगों को कालाधन का रहस्य बताने सामने आये है लेकिन सरकार उन्हें यह मौका&amp;nbsp; नहीं देना चाहती है सो बाबा की दिल्ली एअरपोर्ट पर आने की खबर सुनते ही सरकार के आलामंत्री और संकटमोचक प्रणव मुखर्जी बाबा को घेरने एअरपोर्ट पहुँच गए .जो सरकार आम लोगो से बात करने के लिए तैयार नहीं है ,जो सरकार महगाई जैसी अहम् समस्या पर जनता की मांग को अबतक दरकिनार करती रही है वही सरकार बाबा से बात करने दौर लगा रही है .ये बाबा का रहस्य है या कलाधन का लेकिन जंतर मंतर का खोफ सरकार पर आज भी सर चढ़ कर बोल रहा है .&lt;br /&gt;भ्रष्टाचार के दल दल में फसे एक तथाकथित इमानदार प्रधानमंत्री की ये हालत किसने की है .माननीय अदालतों ने ,देश के बुद्धिजीवियों ने या फिर एन जी ओ ने ?जाहिर है पहले सोनिया जी का एन जी ओ राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् ने सरकार का कद छोटा किया तो दुसरे एन जी ओ वाले ने सरकार और संसद के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान लगा दिया .पेट्रोल प्राइस की बात हो या सब्सिडी की या फिर लोकपाल बिल की बात हो या फ़ूड सिक्यूरिटी की या फिर सांप्रदायिक दंगा विरोधी बिल राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के विद्वान सदस्य अपना वीटो पेश करके मंत्रीपरिषद् के निर्णयों को प्रभावित करते है .जाहिर है यह सोनिया जी का एन जी ओ है सो सरकार इसे लगभग सरकारी मसौदा मान लेती है .लेकिन अन्ना हजारे और अरविद केजरीवाल का एन जी ओ जब लोकपाल बिल पर अपना सुझाव सामने लाता है तो इसे पहले दरकिनार करने की कोशिश की जाती है .लेकिन पहलीबार देश के विभिन्न एन जी ओ ने दिखाया है कि वह सरकारी एन जी ओ पर भरी है क्योंकि सरकार से लोगों का भरोसा उठ चूका है ..राजधानी दिल्ली स्थित जंतर मंतर महज दो दिनों के अंदर तहरीर चौक का रूप ले लेगा, ऐसा अंदाजा न तो सरकार को था न ही आन्दोलनकारी को ऐसा यकीन था .&amp;nbsp; अन्ना हजारे का आमरण अनसन महज&amp;nbsp;५२&amp;nbsp;&amp;nbsp;घंटे में राष्ट्रव्यापी आन्दोलन बन गया .हर शहर के चौक चौराहे पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों की उमड़ी भीड़ सरकार को यह बता रही थी ,कि सब्र का पैमाना अब टूट चूका है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;गांधी के इस देश में आम लोगों का सरोकार सरकार से कितना है इसे इस सन्दर्भ में समझा जा सकता है .केंद्रीय बजट के रूप में सरकार हर साल ११-१२ लाख करोड़ रूपये का लेखा -जोखा प्रस्तुत करती है .मुल्क की प्रान्तों की सरकार भी हर साल २३-२५ लाख करोड़ रूपये खर्च करती है .यानी जिस देश में सरकारें ३५-३७ लाख करोड़ रुपया खर्च करती हो और वहां की ७० फीषद आवादी की आमदनी २० रुपया हो तो यह माना जा सकता है कि मुल्क के राजनेताओ और नौकरशाहो ने दलालों के जरिये आम लोगों के हिस्से को लूट लिया है .बाबा रामदेव आज यही बात लोगों को समझाने में कामयाब हुए है कि लूट के पैसे सरकार वापस लाती है तो यह मुल्क इंग्लॅण्ड और अमेरिका को भी पीछे छोड़ सकता है .बाबा रामदेव न तो कोई अर्थशास्त्री है न ही कभी जाँच एजेंसी से उनका सरोकार रहा है लेकिन वो दावा करते है कि सरकार उनकी बात माने तो वेदेशो में रखे ५०० खरब रुपया भारत वापस लाया जा सकता है .सरकार की मजबूरी यह है कि वह रोज सुप्रीम कोर्ट में कालाधन के मामले में फटकार सुन रही है लेकिन सूचि को सार्वजानिक करने को तैयार नहीं है .बाबा रामदेव सरकार की कमजोरी जान चुके है .लेकिन बाबा को पता है दवाब में आकर सरकार ने पहले अन्ना हजारे को संसद से भी महान बना दिया लेकिन आज सरकार के मंत्री उन्हें धमका रहे है .बाबा रामदेव यह भी जानते है कि कल तक सरकार दिग्विजय सिंह को अनाप सनाप बयान देने के लिए खुल्ला छोड़ दिया था .दिग्विजय सिंह हर मंच से बाबा को ललकार रहे थे लेकिन आज देश के प्रधानमंत्री उन्हें खुद पुचकार रहे है .बाबा सियासत और कांग्रेस की चाल से पूरी तरह वाकिफ है .&lt;br /&gt;लेकिन सवाल यह है देश के संसद से महज ५०० मीटर की दुरी पर स्थित जंतर मंतर पर कुछ एन जी ओ&amp;nbsp;के &amp;nbsp;अनसन से सरकार इतना क्यों विचलित हो उठती है कि कानून बनाने का जिम्मा सांसदों से छीन कर एन जी ओ वाले को दे दिया जाता है .कलाधन के मामले में सरकार संसद में चर्चा से बचती है लेकिन बाबा रामदेव से इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए ऐयेरपोर्ट पर दौर लगाती है .सरकार इखलाख से चलती है, सरकार भरोसे से चलती है, सरकार लोगों से संवाद बना कर चलती है .अगर यह सरकार में नहीं है तो माना जायेगा कि यह सरकार किसी के लिए चलायी जा रही है जिसका देश से कोई संवाद नहीं कोई सरोकार नहीं &amp;nbsp;है .बाबा रामदेव के भारत स्वाभिमान परिषद् और सोनिया जी के राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के बीच फसी यह सरकार को तय करना होगा कि वह किसके साथ है .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-6863235458274324454?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/6863235458274324454/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=6863235458274324454&amp;isPopup=true' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/6863235458274324454'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/6863235458274324454'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/06/blog-post.html' title='संसद पर एन जी ओ भारी'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-DegfnpkOnOU/TeYTeRT5DhI/AAAAAAAAAcs/VmKrzV29dHw/s72-c/baba.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-3347940685293277992</id><published>2011-05-20T04:29:00.000-07:00</published><updated>2011-05-20T04:29:34.871-07:00</updated><title type='text'>कानिमोझी के बाद कौन ?</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-wlbH-KI6NjU/TdZQWeTnZpI/AAAAAAAAAco/OVUkeezVxF8/s1600/kaani.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" j8="true" src="http://4.bp.blogspot.com/-wlbH-KI6NjU/TdZQWeTnZpI/AAAAAAAAAco/OVUkeezVxF8/s1600/kaani.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;२जी&amp;nbsp;स्पेक्ट्रोम&amp;nbsp;&amp;nbsp;मामले में करुनाधि की बेटी कानिमोझी की गिरफ़्तारी ने मौजूदा भ्रष्ट व्यवस्था के ताबूत में एक और कील ठोक दी है .१ लाख ७६ हजार करोड़ रूपये के टू जी घोटाले को लेकर बहस का दौर अभी जारी है .इस बहस में पिछले वर्षो में हुए लाखों करोडो रु के दुसरे घोटाले की चर्चा का स्वर अभी धीमा है .दर्जनों&amp;nbsp;&amp;nbsp;घोटाले और भ्रष्ट घोटालेवाजो की सुनवाई उची अदालतों में हो रही है .कई महा घोटालो की सुनवाई खुद सुप्रीम कोर्ट कर&amp;nbsp;रहा&amp;nbsp;&amp;nbsp;है जाहिर है पूर्व केंद्रीय मंत्री&amp;nbsp;डी&amp;nbsp;राजा और डी एम् के सांसद&amp;nbsp;कानीमोझी&amp;nbsp;सहित&amp;nbsp;कई&amp;nbsp;आला&amp;nbsp;अधिकारी&amp;nbsp;नप&amp;nbsp;गए&amp;nbsp;&amp;nbsp;है&amp;nbsp;. सवाल यह है एक क्षेत्रीय पार्टी डी एम् के का आज राजनितिक अस्तित्व संकट में है लेकिन इन तमाम घोटाले में बराबर का हिस्सेदार रही कांग्रेस एक के बाद एक जीत का जश्न मनाने में व्यस्त है .सुरेश कलमाड़ी को छोड़कर अन्य किसी बड़ी मछली पर अभी हाथ डालने की हिम्मत सरकारी एजेंसी नहीं दिखा रही है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;बीस साल पहले महज ९०० करोड़ के चारा घोटाले के कारण लालू यादव को जेल की हवा खानी पड़ी थी .लालू जी ने इसे राजनितिक साजिश करार दिया था .ये अलग बात है की कांग्रेस को साथ लेकर उन्होंने १५ साल तक बिहार अपनी सत्ता बरकरार रखी.मौजूदा दौर में लालू घोटाले के कारण हाशिये पर नहीं गए है बल्कि नीतिश कुमार ने उनका जातीय समीकरण गड़बड़ा दिया है .राजनितिक विश्लेषक तमिलनाडु में डी एम् के की महा दुर्गति के लिए टू जी घोटाले को जिम्मेदार मानते है लेकिन सवाल यह है दर्जनों घोटाले के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाले असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगई दुबारा क्यों प्रचंड बहुमत से सत्ता में आये है .केरल के अच्युतानद हो या बंगाल के बुद्धदेव&amp;nbsp; घोटाले के कारण वे सुर्खियों में कभी नहीं आये लेकिन&amp;nbsp;अवाम&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;की अदालत में वे दोषी करार दिए गए .सी बी आई के फंदे से अभी भी मुलायम सिंह यादव और मायावती जी बहार नहीं हुए है .केंद्र की राजनितिक सहूलियत के आधार पर सी बी आई इनके केस की मेरिट तय करती है .हालाँकि इनका मामला भी सुप्रीम कोर्ट में है लेकिन कोतवाल अपना हो तो डर काहेका .क्षेत्रीय पार्टिया अक्सर घोटाले को लेकर कलंकित हुई है घोटाला इनकी मजबूरी है पार्टी चलानी है तो पैसा चाहिए, ये पैसा इन्हें उद्योगपतियों से मिलने वाला नहीं है सो बिहार में चारा घोटाला होता है ,तो यु पी में रासन घोटाला तो कही जमीन घोटाला तो कही साडी घोटाला .यानी आमलोगों के हिस्से का सबसे ज्यादा हक खा जाने वाले लोग ही आम लोगों के नेता होने का दावा करते है .लेकिन सवाल यह है की इन क्षेत्रीय दलों के घोटाले ही सुर्ख़ियों में क्यों आते है ?तो क्या क्षेत्रीय दलों के संगठन का आधार ही लूट -खसोट के फलसफे पर आधारित है ? &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span&gt;समाज सेवी अन्ना हजारे कहते है की अगर वे आज की तारीख में चुनाव लड़े तो उनका जमानत जप्त होना तय है .भ्रष्टाचार के खिलाफ पुरे देश में एक बुलंद आवाज लगाने वाला अन्ना चुनावी भ्रष्टाचार से इतना आशंकित है कि वह कोई चुनाव लड़ने का हिम्मत नहीं दिखा पा रहा है .लेकिन राजनितिक पंडित अन्ना की बात को गलत साबित करते है .(यह जानते हुए भी कि पिछले वर्षो में सांसद से लेकर विधायक बनने वालों की सूचि में करोडपति सबसे ज्यादा है )इनका तर्क है कि तमिलनाडु के हालिया चुनाव में सबसे ज्यादा पैसे बाटे गए .इक्का दुक्का छापे में चुनाव अधिकारीयों ने ८० करोड़ रु जब्त किये थे .लेकिन पैसे का यह खेल कामयाब नहीं हो सका और लोगों ने करूणानिधि को भारी शिकस्त दी .तो क्या माना जाय कि चुनावी सियासत में पैसे का यह खेल ख़तम हो गया है .चुनावी सियासत में पैसा का यह खेल तबतक ख़तम नहीं होगा जबतक देश की राष्ट्रीय पार्टिया अपने गिरेबान में न झांके .वीकी लीक के खुलासे में कांग्रेस के पूर्व मंत्री अपने वर्तमान मंत्री के बारे में यह खुलासा करता है कि उनका अमुक मंत्री आज किसी को जेट हवाई जहाज भी किसी को गिफ्ट देने की स्थित में है .भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपनी सफाई देते हुए प्रधानमंत्री अगर यह कहते है यह गठ्वंधन सरकार की मजबूरी है और कांग्रेस इसमें बेदाग है तो गठबंधन सरकार&amp;nbsp;आज कानीमोझी की गिरफ़्तारी पर&amp;nbsp;कानून&amp;nbsp;की&amp;nbsp;दुहाई&amp;nbsp;क्यों&amp;nbsp;दे&amp;nbsp;रही है .कांग्रेस&amp;nbsp;की बड़ी&amp;nbsp;शख्शियत&amp;nbsp;की गिरफ़्तारी क्यों नहीं हो रही है .२०११&amp;nbsp;में कानिमोझी&amp;nbsp;आज सलाखों&amp;nbsp;के&amp;nbsp;पीछे है तो २०१४ में कांग्रेस के भी कई बड़े चेहरे इन्ही फेहरिस्त में होंगे&amp;nbsp;.न्यायलय&amp;nbsp;पर लोगों का&amp;nbsp;भरोसा&amp;nbsp;आज भी&amp;nbsp;कायम&amp;nbsp;है तो लोग&amp;nbsp;वोट&amp;nbsp;की&amp;nbsp;कीमत&amp;nbsp;भी जानते है .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-3347940685293277992?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/3347940685293277992/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=3347940685293277992&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3347940685293277992'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3347940685293277992'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/05/blog-post.html' title='कानिमोझी के बाद कौन ?'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-wlbH-KI6NjU/TdZQWeTnZpI/AAAAAAAAAco/OVUkeezVxF8/s72-c/kaani.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-120706164332235016</id><published>2011-04-16T05:25:00.000-07:00</published><updated>2011-04-17T21:57:34.993-07:00</updated><title type='text'>क्या उखाड़ लेंगे अन्ना</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-0eLoE6lRRk4/TamKpROMDEI/AAAAAAAAAck/L8QPreJZpXc/s1600/corruption.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" src="http://3.bp.blogspot.com/-0eLoE6lRRk4/TamKpROMDEI/AAAAAAAAAck/L8QPreJZpXc/s200/corruption.jpg" width="177" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;हाथ में दो केला और एक सेव थामे मै कुछ देर निर्विकार भाव से ठेले वाले को निहारता रहा ..मुझे लगा उसने अभी अभी जो कीमत बताई है वह शायद उसका फम्बल था&amp;nbsp; .मैंने उसे&amp;nbsp; रिटेक देने के आग्रह के साथ दुबारा कीमत बताने को कहा .उसने लगभग खीजते हुए कहा "यहाँ रिटेक नहीं चलता आपने सही सुना है " यानि पुरे ४५ रुपया ठेले वाले &amp;nbsp; को &amp;nbsp;भुगतान &amp;nbsp;करके मै यह गीत गुनगुनाता वापस ऑफिस की ओर चला "मोरे सैया तो खुबे कमात है ,महगाई डायन खाई जात है " .फल खाने का यह आईडिया अचानक क्यों आया .इस बात पर मैं खुद अपने आपको कोस रहा था .अभी अभी तो कैंटीन वाला से लड़कर बाहर आया था .४० रुपया में थाली ,लूट है क्या ? मैंने हुंकारते हुए कहा था इतने पैसे के फल खरीद कर खा लेंगे .बुद्ध को ज्ञान प्राप्त होने में १८ साल लग गए थे लेकिन मुझे यह ज्ञान कुछ मिनटों में मिलगया .ऑफिस आकर मै यह खबर पढ़ कर तनिक भी विचलित नहीं हुआ की मुंबई में एक माँ अपने 6 साल के बेटे को लेकर ७ वी मंजिल&amp;nbsp; से छलांग लगा दी .ओड़िसा में एक माँ ने &amp;nbsp;पाच बच्चों के साथ &amp;nbsp; आत्महत्या कर ली .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;देश के १२ लाख करोड़ रूपये के बजट बनाने वाले वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी कहते है कि महगाई रोकने की कोशिश होगी तो देश का विकास दर रूक जायेगा .यानी इस देश को अगर ९ फीसद १० फीसद का विकास दर चाहिए तो १०० -२०० लोगों की आत्महत्या से विचलित नहीं होनी चाहिए.विकास दर बनाये रखना जरूरी है क्योंकि यह मुल्क के लिए गौरव की बात है .इसी विकास दर के कारण पिछले १० साल में देश में १ लाख से ज्यादा अरब पति पैदा हुए है .दुनिया के अरबपतियो की सूची &amp;nbsp;में भारत का तीसरा स्थान है .ये अलग बात है युनायटेड नेशन ने गरीबी और भूख पर अपनी रिपोर्ट जारी करते हुए भारत की हालत पाकिस्तान और बंगलादेश से भी जर्जर बताया है .काला धन पर सुप्रीम कोर्ट में चर्चा के दौरान यह बताया गया &amp;nbsp;कि देश का ५००० अरब रुपया विदेशो के बैंक में जमा है .इसके साथ यह भी कहा गया कि काला धन का यह पैसा देश में वापस आ जाय तो प्रति व्यक्ति कि हिस्सेदारी इसमें २ लाख से ज्यादा होगी .यकायक लखपति बनने का ख्वाव पाले मेरे जैसे लोग भले ही इस काले&amp;nbsp; धन की वापसी का इंतजार करने लगे हो लेकिन जरा सोचिये लखपति मतदाता कभी पांच सो में अपना इमान बेचेगा ,कभी सिर्फ एक बोतल दारू में तो कभी एक साडी और धोती के लिए राजा जैसे लीडर को अपना कीमती वोट देगा ?&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;सिर्फ तमिलनाडु के चुनाव में अधिकारीयों ने ५०&amp;nbsp;करोड़ रूपये जप्त किये है .बसों पर गाड़ियों में लदे नोटों की बोडिया और गाहे बगाहे उसकी धड पकड के खबरे यह बताने के लिए काफी है कि एक लाख ७५ हजार करोड़ रुपया का २ जी घोटाला ने तमिलनाडु के &amp;nbsp;चुनावी माहोल को कैसे गरमाया है .विशेज्ञ बताते है ३००० करोड़ रुपया से ज्यादा काला धन इस चुनाव में लुटाये गए है .जाहिर है देश की ९ फीसद की विकास दर इस पैसे को जल्द ही वसूल देगी&amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;अन्ना हजारे को जब कांग्रेसी लीडर ने चुनाव लड़ने के लिए ललकारा तो बड़े ही विनम्रता से उन्होंने कह दिया कि वे चुनाव जरूर हार जायेंगे .उन्होंने कहा था कि जिस देश में महज सौ पचास रूपये देकर वोट ख़रीदे जाते है वहां कोई नेक ,सचरित्र और इमानदार चुनाव कैसे जीत सकता है ?यही सवाल एक बार फिर लोकपाल बिल को लेकर छिड़ी बहस के बीच से उभरा है .पहली बैठक में अन्ना की टीम रक्षात्मक मुद्रा में है ,सरकार के दिग्गज वकीलों की फौज के सामने जनता के वकील मिमयाने लगे है .नेता कह रहे है ये जन लोकपाल वाले अगर सिविल सोसाइटी से है तो क्या इस देश की संसद चलाने वाले लोग अनसिवीलाइज्द है .?अगर लोकतंत्र बहुमत का नाम है तो जीत किसकी होगी यह भी तय है ..देश के रग रग में समाया भ्रष्टाचार की बीमारी क्या &amp;nbsp;अन्ना के &amp;nbsp;महज चार दिनों के उपवास से &amp;nbsp;ख़तम हो जायेगा यह एहसास धीरे धीरे लोगों को होने लगा है .हमारे बस के मालिक कम ड्राईवर सरदार जी अन्ना के अनसन को समर्थन देने रोज जंतर मंतर जाते थे .धरना पर उन्होंने मुझे बताया था कि यहाँ आकर उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है .धरना ख़तम होने के साथ ही पूरा देश जश्न मना रहा था लेकिन अगले ही दिन&amp;nbsp; सरदार जी को जनपथ चौक पर खड़ी &amp;nbsp;ट्राफिक पुलिस जन लोकपाल बिल का मतलब समझा रही थी .सरदार जी बटुए से पांच सौ रूपये देकर &amp;nbsp;बस में वापस आए .मैंने कहा एक दिन भी तो रूक जाते ! &amp;nbsp;तुनकते हुए सरदार जी ने कहा था क्या उखाड़ लेंगे अन्ना इसका ?&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-120706164332235016?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/120706164332235016/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=120706164332235016&amp;isPopup=true' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/120706164332235016'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/120706164332235016'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/04/blog-post_16.html' title='क्या उखाड़ लेंगे अन्ना'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-0eLoE6lRRk4/TamKpROMDEI/AAAAAAAAAck/L8QPreJZpXc/s72-c/corruption.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-989444927913998558</id><published>2011-04-07T03:58:00.000-07:00</published><updated>2011-04-07T03:58:47.064-07:00</updated><title type='text'>अन्ना नहीं यह आंधी है .......</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/-xFFP-zEfvPU/TZ2HV4t1oSI/AAAAAAAAAcY/4AHPSvuzsP0/s1600/anna.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="133" src="http://2.bp.blogspot.com/-xFFP-zEfvPU/TZ2HV4t1oSI/AAAAAAAAAcY/4AHPSvuzsP0/s200/anna.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;अन्ना नहीं यह आंधी है ,मुल्क का दूसरा गाँधी है .राजधानी दिल्ली स्थित जंतर मंतर महज दो दिनों के अंदर तहरीर चौक का रूप ले लेगा, ऐसा अंदाजा न तो सरकार को था न ही आन्दोलनकारी को ऐसा यकीन था .&amp;nbsp; अन्ना हजारे का आमरण अनसन महज २४ घंटे में राष्ट्रव्यापी आन्दोलन बन गया .हर शहर के चौक चौराहे पर भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों की उमड़ी भीड़ सरकार को यह बता रही थी ,कि सब्र का पैमाना अब टूट चूका है .तो क्या यह माना जाय कि अन्ना की अगुवाई में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है .तो क्या माना जाय कि अन्ना ने सही वक्त पर चोट की&amp;nbsp; है और मामूली चोट से हुकूमत तिलमिला गयी है .मामला&amp;nbsp; जनलोकपाल बिल का है .मामला सिविल सोसाइटी और सरकार के बीच पहले मुर्गी कि पहले अंडा का है .लेकिन यह साफ है कि न तो सिविल सोसाइटी पर सरकार को भरोसा है न ही सिविल सोसाइटी को&amp;nbsp; राजनेता पर कोई यकीन है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;गांधी के इस देश में आम लोगों का सरोकार सरकार से कितना है इसे इस सन्दर्भ में समझा जा सकता है .केंद्रीय बजट के रूप में सरकार हर साल ११-१२ लाख करोड़ रूपये का लेखा -जोखा प्रस्तुत करती है .मुल्क की प्रान्तों की सरकार भी हर साल २३-२५ लाख करोड़ रूपये खर्च करती है .यानी जिस देश में सरकारें ३५-३७ लाख करोड़ रुपया खर्च करती हो और वहां की ७० फीषद आवादी की आमदनी २० रुपया हो तो यह माना जा सकता है कि मुल्क के राजनेताओ और नौकरशाहो ने दलालों के जरिये आम लोगों के हिस्से को लूट लिया है .सिर्फ उत्तर प्रदेश में राशन और सस्ते अनाज के वितरण में ४० हजार करोड़ का घोटाला हो ,एक खेल के आयोजन में ७५ हजार करोड़ रूपये का घोटाला हो ,कुछ तरंगे बेचने में मंत्री देश का १.५० लाख करोड़ का चुना लगा देते हो .सैनिको के लिए बनने वाले भवन को राजनेता अपने लिए हथिया कर इसे आदर्श घोटाला कह रहे हो .तो यह मान लेना चाहिए कि इस देश का विधान इतना लचर हो गया है इस देश का तथाकथित नेतृत्व इतना असंवेदनशील हो गया है कि उसे सरकारी खजाने की लूट की चिंता नहीं है क्योंकि उसे किसी भी सूरत में सरकार चलानी है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;सरकारी लोकपाल बिल के विरूद्ध जब अन्ना हजारे ने अपना जन लोकपाल बिल हुकूमत के सामने रखा तो सरकार ने यह कह कर ख़ारिज कर दिया कि सिविल सोसाइटी के इस बिल पर सरकार गौर नहीं कर सकती क्योंकि बिल का ड्राफ्टिंग करना लोगो का अधिकार नहीं है .यह काम सिर्फ बाबू कर सकते है या फिर नेता .लेकिन पिछले ४० वर्षों से यह लोक पाल बिल पारित क्यों नहीं हो सका इसका जवाब सरकार के पास नहीं है .सरकारी बिल में नेता और नौकरशाहो पर कोई आंच नहीं आये इसका पुख्ता इंतजाम किया गया है लेकिन सरकार की यह जीद बरक़रार है कि कानून बनाने के मामले में लोगों की दखल वर्दाश्त नहीं है .कानून के विशेषज्ञ और मौजूदा सरकार के वरिष्ठ मंत्री टेलकॉम मंत्रालय सँभालते ही यह एलान कर दिया था कि स्पेक्ट्रम घोटाला में सरकार का कोई नुकसान नहीं हुआ है .अगर इस घोटाले की जाँच सरकार कर रही होती तो राजा तमिलनाडू के चुनाव में प्रचार कर रहे होते .लेकिन भला हो सुप्रीम कोर्ट का जो राजा समेत कई ऑफिसर इन दिनों जेल में बंद है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;मामला चाहे २जी का हो कॉमन वेल्थ गेम का हो या आदर्श घोटाला को या फिर लाखों करोड़ रूपये के काले धन का मामला हो सुप्रीम कोर्ट अपनी तत्परता दिखाकर इन मामलों में दोषियों पर नकेल कसने की कोशिश की है लेकिन सरकार का रबैया हमेशा उदासीन ही रहा है .अगर कोर्ट अपना कर्तव्य मानकर अंधी सरकार को राह दिखा रहा है तो क्या सिविल सोसाइटी का यह अधिकार और फर्ज नहीं है कि वह भी सत्ता की लालच में फसे अपने कमजोर नेतृत्व को रास्ता दिखाए .क्या अन्ना को इसलिए ख़ारिज किया जा सकता है कि वे कपिल सिब्बल की तरह न तो अंग्रेजी बोलते है ,न ही कानून के विशेषज्ञ है और न ही सरकार के मंत्री है .लेकिन लाकतंत्र के इस महान देश में लोगों का भरोसा आज कपिल सिब्बल पर नहीं है बल्कि उसका नेता अन्ना हजारे है .मुल्क का कानून बनाने का हक अन्ना को किसी से ज्यादा है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-989444927913998558?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/989444927913998558/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=989444927913998558&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/989444927913998558'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/989444927913998558'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/04/blog-post.html' title='अन्ना नहीं यह आंधी है .......'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-xFFP-zEfvPU/TZ2HV4t1oSI/AAAAAAAAAcY/4AHPSvuzsP0/s72-c/anna.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-619041356559726472</id><published>2011-03-05T04:03:00.000-08:00</published><updated>2011-03-05T04:03:47.378-08:00</updated><title type='text'>पाकिस्तान में ब्लासफेमी  का ब्लास्ट</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="https://lh3.googleusercontent.com/-eRpiBi3rxi0/TXH44BVNhvI/AAAAAAAAAcI/SpavzXQ-Zeg/s1600/pakistan.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="132" src="https://lh3.googleusercontent.com/-eRpiBi3rxi0/TXH44BVNhvI/AAAAAAAAAcI/SpavzXQ-Zeg/s200/pakistan.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;सस्ता खून और महगा पानी पाकिस्तान में कहाबत नहीं बल्कि जीवन की हकीकत है .पुरे मुल्क में खुनी खेल का सिलसिला जारी है .आम आदमी मारे जा रहे है तो वी आई पी भी&amp;nbsp; ..ब्लासफेमी  लाव की मुखालफत के नाम पर गवर्नर सलमान तासीर की मौत हो चुकी है तो फेडरल मिनिस्टर शाहबाज भट्टी को भी मौत की नींद सुला दिया गया है .सलमान तासीर की हत्या उनके बॉडी गार्ड ने की तो शाहबाज की हत्या पाकिस्तान के तालिबान ने .यानी मुल्क में आज कुख्यात  इश निंदा कानून के पैरोकार मुल्ला - मिलिट्री और दहशतगर्द तंजीमो  के सामने सरकार और समाज ने घुटने टेक दिए है .हालत को इस तरह समझा जा सकता है की एक गवर्नर की मौत पर कोई दो शब्द सहानुभूति के भी नहीं आये .मुल्क के सद्र और वजीरे आजम ने सलमान की मौत पर चुपी साध ली तो मुल्लाओं ने उनके आखरी रसुमात पर किसी मौलबी को भी नमाज पढने की इज़ाज़त नहीं दी और कातिल कादरी पर फूल बरसाए गए .यही हाल कमोवेश शाहबाज भट्टी को लेकर भी था .लेकिन&amp;nbsp; एलिट क्लास के लोगों की बर्बर हलाकत और पाकिस्तान में समाज की अनदेखी कुछ अलग कहानी वया कर रही है .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;१९०६ में पहलीबार आल इंडिया कांग्रेस के सामने मुस्लिम जमींदारो ,राजे राज्बारों ने मुस्लिम लीग के नाम से एक अलग पार्टी वजूद में लाया .मकसद था कांग्रेस की सियासत की धार कमजोर करना .मुल्क के एलिट मुस्लिम क्लास का इन्हें भारी समर्थन हासिल हुआ लेकिन आम मुसलमान और उनके सियासी रहनुमा कांग्रेस से जुड़े रहे .मुस्लिम लीग के कद्दावर नेता मो अली जिन्ना ने खुद शुरुआती दौर में&amp;nbsp; मजहब के नाम पर अलग पार्टी का विरोध किया था .लेकिन ये अलग बात है की १९३४ में जब मुल्क के एक बड़े जमींदार चौधरी रहमत ने एक अलग मुल्क पाकिस्तान का नाम वजूद में लाया तो जिन्ना उस मजहबी सियासी धारे से अपने को अलग नहीं कर सके .मुल्क के जमींदार मुसलमानों को यह अंदेशा था कि आज़ादी मिलते ही उनका वजूद खतरे में पड़ जाएगा सो उन्होंने कांग्रेस के तेज तर्रार नेता मो अली जिन्ना को अपने साथ लिया .तारीख में झाँकने की जरूरत इसलिए है कि जिन लोगों ने अपने लिए पाकिस्तान बनाया आज वही पाकिस्तान उन्हें हाशिये पर खड़ा कर दिया है .पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के ठीक एक साल बाद ही कायदे आज़म को यह एहसास हो गया था कि यह फैसला उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल थी .लेकिन बाकी एलिट क्लास को यह समझने में थोडा वक्त लगा कि मजहब की सियासी बुनियाद काफी कमजोर होती है .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;१९४७ से लेकर आज तक पाकिस्तान की हुकूमत यह तय नहीं कर पायी है कि मुल्क की दिशा और दशा क्या होनी चाहिए ?. कभी सामन्ती और पढ़े लिखे  लोगों का नेतृत्व इस्लाम के नाम पर अपनी सत्ता मजबूत करने की कोशिश करता है तो बंगलादेश के नाम से अलग मुल्क का संघर्ष इस्लाम के नाम पर मुल्क की अवधारणा को गलत साबित करती है . कभी पाकिस्तान मे इलीट फौज&amp;nbsp; कश्मीर का बहाना बनाकर पाकिस्तान मे अपनी सत्ता मजबूत करता है ,तो कभी भारत के खिलाफ नफरत फैला कर वही इलीट जनरल  जिहाद की वकालत करता है&amp;nbsp; . १९८५ के दौर मे जनरल जिया ने अमेरिका का साथ लेकर मुल्ला और मिलिट्री&amp;nbsp; का एक गठजोड़ बनाया और पुरे पाकिस्तान में हर आम और खास को बम और बारूद सुलभ बना दिया . इस दौर मे आतंकवादियों का एक दो नहीं ५० से ज्यादा संगठन बने जिन्हें पाकिस्तान में फलने -फूलने  की पूरी छूट दी गयी . पाकिस्तान का हर मस्जिद और मदरसे इनके गिरफ्त में आ गये जहाँ नफरत की फसल तैयार होने लगी .जिनका इस्तेमाल कभी अफगानिस्तान में किया गया तो कभी जिया के&amp;nbsp; दहशतगर्दों को भारत के खिलाफ झोंक दिया गया . इन वर्षों में इन सरकारी दहशतगर्दों ने सिर्फ भारत में ही २०००० से ज्यादा लोगों की जान ली . लेकिन चुकी पाकिस्तान ने इन दहशतगर्द करवाई को कश्मीर की आज़ादी के साथ जोड़ रखा था ,इसलिए दुनिया ने इसे आतंकवादी कहने के वजाय इन आतंकवादियों को फ्रीडोम फाइटर का दर्जा दे रखा था . लेकिन ९\११ के अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड सेण्टर पर हुए आतंकवादी हमले ने दुनिया को एहसास कराया कि आतंकवाद को अलग अलग चश्मे मे देखने की वजह से ही पाकिस्तान मे जेहादियों को फलने फूलने का मौका दिया है .पाकिस्तान से निकलकर अब जेहादी&amp;nbsp;&amp;nbsp;पश्चिम के मुल्कों में निज़ामे मुश्तफा का परचम फहराने लगे है . आतंकवाद के खिलाफ पश्चिम के मुल्को खासकर अमेरिका के सख्त रबैये ने पाकिस्तान की रणनीति को गड़बड़ा दिया&amp;nbsp; और अब वहा की हुकूमत और आतंकवादी आमने सामने है ..लेकिन जनरल जिया के ब्लासफेमी लाव पुरे समाज को तिल तिल कर मरने पर मजबूर कर दिया है .यानी इस कानून को अपना कारगर हथियार बनाकर बुनियाद परस्त तंजीमो ने सिविल सोसाइटी और हुकूमत के मुह बंद कर दिए है .खुद जनरल कियानी आज अगर यह मान रहे है कि सलमान तासीर और भट्टी की हलाकत की&amp;nbsp; सार्वजानिक निंदा नहीं की जा सकती है .यानी पाकिस्तान में कानून का कम और बन्दूक का जोर ज्यादा है .. &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;&amp;nbsp; जिस विष बेल को पाकिस्तान ने बड़ा किया वही आज पाकिस्तान को डस रहा है . इस्लामाबाद से लेकर लाहोर तक पेशावर से लेकर कराची तक पाकिस्तान का शायद ही कोई शहर है जो आतंकवादी हमले से लहुलाहन न हो . रावलपिंडी का आर्मी हेड&amp;nbsp; कुआटर&amp;nbsp; &amp;nbsp; से लेकर लाहोर का पुलिस छावनी ,आई एस आई के दफ्तर से लेकर मस्जिद तक हर प्रतिष्ठान धमाको से दहल रहा है . इस्लामिक देश पाकिस्तान मे शिया , आतंकवादी के निशाने पर है तो मस्जिद मे नमाज अदा करने आये नमाजी  जब तब आतंकवादियों के धमाके के शिकार हो जाते है . पिछले वर्षो में १०००० से ज्यादा आम शहरी पाकिस्तान की बुनियाद परस्त सियासत के शिकार हो चुके है लेकिन पाकिस्तान में इंतजामिया और फौज&amp;nbsp; किसी बड़े विद्रोह की आशंका के कारण खामोश तमाशबीन बनी हुई है .क्या पाकिस्तान की ये हालत वाकई किसी पडोशी मुल्क के लिए खुशखबरी हो सकती है ?&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;अमेरिकी नागरिक रेमन डेविस के बहाने पाकिस्तान की बुनियाद परस्त तंजीमे अमेरिका का मुहं चिढ़ा रही है .डेविस की रिहाई को लेकर अमेरिकी दवाब पाकिस्तान में बेअसर साबित हो रहे है .यह उस अमेरिका की हालत है जिसकी मदद से पाकिस्तान का अर्थशास्त्र कायम है .हर साल अमेरिका ३-४ बिलियन डालर की मदद पाकिस्तान को देता है शायद इस भ्रम में कि पाकिस्तान उसे अफगानिस्तान के पचड़े से उबार लेगा .लेकिन अमेरिका खुद पाकिस्तान में फसता नज़र आ रहा है .&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;अल्लाह -आर्मी और अमेरिका पाकिस्तान की सियासी -समाजी जिन्दगी का अहम् हिस्सा रहा है .मौजूदा दौर में इलीट क्लास के घटते रसूख के कारण अमेरिका का असर कमजोर होने लगा है .निम्न और मध्यम वर्ग ईश निंदा कानून के जनून में इस कदर मस्त है कि वह सब कुछ कुर्बान करने को तैयार है .यानी ब्लासफेमी लाव ने मुल्लाओ को एक कारगर हथियार&amp;nbsp; दे दिया है और वह इस हथियार से पुरे समाज को हांक रहा है .पाकिस्तान के&amp;nbsp; दानिश्वर और संपन्न तबका या तो पाकिस्तान से रुखसत कर गए है या फिर मुर्दों  की ख़ामोशी अख्तियार कर ली है .मजहबी जनून के सामने मुल्क के तमाम इदारे बौने साबित हुए है .लेकिन पूरी दुनिया खामोश है शायद इस भ्रम में कि इस समस्या का हल अमेरिका ढूंढेगा .आज पुरे अरब वर्ल्ड में तानाशाहों ,राजे रजवारों के खिलाफ जबरदस्त मुहीम चल रही है .जन आन्दोलन की इस आंधी में कई तानाशाह धरासायी हो चुके है तो कई तानाशाह वक्त का इंतजार कर रहे है लेकिन अरब वर्ल्ड में यह जनांदोलन मजहबी नहीं बल्कि इसका आधार आर्थिक है लेकिन इसके उलट पाकिस्तान में एक कट्टरपंथी आन्दोलन जबरन अपने साथ पुरे समाज को प्रभावित कर रहा है .और जर्जर तबाह पाकिस्तान की हालत से लोगों का ध्यान हटा दिया है . तो क्या यह इंतजामिया की साजिश है ?&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;पाकिस्तान में मकबूल तमाम इस्लामिक नजरिये का केंद्र भारत रहा है .देवबंदी से लेकर बरेलवी तक अहले हदीश से वहाबी तक तमाम विचारधाराओं का जन्म भारत के ही शहरो में हुआ था .लेकिन भारत के सेकुलर धारा में इन नजरिये का कभी भी बेजा इस्तेमाल नहीं हुआ जाहिर है पाकिस्तान में जरी संकीर्ण मजहबी बहस में भारत के प्रतिष्ठित इदारे पाकिस्तान को इस संकट से बाहर निकाल सकता है .लेकिन पाकिस्तान में जिस कदर मजहबी कट्टरता सामाजिक ताने वाने को विगाड रही है .सत्ता शीर्ष पर बैठे लोग खामोश बने बैठे .इस हालत में भारत के सामने यह बड़ी चुनौती होगी कि वह किसके साथ संवाद जोड़े .पाकिस्तान में सरकार के वजूद पर पहले ही आर्मी और मुल्लाओ ने पहले ही सवालिया निशान लगा दिया था .फौज से भारत का कोई संवाद नहीं है लेकिन सत्ता पर कविज होने के लिए फौज एक बार फिर मौका ढूंढ़ रही है लेकिन इस बार आर्मी के साथ अल्लाह जरूर है लेकिन अमेरिका नहीं है .....&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-619041356559726472?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/619041356559726472/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=619041356559726472&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/619041356559726472'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/619041356559726472'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/03/blog-post.html' title='पाकिस्तान में ब्लासफेमी  का ब्लास्ट'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='https://lh3.googleusercontent.com/-eRpiBi3rxi0/TXH44BVNhvI/AAAAAAAAAcI/SpavzXQ-Zeg/s72-c/pakistan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-8243708086191892887</id><published>2011-02-16T02:53:00.000-08:00</published><updated>2011-02-16T02:53:49.689-08:00</updated><title type='text'>इस्तीफा भी दे सकते है प्रधानमंत्री ?</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/-iwqWTSjUmWU/TVurxNVVChI/AAAAAAAAAcE/iYBkrM01Afw/s1600/pradhan.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="125" j6="true" src="http://3.bp.blogspot.com/-iwqWTSjUmWU/TVurxNVVChI/AAAAAAAAAcE/iYBkrM01Afw/s200/pradhan.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;आम तौर पर अपना मुहं बंद रखनेवाले प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने आखिरकार अपना मुह खोला ,कई बार जवान फिसली ,कई बार सवाल टाल गए लेकिन एलोक्ट्रोनिक मिडिया के संपादकों के साथ बातचीत मे उन्होंने यह जरूर साबित कर दिया कि वे ज्यदादिनो तक अपना मुंह बंद नही रखेंगे .आमतौर पर प्रधानमंत्री साल मे सिर्फ एकबार मीडिया से रुबरु होते है लेकिन भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घिरी सरकार के मुखिया होने के कारण उन्होंने यह जरूरत समझी कि अपना पक्ष लोगों के सामने रखे.उन्होंने यह साफ़ कर दिया कि वे मजबूर है ,उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया कि सरकार मे हर फैसले उनके ही मुताबिक नही होते है .उन्होंने यह भी साफ़ कर दिया है कि गठबंधन की सरकार चलानी है तो मुखिया को कही न कही समझौता करना ही पड़ता है .यानि २जी स्पेक्ट्रुम मे मची लूट से वे पूरी तरह वाकिफ थे लेकिन वे राजा पर कोई कारवाई नही कर सके .उन्होंने यह भी साफ़ किया कि राजा को उन्होंने २००७ विधि सम्मत फैसले लेने को कहा था फिर भी राजा ने उन्हें अनसुना किया .खास बात यह है कि जब प्रधानमंत्री राजा के बारे मे सबकुछ जानते थे फिर उन्हें यु पी ऐ -२ के सरकार गठन के मौके पर दुबारा वही मंत्रालय क्यों सौपा&amp;nbsp; .प्रधानमंत्री कहते है कि ये गठबंधन की मजबूरी है या फिर वे यह कहना चाहते थे कि उन्हें सिर्फ मंत्रियों की लिस्ट दी गयी थी फैसला किसी और के हाथ मे था .&lt;br /&gt;एक ईमानदार प्रधानमंत्री का भ्रष्ट प्रशासन प्रधानमंत्री के लिए जूमला बनगया है .यानि पिछले ७ वर्षों मे २जी ,सी डब्लू सी ,आदर्श ,इसरो -जैसे दर्जनों घोटाले सामने आये .देश का लाखो -करोडो रुपया लूटा जाता रहा और प्रधानमंत्री खामोश रहे क्या कोई इमानदार प्रधानमंत्री ऐसे तमाम आरोपों को अपने सर ले सकता है ?शायद नही यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने चुप्पी तोड़ी है .पिछले संसद सत्र के दौरान जब प्रधानमंत्री ने यह कहा था कि वे पी ए सी के सामने हाजिर होने के लिए तैयार है तो सबसे ज्यादा इस बयान पर आपति प्रणव मुखर्जी को&amp;nbsp; थी .तब विपक्ष ने मांग की थी जब प्रधानमंत्री पी ऐ सी को जवाब दे सकते है तो जे पी सी को क्यों नही .अपने को बेदाग बताते हुए प्रधानमंत्री ने यह साफ़ कर दिया कि किसी भी घोटाले मे उनका व्यक्तिगत कोई लेना देना नही है लेकिन जब टाइम्स नॉव के संपादक ने इसरो -देवास के मामले मे प्रधानमंत्री कार्यालय पर सवाल उठाया तो सवाल से असहज प्रधानमंत्री ने एक पूरा ड्राफ्ट पढ़ दिया .शायद यह पहला सवाल था जिसका जवाब प्रधानमंत्री ने नोटबुक से दिया था .प्रधानमंत्री के हर जवाब मे मजबूरी झलकती थी उन्होंने राजा के बारे मे जिस सफाई को आगे किया ऐसी सफाई वे दुसरे घोटाले को लेकर नही दे सके .यह उनकी दूसरी मजबूरी है लेकिन इतना तय है कि वे एक कदम आगे बढ़ चुके है .भ्रष्टाचार के मुद्दे पर अपना त्यागपत्र देकर वे कोई आदर्श स्थापित नही करना चाहते है लेकिन उन्हें इस बात का एहसास है कि इस मुल्क मे भ्रष्टाचार कोई बड़ा मुद्दा नही हो सकता .अल जजीरा के संपादक का सवाल लेते हुए प्रधानमंत्री ने अपना विश्वास पुख्ता कर दिया कि यहाँ मिस्र जैसे हालात नही होंगे .यानि लोग इन तमाम चीजो की आदि है .बजट सत्र के ठीक पहले प्रधानमंत्री का यह संवाद दूसरी विपक्षी पार्टियों के लिए एक सन्देश हो सकता था लेकिन सारे तोहमत बीजेपी पर डाल कर प्रधानमंत्री ने यह भी साबित कर दिया कि सत्र सुचारू रूप से चले इसके लिए वे कोई व्यक्तिगत पहल नही करने जा रहे है .तो यह माना जाय कि प्रधानमंत्री की यह प्रेस कान्फेरेंस&amp;nbsp; आम अवाम के लिए थी या फिर वे कांग्रेस&amp;nbsp;मठाधिशो को यह बताना&amp;nbsp;चाहते थे कि वे मुखिया अपनी&amp;nbsp;शर्तो&amp;nbsp;पर रहेंगे&amp;nbsp;और उसकी&amp;nbsp;तय सीमा&amp;nbsp;उन्होंने बजट सेसन&amp;nbsp;रखा&amp;nbsp;है .सत्र के बाद&amp;nbsp;अगर&amp;nbsp;प्रधानमंत्री को अपने हिसाब&amp;nbsp;से मंत्रिमंडल&amp;nbsp;नही बनाने दिया गया तो वे इस्तीफा&amp;nbsp;दे सकते है .&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-8243708086191892887?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/8243708086191892887/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=8243708086191892887&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/8243708086191892887'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/8243708086191892887'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/02/blog-post_16.html' title='इस्तीफा भी दे सकते है प्रधानमंत्री ?'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-iwqWTSjUmWU/TVurxNVVChI/AAAAAAAAAcE/iYBkrM01Afw/s72-c/pradhan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-2798099587170889841</id><published>2011-02-12T03:10:00.000-08:00</published><updated>2011-02-12T03:10:10.032-08:00</updated><title type='text'>तहरीर चौक के बाद अब कौन चौक .......</title><content type='html'>&lt;div dir="ltr" style="text-align: left;" trbidi="on"&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/-317rYGSEHco/TVZqdZ4aTQI/AAAAAAAAAcA/9b_-gSDdLf8/s1600/mubarak.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="153" src="http://4.bp.blogspot.com/-317rYGSEHco/TVZqdZ4aTQI/AAAAAAAAAcA/9b_-gSDdLf8/s200/mubarak.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;"अब मिस्र आज़ाद है " तहरीर चौक पर अपार जनसमुदाय का यह नारा पूरी दुनिया मे व्यवस्था परिवर्तन की लो को एक उम्मीद से भर दिया है इजिप्ट के&amp;nbsp;.तहरीर चौक से उठी यह क्रांति की चिंगारी अरब वर्ल्ड के साथ साथ एशिया के देशो मे जल्द ही फैलने वाली है .अरब देशो मे सत्ता शीर्ष पर कब्ज़ा जमाये हुए सत्ताधीशों की बेचैनी बढ़ने लगी है .टूनिसिया मे एक मजदूर की मौत क्रांति का आगाज कर सकती है और वर्षो से सत्ता पर काबिज निरंकुश शासक को मुल्क छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है .मिस्र मे फेसबुक पर एक लड़की का यह मेसेज "मै तहरीक चौक जा रही हूँ" .........एक नयी क्रांति की नीव डालती है और महज १८ दिन&amp;nbsp; के आन्दोलन ३० साल के हुस्नी मुबारक की सत्ता को उखाड़ फेकता है .तो क्या ऐसी क्रांति आज भारत मे संभव है ?क्या भारत मे व्यवस्था के खिलाफ गुस्सा कभी क्रांति का रूप धारण कर सकता है ?&lt;br /&gt;व्यवस्था के खिलाफ रोष और क्षोभ न्यायपालिका को है ,मिडिया को है ,लोगों को है ,बुधिजिबियों को है लेकिन क्रांति को लेकर उत्साह कही नही है .सुप्रीम कोर्ट के जज की&amp;nbsp; शिकायत है कि सरकार न्यायपालिका को अधिकार संपन्न नही देखना चाहती .एक जज का क्षोभ है कि कोर्ट की टिप्पणियों का कोई क़द्र नही है .उधर सरकार की ओर से सीमा और मर्यादा की नशिहत दी जाती है .भ्रष्टाचार के खिलाफ लोगों का गुस्सा आसमान छू रहा है लेकिन ओ&amp;nbsp; कुछ कर नही पा रहा है क्योंकि उन्हें यह कहा जा रहा है कि उनकी चुनी हुई सरकार सत्ता पर आसीन है .पांच साल बाद सत्ता से लोगों को बेदखल करने का उन्हें फिर मौका मिलेगा आदि आदि .भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाने की जिम्मेदारी विपक्ष की है लेकिन उनका दायित्व न्यायलय ने संभाल लिया है .प्रक्रिया इतनी धीमी और लचर है कि बोफोर्स दलाली की रकम मुल्क वापस नही पा सकी .उलटे इस जांच प्रक्रिया मे मुल्क ने दलाली के कई गुना रकम खर्च दिया है और नतीजा सिफ़र ही हाथ लगा है .भ्रष्टाचार का आलम यह है कि महज ७ वर्षो मे इस देश ने जितना खोया है उतनी रकम शायद ६० वर्षों मे भी नेता -अधिकारी और दलाल हजम नही कर पाए .&lt;br /&gt;दस साल पहले १०० - २०० करोड़ रूपये के घोटाले के लिए आन्दोलन होते थे लेकिन आज २० लाख करोड़ रूपये के घोटाले के खिलाफ कही मामूली धरना -प्रदर्शन भी नही होते .करोडो रूपये के घोटाले ,विदेशी बैंको मे&amp;nbsp;काला धन की चर्चा न्यायलयों मे होती है और इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए मिडिया लोगों के घरों मे देश के वैभवता की तस्वीर पेश कर रहा है लेकिन आक्रोश कही नही है हर शाम&amp;nbsp;.कोर्ट से बाहर निकलकर वकील ,राजनेता और विशेज्ञ टीवी पर मजमा लगाते है और एक दुसरे पर कीचड़ उछाल कर अपने अपने घर लौट जाते है .लेकिन इस पुरे खेल मे सरकार चुप है क्योंकि उसे पता है कि इन बहस से कोई सम्पूर्ण क्रांति नही आने वाली है .हमाम मे सब नंगे है सो कोई जयप्रकाश नारायण पैदा हो नही सकता .&lt;br /&gt;व्यवस्था के खिलाफ नक्सली जंगलों मे आन्दोलन रत है लेकिन उनका यह तथाकथित आन्दोलन आदिवासी इलाकों से बाहर नही निकाल सका तो माना जायेगा कि नक्सली जंगली इलाको मे अपनी प्रभुसत्ता बनाकर खुश है .सरकार जब कभी भी उन इलाकों मे उनकी प्रभुसत्ता को चुनौती देती है नक्सली इस एवज १० -२० मासूमों की जान ले लेते है .मैनिंग मे&amp;nbsp;पैसा राजनेताओ को भी चाहिए तो नक्सली भी इसमें अपना हिस्सा मांगते है .सो आन्दोलन की धार पैसे की ताक़त ने पहले ही कुंद कर रखी है .&lt;br /&gt;भ्रष्टाचार ,घोटाला ,महगाई ,आम आदमी की मुश्किलें हर घर मे हर चौक पर बहस का मुद्दा है लेकिन इसमें कोई चिंगारी नही है .राजधानी दिल्ली मे तहरीर चौक का आकार पहले ही छोटा कर दिया गया है. अगर १०० -२०० लोग भी जंतर मंतर पर जामा हुए तो पुरे इलाका की ट्राफिक व्यवस्था चरमरा जायेगी .सरकार को पता है अपना अपना रास्ता ढूंढने मे लगे लोग कभी यह वर्दास्त नही करेंगे कि उनकी रफ़्तार किसी बहस के कारण थम जाय .इस आन्दोलन को देश के ७ फिसद की विकास दर ने भोथरा बना दिया है .माध्यम वर्ग की एक बड़ी आवादी अपने मकान,दुकान ,बच्चो की शिक्षा की मह्बारी किस्तों मे इस कदर उलझा हुआ है कि उसे यह चिंता नही सताती कि देश के अरबो -खरबों रुपया विदेशी बैंको मे पड़ा है और वह हजार -दस हजार की किस्त पूरा करने के लिए अपना पूरा जीवन दाव पर लगा दिया है .यह दुनिया का&amp;nbsp; सबसे बड़ा लोकतंत्र &amp;nbsp;है जहाँ सरकार चुनने का हक आम लोगों को मिला हुआ है लेकिन सरकार का मुखिया कौन होगा ,सरकार के मंत्री कौन होंगे इसका फैसला आलाकमान के हाथ मे है .सरकार संसद के प्रति जिम्मेदार है लेकिन प्रधानमंत्री किसके प्रति जिम्मेदार है यह समझना अभी अभी बांकी है .गाँव से लेकर शहर तक इस मुल्क मे तहरीर चौक का आकार और आधार काफी छोटा हो गया है इस हालत मे इस आन्दोलन की शुरुआत हर घर से हो सकती है यानि इस देश को अभी आज़ादी मिलना अभी बांकी है .&lt;br /&gt;तहरीर चौक के बाद अब कौन चौक ....... &amp;nbsp;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-2798099587170889841?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/2798099587170889841/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=2798099587170889841&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/2798099587170889841'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/2798099587170889841'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/02/blog-post.html' title='तहरीर चौक के बाद अब कौन चौक .......'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-317rYGSEHco/TVZqdZ4aTQI/AAAAAAAAAcA/9b_-gSDdLf8/s72-c/mubarak.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-3067685629235210872</id><published>2011-01-14T03:13:00.000-08:00</published><updated>2011-01-14T03:13:20.789-08:00</updated><title type='text'>तिरंगा लहराने का हक क्या सिर्फ बीजेपी को है ?</title><content type='html'>&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S2EcdoEaxPI/AAAAAAAAAVE/ZWgeiKpzg2Q/s1600-h/lal+c.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="120" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S2EcdoEaxPI/AAAAAAAAAVE/ZWgeiKpzg2Q/s200/lal+c.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;1992 के बाद यह पहलीबार है कि श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा लहराने के लिए बीजेपी ने जिद ठानी है .१८ वर्ष पहले भी तत्कालीन हुकूमत ने बीजेपी को यह जिद छोड़ने की सलाह दी थी ,वैसी ही सलाह मौजूदा हुकूमत भी दे रही लेकिन इस सलाह मे घबराहट ज्यादा है . हुकूमत के सामने अमरनाथ श्रायन बोर्ड का जीता जगता उदाहरण सामने है कि महज कुछ मुठी भर लोगों के विरोध ने इसे अलगावादी सियासत का मुद्दा बना दिया था .लेकिन वे&amp;nbsp; सवाल आज भी दुरुस्त हैं&amp;nbsp; कि सर्दी से कापते यात्रियों के लिए महज कुछ गज ज़मीन का उपयोग धारा ३७० के खिलाफ था ?क्या यह भारत की साजिश थी जिससे वह वहां की अवादी के अनुपात को बदलना चाहती थी ?अफ़सोस की बात यह कि सरकार अलगाववादियों के भ्रामक प्रचार और हुडदंग के आगे पूरी तरह आत्मसमर्पण कर चुकी थी .और कश्मीर के लोग भी उस सियासी हुडदंग को समझ नही पाए .ठीक वैसी ही परिस्थिति आज भी बन रही है .सियासी मुद्दे की तलाश मे भटकती बीजेपी को एक बार फिर तिरंगा की याद आई है .सो उसने लाल चौक पर तिरंगा लहराने का फैसला लिया है ,शायद इस सोच से कि इस मसले को लेकर बवाल और चर्चा होना लाजिमी है .बीजेपी के इस अभियान को इस बार जे के एल ऍफ़ के नेता यासीन मल्लिक का साथ है .और यह मसला रोज मिडिया की सुर्ख़ियों मे है .राज्य सरकार के मुख्यमंत्री अब्दुल्ला इतने आशंकित है कि उन्हें दुबारा अमरनाथ श्रायन के मसले की पुनरावृति दिख रही है .बड़ी मुश्किल से उन्होंने पिछले छः महीने के सियासी तूफ़ान मे अपनी नौकरी बचाई है लेकिन यह मसला उन्हें ज्यादा आशंकित कर रखा है .सवाल यह है कि क्या लाल चौक पर इससे पहले तिरंगा नही लहराया जाता था ?अगर ऐसी प्रथा थी तो यह अधिकार ओमर अब्दुल्ला का है कि वे कहते कि लाल चौक पर झंडा बीजेपी नही बल्कि रियासत की सरकार फहराएगी .ओमर अब्दुल्ला ठीक वैसा ही भारतीय है जैसा कि कोई बीजेपी वाला लेकिन ओमर अब्दुल्ला अपने इस गौरब को क्यों बीजेपी को झटकने दे रहे है ,यह सबसे बड़ा सवाल है .क्या आज़ादी मांगने वालों की आवाज आज कश्मीर मे इतनी मजबूत है कि यासीन मल्लिक के एक धमकी से ओमर अब्दुल्ला परेशान और बेहाल है ?&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TTAvd9Dy6tI/AAAAAAAAAb4/T2MQVwsqxSE/s1600/bjpyatra.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" src="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TTAvd9Dy6tI/AAAAAAAAAb4/T2MQVwsqxSE/s200/bjpyatra.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp;पिछले २० वर्षों में लाल चौक&amp;nbsp; पर सीना ताने खड़े घंटा घर ने जितनी शर्मिंदगी अलगाववादियों के कारण नहीं झेली होगी उससे ज्यादा जिल्लत उसे हुकूमत के कारण झेलनी पड़ी है&amp;nbsp; . गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस के पिछले दो मौके&amp;nbsp; &amp;nbsp;पर लाल चौक पर तिरंगा नहीं फहराने के पीछे सरकार की जो भी दलीले हो लेकिन इतना तो तय है कि इस फैसले ने लाल चौक के शौर्य&amp;nbsp; को धूमिल किया है .पिछले २० वर्षों में लालचौक ने दर्जनों आतंकवादी हमले के दंश सहे है&amp;nbsp; .दर्जनों बार पाकिस्तान का झंडा इसके सीने पर लटका दिया गया .लेकिन इन १८ वर्षों में जब कभी तिरंगा के साथ इस चौक को सजाया जाता तो वह अपने पुराने जख्मो को भूल जाता था. सरकार&amp;nbsp; की यह&amp;nbsp; दलील है यहाँ झंडा फहराने की कोई परंपरा नहीं थी ,न ही यह लाल चौक कोई सियासी जलसे की उपयुक्त जगह है .लाल चौक इन दलीलों को ख़ारिज करता है .उसका सवाल है क्या मुग़ल बादशाह ने लाल किला तिरंगा फहराने के लिए बनाया था .क्या इंडिया गेट को अंग्रेजों ने गणतंत्र दिवस मनाने के लिए बनाया था . अगर किसी ने लाल चौक के शोर्य को बढ़ाने और तिरंगा के जरिये वादी के आम लोगों के जज्वात से जुड़ने की कोशिश की, तो क्या यह गलत परम्परा थी ?&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;.दहशतगर्दी के दौर में भी या कहे कि १९९२ में भी वादी ए कश्मीर में ऐसे लाखों लोग थे जिनका तिरंगा के साथ सरोकार था .जिनका तिरंगे के प्रति&amp;nbsp; अटूट आस्था थी .यही वजह थी कि इन वर्षों में कई सरकारे आई गई लेकिन यह परंपरा वहां के लोगों के साथ मिलकर हिफाजती अमले&amp;nbsp; ने निभाई .लेकिन आज जब सरकार अमन और शांति का दावा कर रही है फिर लाल चौक के इस सम्मान को छिनने के क्या वजह हो सकती थी .गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस&amp;nbsp;अलगाववादियों के बंद - हड़ताल की कॉल और आतंकवादियों की धमकी के बीच खाली और सुनसान पड़े श्रीनगर के इस तारीखी चौक पर सिर्फ एक लहराता तिरंगा ही तो था जो अलगाववादियों के मसूबे को फीका कर रहा था .लेकिन पिछले दो साल से&amp;nbsp;लाल चौक सुनसान मार्केट में अकेला अपमान का दंश झेलता रहा है&amp;nbsp; .किसी ने ठीक ही कहा है कि सरकार इखलाक से चलती है , लेकिन यहाँ तो सरकार हांफती नज़र आ रही है . लाल चौक पर&amp;nbsp; तिरंगा &amp;nbsp;संप्रभुता की पहचान थी .कश्मीर के लाखों लोगों को यह एहसास करा रहा था कि यहाँ की अलगाववादी सियासत कुछ चंद सिरफिरों की सनक है ,लेकिन लाल चौक से तिरंगा हटाकर हुकूमत ने यह एहसास कराया है कि अलगाववाद की जड़े श्रीनगर में गहरी है .जिस अलगाववाद को लोगों ने जब तब&amp;nbsp; वोट के जरिये हराया है उसे सरकार के एक फैसले ने हतोत्साहित कर दिया है .&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;७० के दशक मे&amp;nbsp;श्रीनगर के कुछ उत्साही मार्क्सवादियों ने रूस के रेड स्कुएर की तर्ज पर इस चौक का नाम लालचौक रखा था .कारोबारी शहर के बीचो बीच स्थित इस चौक की ख्याति &amp;nbsp;शेख अब्दुल्ला ने भी बढ़ाई . शेख अब्दुल्ला का जनता दरवार कभी लालचौक की शान बढ़ाता था .खुद पंडित नेहरु ने इस लालचौक पर तकरीरे की है . १९७५ में यहाँ घंटाघर वजूद में आया और इसने इसे&amp;nbsp; कारोबारी चौक का दर्जा दिलाया&amp;nbsp;.श्रीनगर में भारत के कोने कोने से पहुचे पर्यटकों ने इसकी शान में और इजाफा किया .लेकिन १९८९ के दौर में&amp;nbsp; पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद ने यहाँ की हलचल में जहर घोल दिया .लालचौक आतंकवादी गतिविधियों का केंद्र बन गया .जाहिर है बन्दूक के खौफ ने अलगाववादियों को एक सियासी आधार दिया और उनका सियासी ठिकाना लालचौक हो गया .पिछले २० वर्षों में लालचौक ५ साल बंद रहे .सैकड़ों मासूमो को इस चौक ने अपने आँखों के सामने आतंकवादियों की गोलियों से छलनी होते हुए देखा है .बाद में इस चौक की सुरक्षा की जिम्मेवारी पहले बी एस ऍफ़ ने बाद में सी आर ऍफ़ ने सँभाल ली .लेकिन हमलों का दौर जारी रहा और आतंकवादी जब तब इस लालचौक पर हमला करके अपनी प्रभुसत्ता दिखाने की कोशिश की है .हालाँकि सुरक्षवालों ने इसकी तीब्रता जरूर कम कर दी है&amp;nbsp; .तो&amp;nbsp;क्या आतंकवादी&amp;nbsp; हमलों के अंदेशे ने यहाँ&amp;nbsp; तिरंगा फहराने से रोका था ?क्या भारतीय होने और उस पर फक्र करने वाले कश्मीरियों का सर इस फैसले से नही झुका है ?इस देश को यह जानने का जरूर हक है कि जिस तिरंगा झंडा की शान मे हजारो हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाई ने अपनी जान कुर्बान की है. &amp;nbsp;क्या इसे एक मुख्यमंत्री की कुर्सी सही सलामत रखने के लिए इसकी शान के साथ गुश्ताखी &amp;nbsp;की जा सकती है ? &amp;nbsp; हर सवाल का जवाब आखिर सरकार को ही देना है लेकिन यह भी तय है कि यह सवाल पूछने का हक सिर्फ बीजेपी को नही है .&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-3067685629235210872?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/3067685629235210872/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=3067685629235210872&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3067685629235210872'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3067685629235210872'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/01/blog-post_14.html' title='तिरंगा लहराने का हक क्या सिर्फ बीजेपी को है ?'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S2EcdoEaxPI/AAAAAAAAAVE/ZWgeiKpzg2Q/s72-c/lal+c.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-8599051280591746087</id><published>2011-01-04T04:41:00.000-08:00</published><updated>2011-01-04T04:41:29.291-08:00</updated><title type='text'>सच का सामना करने के लिए क्यों नही तैयार है कश्मीरी ?</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/SxosBFjWwGI/AAAAAAAAASU/Jjilh-F37ks/s1600-h/hurr.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" er="true" src="http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/SxosBFjWwGI/AAAAAAAAASU/Jjilh-F37ks/s400/hurr.jpg" style="cursor: move;" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: small;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="line-height: 28px;"&gt;सच का सामना करने के लिए इस बार हुर्रियत कान्फेरेंस के साबिक चेयरमेन अब्दुल गनी बट सामने आये .मौका था जे के एल ऍफ़ के सेमिनार का .मौका था भारत के खिलाफ जहर उगलने का लेकिन प्रो बट का खुलासा सबको चौका दिया ,उन्होंने कहा" मारे गए हमारे हुर्रियत के लीडर वाकई मे शहीद है या फिर हमारी अंतर्विरोध के साजिश के शिकार " .हुर्रियत कान्फेरेंस के चेयरमेन ओमर फारूक और बिलाल गनी लोन की मौजदगी मे प्रो बट ने यह सवाल उठाया कि इनके पिता की हत्या किसने की थी ?उन्होंने जोर देकर कहा कि झूठ बोलने की आदत छोड़कर हम यह सच बताये कि मौलवी फारूक ,गनी लोन और प्रो अहद जैसे लीडरो की हत्या हम मे से कोई की थी इनकी हत्या किसी सुरक्षा वालों ने नही की थी .हुर्रियत लीडरो की हत्या की एक लम्बी फेहरिस्त है मौलवी मुश्ताक ,पीर हिसमुदीन ,शेख अजीज़ रफीक शाह ,माजिद डार इनकी हत्या के बारे मे यही बताया गया कि अज्ञात बन्दुक धारियों ने इनकी हत्या की थी लेकिन किसी हत्या की जांच की हिम्मत स्थानीय पुलिस नही दिखा सकी .तो क्या प्रो बट के हालिया खुलासे के बाद इन हत्यायों का राज ढूंढने के लिए किसी हुर्रियत लीडर से पूछ ताछ करेगी ?शायद नही&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: small; line-height: 28px;"&gt;१९७१ मे फजलुल हक कुरैशी खुद एक आतंकवादी तंजीम अल फ़तेह बनाकर बन्दूक की जोर पर कश्मीर को आज़ाद कराने निकले थे . बाद में उन्हें बाहर का रास्ता दिखाकर जे के एल ऍफ़ ने वह मोर्चा संभाल लिया था . लेकिन कश्मीरी लीडरों की यह आज़ादी पाकिस्तान को रास नहीं आई सो उसने जे के एल ऍफ़ को धकेल बाहर किया, दर्जनों हत्या के आरोपी&amp;nbsp;यासीन&amp;nbsp;मालिक&amp;nbsp;कश्मीर का गांधी&amp;nbsp;बन&amp;nbsp;गए &amp;nbsp;और उनकी जगह पाकिस्तान ने हिजबुल मुजाहिद्दीन को सामने लाया . इस तरह हुर्रियत के तमाम लीडर किसी न किसी आतंकवादी तंजीम से जुड़े या फिर उनका नेतृत्वा किया ,ये अलग बात है उनकी यह गतिविधि तब तक जारी रही ,जब तक पाकिस्तान से उन्हें इसकी कीमत मिलती रही&amp;nbsp;&amp;nbsp;. इस दौर मे मौलवी मिरवैज फारूक पर भी&amp;nbsp; आतंकवादियों का हमला हुआ है लेकिन ओ कौन थे या फिर इसकी शिकायत ओमर फारूक ने आज तक नही की है . मिरवैज ओमर फारूक ने न केवल अपने वालिद को खोया बल्कि उनके चाचा को आतंकवादियों ने मस्जिद मे घुस कर हत्या कर दी . मिरवैज ओमर फारूक आज तक यह बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाए कि यह किसका गन था . गन की सियासत से तौबा करके लौटे अब्दुल गनी लोन को किसने मारा इससे पर्दा उठाने की हिम्मत न तो बिलाल गनी लोन कर पाए न ही सज्जाद . अल बर्क नामकी आतंवादी तंजीम ने गनी लोन पर करोडो रूपये डकार लेने का आरोप लगाया था . पिछले साल सिनिओर हुर्रियत लीडर शेख अजीज की मौत एक रैली मे हो गयी .पुलिस ने&amp;nbsp; विडियो फूटेज के बिना पर यह साबित कर दिया था कि भीड़ में गोली चलाने वाले हुर्रियत के अपने ही लोग थे . लेकिन हुर्रियत के किसी लीडर मे यह हिम्मत नहीं हुई कि सच को दुनिया के सामने ला सके .&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: small; line-height: 28px;"&gt;सन २००० में भारत सरकार की पहल पर हिजबुल मुजाहिद्दीन बातचीत के लिए तैयार हुई तो इसका सियासी चेहरा बनकर खुद फजलुल हक कुरैशी सामने आये थे . कहा जाता है कि कुरैशी हिज्ब के ऑपरेशन चीएफ़ माजिद डार&amp;nbsp; के काफी करीबी थे . अमन का रास्ता ढूंढने निकले माजिद डार&amp;nbsp; को बाद मे गोलियों से छलनी कर दिया गया . इस तरह इस फेहरिस्त में दर्जनों ऐसे नाम है जिसने जरा भी अपनी भूमिका बदलनी की कोशिश कि उन्हें रास्ते से हटा दिया गया .लेकिन हुर्रियत के लीडर खामोश रहे .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;आज हुर्रियत के कई लीडर जेल मे अपने आपको बंद रखा है . कश्मीर की इसी साइलेंट गन के कारण शब्बीर शाह वर्षों तक जेल में रहे . वे अपनी जान की कीमत पर सियासत नहीं करना चाहते थे . लेकिन कश्मीर में वे अपने को मंडेला से तुलना करते है .यानि कई अलगाववादी लीडरों को जेल ने एक सुरक्षा कबच दी है .लेकिन उनकी रिहाई के लिए कश्मीर में जब तब रैली भी निकाली जाती है .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;८० के दशक मे एक दौर ऐसा भी आया जब कश्मीर के कई शहरों मे कुछ लोगों ने अपनी घडी को पाकिस्तान के घडी के हिसाब से मिला लिया था . अफगानी मुजाहिद्दीन मेजर मस्त्गुल के इस्ताक्वल मे सैकड़ो की तादाद मे लोग पहुचे थे .मशहूर जियारत चरारे शरीफ को जलाकर राख कर देने वाले मस्त्गुल की मेहमाननवाजी कई हुर्रियत के लीडरों ने भी की थी . मौलवी अब्बास अंसारी (हुर्रियत के साबिक चैयेरमन) कहते है वह एक दौर था जब किसी मुजाहिद्दीन को अपने घर में पनाह देना लोग फक्र मह्शूश करते थे ,एक दौर ऐसा भी आया जब राजौरी की रुखसाना अपनी कुल्हारी से आतंकवादी की हत्या कर रही है . हुर्रियत के लीडरों&amp;nbsp;ने &amp;nbsp;दीवारों पर लिखी इबारत को पढ़ लिया है वे जानते है कि बन्दूक की पैरवी करने वाला आज कश्मीर मे कोई नहीं है . लेकिन कश्मीर में बन्दूक कायम और दायम है इस बात को वे अच्छी तरह से समझते है .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;बन्दूक कश्मीर की&amp;nbsp; सियासत का हिस्सा है ,यही वजह है कि साबिक मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को हिजबुल मुजाहिद्दीन से कोई परेशानी नहीं है वे सारे गुमराह भाई है लेकिन सुर्क्षवालो की मौजूदगी उन्हें परेशां करती है .मौजूदा मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला कहते है लोगों ने बन्दूक कश्मीर के आर्थिक पॅकेज के लिए नहीं उठाया था बल्कि वे कश्मीर के मसले का हल चाहते थे . लेकिन ओमर अब्दुल्ला यह भूल जाते है बन्दूक उठाने वाले अधिकांश&amp;nbsp; वही लोग थे जिन्हें उनके खानदानी सल्तनत मे लोकतान्त्रिक अधिकार नहीं दिए गए थे&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: small; line-height: 28px;"&gt;बन्दूक ने कश्मीर मे न केवल सियासी लीडरों की भीड़ खड़ी की बल्कि अकूत पैसे की बरसात&amp;nbsp; भी की&amp;nbsp; गाँव के झोपड़ियों में रहने वाले कई लोगों के श्रीनगर मे आलिशान बंगला देखा जा सकता है . पैसे की यह बरसात&amp;nbsp; कश्मीर मे आज भी जारी है . बन्दूक की बदोलत जिसने राजशाही सुख&amp;nbsp;&amp;nbsp;सुविधा बटोरी है क्या वे कश्मीर मे बन्दूक की अहमियत को ख़तम होने देंगे?.&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: small; line-height: 28px;"&gt;प्रो बट आज अलगववाद की सियासत मे अलगथलग कर दिए गए है सो वे आज सच का सामना करने के लिए तैयार है वो यह भी बताने को तैयार है कि सिर्फ गिलानी साहब के सियासी अहंकार के कारण कश्मीर मे पिछले दिनों १२० से ज्यादा माशूमो की जान गयी है तो बंद और हड़ताल के कारण कश्मीर का अरबो -खरबों का नुकसान हुआ है .कश्मीर मे हिंसा का दौर जारी है साजिश से लोग भली भाति वाकिफ है फिर भी चुप है शायद इस भ्रम मे कि कश्मीर मे आने वाला करोडो -अरबो का पैकज या फिर अरबो का विदेशी फंडिंग बंद हो जायेंगे .सरकार के सामने कारवाई करने के लिए कई सबूत है फिर भी हुकूमत चुप है .यानि सच का सामना करने के लिए आज कोई तैयार नही है?&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: small;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="line-height: 28px;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-8599051280591746087?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/8599051280591746087/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=8599051280591746087&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/8599051280591746087'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/8599051280591746087'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2011/01/blog-post.html' title='सच का सामना करने के लिए क्यों नही तैयार है कश्मीरी ?'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/SxosBFjWwGI/AAAAAAAAASU/Jjilh-F37ks/s72-c/hurr.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-5454215759816958788</id><published>2010-12-04T03:15:00.000-08:00</published><updated>2010-12-04T03:15:22.781-08:00</updated><title type='text'>बिहारी तो सुधर गए आप कब सुधरोगे</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TPoElqfq1VI/AAAAAAAAAbs/SaLDFGKPHEE/s1600/nitishhhh.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&amp;nbsp;&lt;img border="0" height="198" ox="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TPoElqfq1VI/AAAAAAAAAbs/SaLDFGKPHEE/s200/nitishhhh.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;प्रख्यात&amp;nbsp;अर्थशास्त्री&amp;nbsp;श्री&amp;nbsp;जगदीश&amp;nbsp;भगवती&amp;nbsp;ने&amp;nbsp;पिछले&amp;nbsp;दिनों&amp;nbsp;&amp;nbsp; संसद भवन के सेंट्रल हाल मे सांसदों को संवोधित करते हुए कहा कि उच्च विकास दर गरीबो के लिए भी फायदेमंद हो सकता है और गरीब जनता इसका इनाम भी देती&amp;nbsp; है .बिहार मे नीतीश कुमार का आम&amp;nbsp;अवाम&amp;nbsp;का &amp;nbsp;भारी समर्थन इसी सन्दर्भ मे देखा जा सकता है .लेकिन उच्च विकास दर का २००४ मे जब केंद्र की एन ड़ी ऐ सरकार ने इंडिया शायनिंग के नाम से नारा दिया था तो लोगों ने इसे ख़ारिज कर दिया था .लेकिन उसी एन ड़ी ऐ के बिहार शायनिंग को लोगों ने न&amp;nbsp; केवल सराहा है बल्कि राज्य के तमाम राजनैतिक समीकरण भी बदल दिए है .लम्बे अरसे के बाद यह पहलीबार बिहार मे सत्तापक्ष २४३ सीटो मे २०६ सीटों पर जीत दर्ज की है ,तो एक दर्जन से ज्यादा सत्तापक्ष के उम्मीदवार महज हजार -दो हजार मतों के अंतर से पराजित हुए है&lt;br /&gt;.राजनीतिक पंडितो का विश्लेषण जारी है ,लालू -रामविलास और कांग्रेस इस शर्मनाक पराजय से स्तब्ध है ,नीतीश के गुणगान मे कसीदे&amp;nbsp; पढ़े जा रहे है लेकिन इस बहस मे&amp;nbsp; बिहारी जनमानस ने मुल्क को जो रास्ता दिखाया है उसे आज भी&amp;nbsp;अनदेखा किया जा रहा है .लगातार दो बार केंद्र की सत्ता मे आने वाली कांग्रेस को यह एहसास है कि बिहार और उत्तरप्रदेश मे बगैर जनाधार बढ़ाये वह कभी अपने दम पर केंद्र मे सरकार नही बना सकती है .बिहार मे वर्षो बाद कांग्रेस ने&amp;nbsp;तमाम सीटो पर अपना उम्मीदवार उतारकार, राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी की ३० से ज्यादा चुनावी भाषण कराकर यह बताने की कोशिश की थी कि कांग्रेस अपना खोया हुआ आधार पाने के लिए बेचैन है .लेकिन लोगों ने इसे एक महज ड्रामा ही समझा ,लोग यह जान रहे थे कि अगर नीतीश को बहुमत नही मिला तो लालू -रामविलास की पार्टी की सगाई मे कांग्रेस शहनाई जरूर बजाएगी .लोग इसे राहुल गाँधी की नाकामयाबी से जोड़ते है लेकिन कांग्रेस का घटता जनाधार इस बात का संकेत भी है कि आने वाले दौर मे किसी एक पार्टी का केंद्र मे वापसी अभी मुश्किल है ,यानि राहुल गांधी के लिए अभी दिल्ली दूर है .&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TPoR_POi9uI/AAAAAAAAAbw/ssDtijq73NY/s1600/laloo.bmp" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="128" src="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TPoR_POi9uI/AAAAAAAAAbw/ssDtijq73NY/s200/laloo.bmp" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;जिस बिहार मे बाढ़ के नाम पर हर साल २००-२५० करोड़ रूपये का घोटाला आम बात थी .कभी साडी घोटाला तो कभी अलकतरा घोटाला ,घोटाले वालों की लम्बी फौज ने चारा घोटाला को इतिहास मे धकेल दिया था .उसी बिहार मे नीतीश कुमार ने महज १५० करोड़ रुपया खर्च करके ९ लाख लड़कियों मे सायकिल बाट कर नयी पीढ़ी को सपना देखने का मौका दे दिया था .चौका बर्तन से बाहर निकलकर ग्रामीण लड़किया आज स्कूल जा रही है ,बड़े बड़े सपने देख रही है .लालू यादव ने सामाजिक न्याय के नाम पर पंद्रह साल शासन किया लेकिन गरीबो के पल्ले कुछ भी नही आया .नीतीश कुमार का न्याय के साथ विकास ने अपने अभियान मे वंचितों को खास तौर से साथ लिया.राज्य का जी डी पी गुजरात के बाद दुसरे नम्बर पर था .योजना व्यय लालू जी के दौर मे २ से ३ हजार करोड़ रूपये का था २००९-१० मे यह योजना व्यय १४,१८४ करोड़ के आंकड़े को पार कर गया था .लालू के दौर मे सडको का निर्माण ३०० कि मी की दूरी नही तय कर पायी थी लेकिन नीतीश ने&amp;nbsp; पिछले पांच वर्षो मे इसकी लम्बाई ४००० कि मी पूरा कर दिया है . नए और पुराने सड़कों की बात करे तो नीतीश सरकार ने २३,६०६ कि मी सडको का निर्माण कराया है जिसपर २००० से ज्यादा पूल बनाये गए है .लालू जी का उड़नखटोला कभी बिहार मे लोकप्रिय जुमला बन गया था ,लालू जी उड़नखटोला के नाम से कांग्रेसी नेताओ के शाही अंदाज का मजाक उड़ाते थे .लेकिन वही लालू यादव अपने लिए अपने चिर परिचितों को&amp;nbsp; स्थायी उड़नखटोला का इंतजाम कर दिया लेकिन गरीबो के हक मे चार कि मी सड़क भी नही बना पाए&amp;nbsp;.&lt;br /&gt;जातिगत और संकीर्ण मानसिकता से उपहसित बिहार मे अगर क्षेत्र बार भी देखे तो हर जगह जे डी यु -बीजेपी गठ्वंधन ने अपना परचम लहराया है .तिरहुत ,मिथिलांचल ,कोसी ,सिमांचल ,सारण .पटना .मगध ,मुंगेर हर जगह लालू का माई फ़ॉर्मूला ध्वस्त होते नजर आया ,तो हर जगह विकास के पक्ष मे अपना वोट दिया .सुधरी कानून व्यवस्था ने लोगों मे उम्मीद जगाई&amp;nbsp;निवेशकों मे भरोसा पैदा किया है &amp;nbsp;पिछले दो वर्षों मे ७३ प्रस्ताव खाद्य प्रसंस्करण ,३१ प्रस्ताव विद्युत् सयंत्र लगाने ,४१ प्रस्ताव तकनिकी और मेडिकल कॉलेज को लेकर तो चीनी और सीमेंट उद्योग लगाने के ४३&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp;प्रस्ताव राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड को मिले है कुल अनुमोदित प्रस्तावों मे २२ इकाइयों का काम भी शुरू हो गया है .इसतरह पिछले वर्षों मे बिहार मे हजारो करोड़ रूपये का निवेश हुआ है .जाहिर है यह निवेश मीडिया के कैमरे के सामने नही हुआ है बल्कि इस निवेश का फायदा लोगों को मिलने लगा है .इस तरह बिहारी मतदाताओं ने हकीकत को समझा है और बिहार की आर्थिक चक्के को&amp;nbsp; को पटरी पर लाने के लिए नीतीश कुमार का साथ दिया है .&lt;br /&gt;बिहार मे&amp;nbsp; यह बात काफी प्रचलित है कि यहाँ मुसलमानों का वोट थोक मे पड़ता है .इस बार भी पहले की तरह तमाम मुस्लिम उलेमाओ ने लालू के समर्थन मे वोट देने की अपील की थी लेकिन मुस्लिम मतदाताओं ने कहा" वोट हमरा फतवा तेरा "यानि ४० मुस्लिम निर्णायक वाली सीटों पर या तो जे डी यु के उमीदवार जीते है या फिर बीजेपी के .हाँ दो सीटों पर कांग्रेस ने अपनी जीत जरूर पक्की कर ली .इस तरह बिहार विधान सभा का हालिया चुनाव सिर्फ मध्यप्रदेश ,छत्तीसगढ़ ,गुजरात के विकासवादी &amp;nbsp;फोर्मुले को आगे नही बढाया है बल्कि पुरे देश मे एक नयी राजनीतिक सोच विकसित करने का सन्देश भी दिया है .&lt;br /&gt;बिहार मे विकास हो रहा है ,विकास की किरण अभी भी&amp;nbsp; हर गाव हर क़स्बा मे नही पहुची है .चुनाव विश्लेषक योगेन्द्र यादव के शव्दों मे "लोगों की उम्मीद का लौट आना नीतीश सरकार की वापसी का प्रमुख कारण है ".लोगों की उम्मीद पर नीतीश कुमार कितने खड़े उतरते है यह तो वक्त बताएगा लेकिन लोगों ने नेताओं को रास्ता जरूर दिखा दिया है .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-5454215759816958788?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/5454215759816958788/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=5454215759816958788&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/5454215759816958788'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/5454215759816958788'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/12/blog-post.html' title='बिहारी तो सुधर गए आप कब सुधरोगे'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TPoElqfq1VI/AAAAAAAAAbs/SaLDFGKPHEE/s72-c/nitishhhh.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-4445803792751115307</id><published>2010-11-06T05:26:00.000-07:00</published><updated>2010-11-06T05:26:55.306-07:00</updated><title type='text'>ओबामा ! ओबामा दगा नही देना</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/SdsitO18adI/AAAAAAAAAJ8/AH2twh-5bVE/s1600/army.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="160" px="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/SdsitO18adI/AAAAAAAAAJ8/AH2twh-5bVE/s200/army.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;ओबामा !ओबामा, किसका ओबामा ? लेकिन फिर भी इस ओबामा की गूंज हर जगह है .एक उम्मीद हर जगह है मानो ओबामा कुछ करके जायेंगे ,कुछ देके जायेंगे .किसको ? यह नही पता .राजनीतिक पंडित कहते है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के&amp;nbsp; भारत दौरे का मकसद&amp;nbsp; अमेरिका के लिए नए बाज़ार और अवसर तलाशने से है उनका तर्क है कि अगर&amp;nbsp;वे&amp;nbsp;&amp;nbsp;भारत को कुछ देने आये है तो उनकी टीम मे २०० से ज्यादा अमेरिकी कंपनी के सी ई ओ क्या करने आये है ? लेकिन मेरे जैसे अज्ञानी यह उम्मीद लगा&amp;nbsp;बैठे&amp;nbsp;हैं&amp;nbsp; कि ओबामा भारत मे कदम रखते ही यह ऐलान करेंगे कि 'पाकिस्तान भारत के खिलाफ जेहादियों को भेजना बंद करे बरना खैर नही "यह उम्मीद हमने ओबामा के चुनावी भाषण सुनकर जगाई थी .लेकिन राष्ट्रपति बनते ही ओबामा ने ऐसा पैतरा बदला कि हमने कहना शुरू कर दिया दोस्त दोस्त ना रहा ..... ओबामा राष्ट्रपति बनने से पहले यह अक्सर कहा करते थे पाकिस्तान को मिलने वाली अमेरिकी मदद की समीक्षा होगी ,उनका मानना था अमेरिका के लाखों करोडो डालर का इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवादी अभियानों मे लगता है .लेकिन आतंकवाद के खिलाफ जंग के नाम पर अबतक सबसे ज्यादा फंड ओबामा ने ही पाकिस्तान को दिया .यानि पिछले दो साल मे पाकिस्तान को ९ बिलियन डॉलर मिले है .अमेरिका के इस तथाकथित आतंक के खिलाफ जंग मे पाकिस्तान बराबर का साझेदार है .ओबामा को अफगानिस्तान के दल दल से अमेरिका को बाहर निकालना है इसके लिए पाकिस्तान ही एक मात्र सहारा है .बात चाहे अफगानी तालिबान से करो या फिर पाकिस्तानी तालिबान की जरूत जनरल कियानी की ही पड़ेगी .&lt;br /&gt;यह बात दुनिया जानती है कि पाकिस्तान मे सत्ता की डोर पाकिस्तानी फौज के हाथ मे है .आतंक&amp;nbsp;के सारे&amp;nbsp;&amp;nbsp;खेल का रेफरी पाकिस्तानी फौज है .डेविड कोलमन हेडली के हालिया खुलासा चौकाने वाले है उसने मुंबई हमले के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तानी फौज और आई एस आई को जिम्मेदार ठहराया है .हेडली का माने तो इस हमले की जानकारी अमेरिका को थी .जबकि अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग का दावा है की उसने इस साजिश से भारत को बाखबर किया था .लेकिन हमले हुए और २०० से ज्यादा लोग मारे गए .हमले की जांच चल रही है ,कसाब को क्या सजा मिले इसपर फैसला होना अभी बांकी है .पाकिस्तान की अदालत को अभी और सबूतों का दरकार है .आरोप -प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है लेकिन फिर भी हम अमेरिका से उम्मीद लगा बैठे है की ओबामा भारत दौरे पर २६/११ हमले के पीड़ितों को न्याय दिलावे .यह बात जानते हुए भी पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलफ अमेरिका ने कभी भी सख्त कदम नही उठाये है ..भारत को यह लड़ाई खुद लड़नी होगी ..&lt;br /&gt;अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबमा से पूरी दुनिया को उम्मीदे है यही वजह है की उन्हें पहले ही शांति का नोवेल पुरस्कार मिल चुका है .हम भी अगर दक्षिण एशिया मे शांति के लिए ओबामा से उम्मीद करते है .पाकिस्तान पर कारवाई की मांग करते है तो शायद हमरा सोचना गलत नही है .क्योंकि पाकिस्तान का वजूद अमेरिकी से मिले फंड पर निर्भर है .आर्थिक रूप से जर्जर और सामजिक रूप से लहुलाहन पाकिस्तान मे जम्हूरियत पहले ही दम तोड़ चुकी है इस हालात मे पाकिस्तानी सत्ता से उम्मीद करना बेमानी है .नयी दिल्ली का संवाद इस्लामाबाद से है जिनका कोई अस्तित्व नही है जबकि अमेरिका का प्रभाव रावलपिंडी यानि फौज के मरकज पर है .भारत को पता है फोजी जनरल ही बात चित की किसी पहल को आगे बढा सकते है लेकिन बातचीत और कारवाई के लिए उसे बात जरदारी और गिलानी से करनी पड़ती है जो खुद पाकिस्तान मे अपने वजूद के लिए लड़ रहे है .भारत को जनरल कियानी से बात करने के लिए कोई माध्यम चाहिए लेकिन वह इसके लिए किसी दुसरे देश की मदद नही ले सकता ?क्यों ये आप बेहतर जानते है .भारत पाकिस्तान के बीच समझौते की लम्बी फेहरिस्त है लेकिन वहां के जनरलों ने उन समझौते का क्या हश्र किया है आपके सामने है .भुट्टो का शिमला समझौता जनरल जिया के भेट चढ़ गया .नवाज शरीफ का लाहोर समझौता जनरल परवेज मुशरफ के अहंकार का शिकार हुआ .तो राष्ट्रपति मुशर्रफ के समझौते को जनरल कियानी ने रद्दी की टोकरी मे डाल दिया .समझोते के इन हश्र के बाद भी हम अगर पाकिस्तान से किसी और समझौते की उम्मीद करते है तो उसका हश्र हमारे सामने है .&lt;br /&gt;पाकिस्तान एक संप्रभु देश है इससे ज्यादा जोर इस बात पर दिया जाता है की पाकिस्तान के पास परमाणु बम का जखीरा है .चीन के लिए पाकिस्तान वह तुरुप का पत्ता है जिसका इस्तेमाल वह भारत के खिलाफ करता है .तो अमेरिका की चिंता यह है की पाकिस्तान के इस परमाणु बोम्ब का इस्तेमाल आतंकवादी कही उसके खिलाफ न करले .लेकिन यह बोम्ब पाकिस्तान को भारत के खिलाफ जेहादियों को भड़काने उन्हें कारवाई के लिए उकसाने की पूरी छूट देता है .यह बोम्ब पाकिस्तान मे फौज को सत्ता के केंद्र मे रखता है .आतंकवाद को लेकर जितनी चिंता भारत को है उससे ज्यादा चिंता अमेरिका को है लेकिन अगर आतंक के खिलाफ जंग के नाम पर अमेरिका खुद पाकिस्तानी फौज के सामने असहाय है तो भारत को ओबमा से ज्यादा उम्मीद करना बेमानी है .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-4445803792751115307?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/4445803792751115307/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=4445803792751115307&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/4445803792751115307'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/4445803792751115307'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/11/blog-post.html' title='ओबामा ! ओबामा दगा नही देना'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/SdsitO18adI/AAAAAAAAAJ8/AH2twh-5bVE/s72-c/army.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-3196213016947392603</id><published>2010-10-23T05:47:00.000-07:00</published><updated>2010-10-23T05:47:59.596-07:00</updated><title type='text'>आज़ाद कश्मीर मे गिलानी साहब परोसेंगे शराब</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; font-size: 14px; line-height: 1.8; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TMKpygxu-bI/AAAAAAAAAbg/iYivloVP-aA/s1600/gilani2.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="130" src="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TMKpygxu-bI/AAAAAAAAAbg/iYivloVP-aA/s200/gilani2.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="font-size: 14px; line-height: 1.8;"&gt;"राज करेगा गिलानी " हम क्या चाहते आज़ादी जैसे नारों के बीच दिल्ली के एल टी जी सभागार आज़ाद कश्मीर का मनोरम दृश्य प्रस्तुत कर रहा था लेकिन&amp;nbsp;गुस्साए कश्मीरी पंडित के &amp;nbsp;नौजवान &amp;nbsp;बन्दे मातरम का नारा लगाकर आज़ादी के इस महान उत्सव का रंग फीका कर रहा था .आज़ादी द ओनली वे के इस महान जलसे मे सैयद अली शाह गिलानी &amp;nbsp; अपने आज़ाद कश्मीर मे न्याय और कानून व्यवस्था पर कुछ इस तरह प्रकाश डाल रहे थे "आजाद कश्मीर मे बहुसंख्यक मुसलमानों को शराब पीने की इजाजत नही होगी यानि वे शरियत के कानून से&amp;nbsp; बंधे होंगे जबकि दुसरे हिन्दू ,सिख और बौध तबके को शराब पीने की पूरी आज़ादी होगी .वे जहाँ और जब चाहे शराब पी सकते है और कानून इतना सख्त होगा कि अगर धोके मे भी कोई मुसलमान किसी के शराब की बोतल तोड़ेगा तो उसे इसका हर्जाना देना होगा ." .गिलानी साहब के इस आज़ादी को समर्थन करने अरुंधती &amp;nbsp;राय के आलावा देश के कई नामी अलगाववादी नेता इस समारोह मे जमा हुए थे .खालिस्तान के समर्थक से लेकर माओवाद के समर्थक ,मिज़ो विद्रोही से लेकर नागा विद्रोही हर ने भारतीय अस्मिता को रौंदते हुए भारत की संप्रभुता और अखंडता पर सवाल उठाने मे कोई कसर नही छोड़ी .क्योंकि ये भारत है, क्योंकि प्रजातंत्र मे इन्हें कुछ भी बोलने किसी भी मत का प्रचार करने का पूरा हक है .देश का कानून भले ही इसका इजाजत नही दे लेकिन फिर बुद्धिजीवी कहलाने का मतलब क्या होगा अगर इन्होने कुछ अलग नही कहा .सो खालिस्तान समर्थक बुद्धिजीवी ने इंडिया एज ए नेशन को बकवास करार दिया तो गिलानी ने अपनी तुलना सुभाष चन्द्र बोस से की .अरुंधती राय ने देश के तमाम अलगाववादियों और विद्रोहियों से कश्मीर को आजाद कराने और गिलानी के हाथ मजबूत करने की अपील की .कई नामी गिरामी प्रोफेसर कई नामी गिरामी भुत पूर्व उग्रवादी भारत के खिलाफ जहर उगलकर गिलानी के समर्थन मे महान ऐतिहासिक तथ्यों को प्रस्तुत करते नज़र आये .इस विहंगम दृश्य का अवलोकन मेरे&amp;nbsp; जैसे नाचीज पत्रकार और सैकड़ो की तादाद मे उपस्थित कानून के पहरुए भी कर रहे थे लेकिन सबकी अपनी जिम्मेदारी थी अपना ज्ञान बढ़ाने के अलावा और कोई चारा नही था ,ऐसी ही कुछ मजबूरी गृह मंत्री चिदम्बरम की भी थी जो पहले तो राजधानी दिल्ली मे इस तरह के सम्मलेन पर चुप रहे अब कारवाई की बात कर रहे है&amp;nbsp;लेकिन जम्मू के जसविंदर को प्रो सुजाता भद्रो की बात बेहद अपमानित लगा तो उसने मंच पर अपना जूता उछाल दिया .जसविंदर को पुलिस ने तुरंत गिरफ्तार कर लिया था लेकिन वह यह जरूर बता गया कि जम्मू कश्मीर का मतलब सिर्फ गिलानी नही है .&lt;/div&gt;&lt;div style="font-size: 14px; line-height: 1.8;"&gt;जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला ने&amp;nbsp; इस &amp;nbsp;घटना की निंदा करते हुए जम्हूरियत मे सबको अपनी बात रखने और बोलने की आज़ादी का सम्मान करने की नशिहत दे डाली .लेकिन दो दिन पहले मुख्यमंत्री &amp;nbsp;अब्दुल्ला की विजय पुर&amp;nbsp; रैली मे किसी ने ओमर अब्दुल्ला के कश्मीर पर दिए गए बयान की निंदा करने की कोशिश की तो पुलिस ने मुख्यमंत्री के सामने उसकी जमकर धुनाई कर दी.शायद धारा ३७० मे किसी को मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलने की आज़ादी नही है .इसी धारा ३७० की व्याख्या करते हुए ओमर अब्दुल्ला कहते है कि रियासते जम्मू कश्मीर का पूर्ण विलय अभी भारत के साथ नही हुआ है .अब्दुल्ला मानते है कि भारत के साथ जम्मू कश्मीर का इह्लाक कुछ शर्तों के साथ हुआ था .ओमर अब्दुल्ला आज वही बात कह रहे है जो ७० के दौर मे उनके महरूम दादा शेख अब्दुल्ला ने कहा था .तो क्या ओमर अब्दुल्ला मान रहे है कि कश्मीर मे सियासत भारत के खिलाफ माहोल बनाकर ही की जा सकती है या अपनी निष्क्रियता को छिपाने के लिए ओमर अब्दुल्ला ने भारत विरोधी बयानों का सहारा लिया है .&lt;/div&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: medium;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: 14px; line-height: 25px;"&gt;रियासत जम्मू कश्मीर का भारत मे विलय मुल्क के ६०० राजे रजवाड़े के विलय की एक कड़ी थी. लेकिन कश्मीर मे मुस्लिम बहुसंख्यक मे थे इसलिए पाकिस्तान यहाँ अपना सियासी आधार लगातार दुढ़ता रहा .उधर कश्मीर के सियासत दा लगातार इस कोशिश मे रहे कि कश्मीर को लेकर भारत पर एक दवाब बना रहे .१९४८ से लेकर १९७५ तक इसी दवाब को जारी रखने&amp;nbsp; के लिए शेख अब्दुल्ला ने कई बार अपना सियासी पैतरा बदला .जब कभी भी कश्मीर मे शेख अब्दुल्ला को अपना अस्तित्वा खतरे मे पड़ते दिखा उसने भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया .लेकिन कभी भी कश्मीर मे लोकतंत्र को विकसित नही होने दिया .४०० से ज्यादा बोली ५० से ज्यादा धार्मिक मान्यता मानने वाले लोग ,अलग अलग संस्कृति अलग क्षेत्र अलग पहचान लेकिन रियासत मे सियासत की डोर हमेशा कश्मीर के ७ जिलो के संपन्न सुन्नी मुस्लिम तबके के हाथ रही .तक़रीबन २० फिसद की आवादी वाला यह समुदाय मुख्यधारा की सियासत मे अपनी पकड़ बनाने मे कामयाबी पायी तो कश्मीर मे&amp;nbsp;अलगाववाद की सियासत को इसी तबके ने चलाया .बन्दूक उठाने वाले लोग भी इसी तबके से थे तो मौजूदा दौर मे पत्थर उठाने वाले नौजवान भी इसी तबके से है . सरकार मे आला अधिकारी से लेकर निचले स्तर के अहलकारो मे इसी तबके का बोलवाला है .इस हालत मे यह सवाल उठाना लाजिमी है कि क्या&amp;nbsp; कश्मीर के पंडित समुदाय ,गुज्जर बकरवाल ,सिया समुदाय ,जम्मू के हिन्दू ,लदाख के बौध शायद इसलिए अपनी सियासी आधार मजबूत नही कर पाए क्योंकि इनका लगाव भारत से है या फिर भारत &amp;nbsp;की सियासत ने&amp;nbsp; इन्हें अपना मानकर इन्हें त्रिस्क्रित कर दिया है .कश्मीर के लोग अपना ऐतिहासिक आधार राज्तार्न्गिनी मे ढूंढ़ते है .वे अपने को&amp;nbsp; भारत की परंपरा की एक मजबूत कड़ी मानते है .क्या इस ऐतिहासिक तथ्य को झुठलाया &amp;nbsp;जा सकता है .क्या आज़ादी की बात करने वाले लोगों को नही पता है कि वे जिस संयुक्त राष्ट्र का हवाला देते है उसके रेजोलुसों मे भारत या पाकिस्तान किसी एक को चुनने की बात की गयी है .आज़ादी वहां कोई विकल्प नही है .क्या उन्हें नही पता कि जनमत संग्रह कराने के लिए पाकिस्तान कभी तैयार नही होगा क्योंकि उसे अपने कब्जे के कश्मीर से अपनी फौज हटानी होगी &amp;nbsp;.आज गिलगित बल्तिस्तान पाकिस्तान का एक प्रान्त का दर्जा पा चुका है तो पाकिस्तान मक्बुजा कश्मीर की पूरी आवादी ही बदल गयी है .लेकिन फिर अगर गिलानी रायशुमारी की बात कर रहे है तो जाहिर है वे कश्मीर के लोगों को गुमराह कर रहे है .ऐसी गुमराह करने वाली बाते ओमर अब्दुल्ला भी कर रहे है तो इनकी सियासत को समझा जा सकता है .&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: medium;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: 14px; line-height: 25px;"&gt;लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई मे भारत के आमलोगों को कश्मीर की जरूरत है .क्या कश्मीर की अपार खनिज संपदा भारत को आर्थिक ताक़त बना सकता है ?आज भारत के आर्थिक संसाधन का सबसे ज्यादा उपयोग कश्मीर के लोग कर रहे है .भारत की आर्थिक संसाधनो की सबसे ज्यादा लूट इसी कश्मीर मे है लेकिन यहाँ के सियासतदान इस लूट को छिपाने के लिए भारत जब तब नशिहत भी देते है .पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला कहते है कि रियासत अपने संसाधनों ने अपने कर्मचारियों को एक महीने का तनख्वा भी नही दे सकती है इस संसाधन से&amp;nbsp;आम लोगों की&amp;nbsp; तरक्की की बात तो सोची भी नही जा सकती&amp;nbsp; &amp;nbsp;लेकिन फिर भी फारूक साहब को ऑटोनोमी चाहिए तो गिलानी को आज़ादी .भारत के पैसे से फारूक साहब बनायेंगे खुशहाल कश्मीर ? तो पाकिस्तान के पैसे से गिलानी साहब बाटेंगे फ्री शराब .....&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-3196213016947392603?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/3196213016947392603/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=3196213016947392603&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3196213016947392603'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3196213016947392603'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/10/blog-post_23.html' title='आज़ाद कश्मीर मे गिलानी साहब परोसेंगे शराब'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TMKpygxu-bI/AAAAAAAAAbg/iYivloVP-aA/s72-c/gilani2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-3751794239769644974</id><published>2010-10-09T04:43:00.000-07:00</published><updated>2010-10-09T04:43:32.763-07:00</updated><title type='text'>कश्मीर का सच : ओमर अब्दुल्ला</title><content type='html'>&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TLAzlzNHYHI/AAAAAAAAAbY/dyS9r__3ymc/s1600/omar+abdulla.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="166" src="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TLAzlzNHYHI/AAAAAAAAAbY/dyS9r__3ymc/s200/omar+abdulla.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;रियासत मे मुख्यमंत्री पद की कमान संभाले अभी ओमर अब्दुल्ला को दो&amp;nbsp; साल पुरे नही हुए है&amp;nbsp; लेकिन ओमर अब्दुल्ला यह बात मान चुके है कि वे कश्मीर मे सबसे ज्यादा निक्कमा मुख्यमंत्री साबित होने वाले है .पिछले महीने एक इंटरव्यू मे उन्होंने &amp;nbsp;माना था कि " सियासी तौर वे&amp;nbsp; कोई चमत्कार दिखाने के लायक नही है ना ही वे अपने आपको लोगों के बीच बेच पाए है ".यानि शेख अब्दुल्ला की तीसरी पीढ़ी को कश्मीर मे तुरुप के पत्ते की तरह इस्तेमाल करने की पूरी कोशिश की गयी लेकिन यह दाव पूरी तरह से खाली गया .पिछले विधान सभा चुनाव मे नेशनल कान्फेरेंस सबसे बड़ी पार्टी के रूप मे सामने आई लेकिन सरकार बनाने से कोसो दूर थी .कांग्रेस के साथ सरकार बनाने की कबायद तेज हुई लेकिन कांग्रेस की तरफ से साफ़ कहा गया फारूक पिटे हुए मोहरे है सिर्फ ओमर अब्दुल्ला को आजमाया जा सकता है .हालत यह है कि जो काम पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद नही कर सका .वादी मे सरगर्म अलगाववादी संगठन नही कर सके वह काम ओमर अब्दुल्ला अपने चंद महीनो के शासन मे कर दिखाया .कश्मीर का एक आध इलाका नही बल्कि वादी के दस जिले लगातार चार महीनो से अस्तव्यस्त रहे १०० से ज्यादा बच्चे मारे गए .वादी के कामकाज ठप्प रहे .दरअसल लोगों का यह गुस्सा स्थानीय ओमर अब्दुल्ला सरकार के खिलाफ था लेकिन बड़ी चालाकी से इस नाकामी के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहरा दिया गया .आपदा प्रवंधन के जिम्मेदारी लेते हुए केंद्र सरकार ने अपनी पहल तेज की और जख्मों पर मरहम लगाने की शानदार पहल की .अब जब हालत फिर से सामान्य होने लगे है ओमर अब्दुल्ला एक नए सियासी चेहरे के साथ वापस आ गए है .कहा गया कि राहुल गाँधी&amp;nbsp; ओमर अब्दुल्ला को हर हाल मे मुख्यमंत्री बने रहने की वकालत कर रहे है जाहिर है कश्मीर मे शांति बहाली के लिए केंद्र को दुसरे आप्शन ढूंढने पड़े .&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;कश्मीर भारत का अहम् हिस्सा है जाहिर है लोगों की मुश्किलों पर भी गौर करने की जरूरत है लेकिन अगर लोगों की शिकायत भ्रष्ट और अक्षम स्थानीय सरकार से है लेकिन बदले मे अगर श्रीनगर के सी आर पी ऍफ़ के बंकरों को हटाया जाय तो माना जायेगा कि केंद्र&amp;nbsp;सरकार खुद समस्या से मुह चुरा रही है .पिछले वर्षों मे ६०० से ज्यादा नौकरशाह और राजनेताओं पर करोडो रूपये डकार लेने का आरोप है लेकिन यह सरकार एक भी व्यक्ति पर केस दर्ज नही कर सकी है .एक एक मंत्री के घरों के रंग रोगन पर करोडो अरबो खर्च किये जा चुके है लेकिन यह पूछने वाला नही है कि लोगों के पैसे की लूट पर यह सरकार चुप क्यों है .जाहिर है ओमर अब्दुल्ला अपनी हालत बेहतर समझते है सो भ्रष्टाचार और अक्षमता पर बोलने के बजाय उन्होंने मसले कश्मीर मे एक नयी सियासी पेंच डालने की कोशिश की है .ओमर अब्दुला मुख्यमंत्री से पहले देश के महत्वपूर्ण मंत्रालय मे मंत्री पद की शोभा बढा चुके है लेकिन उन्हें यह बात समझ मे आ गयी है कि वादी की सियासत मे अलगाववाद जरूरी है .ओमर अब्दुल्ला को लगा कि पी ड़ी पी का सियासी आधार अलगाववाद है सो उन्होंने झट से यह कह दिया कि कश्मीर का भारत के साथ पूर्ण विलय अभी होना बाकी है यानि कश्मीर की जो हैसियत गिलानी साहब देखते है वही हैसियत ओमर अब्दुल्ला के लिए भी है .कल तक अलगाववादी लीडरों के लिए ओमर अब्दुल्ला दुश्मन न १ था ,वादी मे मारे गए १०० से ज्यादा नौजवानों के लिए ओमर अब्दुल्ला जिम्मेदार था आज यही अब्दुल्ला सबके प्यारे हो गए है .खुद गिलानी इसे अपनी जीत बता रहे है .&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&amp;nbsp;अरबी में एक कहावत काफी प्रचलित है कि जिसने ज्यादा दुनिया घूमा हो वह उतना ही ज्यादा झूठ बोलता है . ओमर अब्दुल्ला अपने खानदान की नाकामयाबी को छुपाने के लिए सीधे झूठ और भ्रम&amp;nbsp; का सहारा ले रहे है . उन्हें&amp;nbsp; यह याद दिलाने कि जरूरत है कि १९४८ में जब पाकिस्तानी फौज ने कश्मीर पर आक्रमण किया था तो कश्मीर के हजारों लोगों ने पाकिस्तानी गुरिल्लाओं को रोका था . सैकडो की तादाद में लोग शहीद हुए थे . बारामुल्ला में पाकिस्तानी फौज ने सैकडो बहनों की असमत्दरी की थी .भारत में कश्मीर विलय का एलान होने के साथ ही भारतीय फौज ने पाकिस्तानी आक्रमणकारियों को मार भगाया था . भारतीय फौज के स्वागत में लाखों की तदाद में जमाहोकर कश्मीरियों ने भारत के प्रति अपने समर्थन का इजहार किया था . याद रखने वाली बात यह भी है कि वह शेख अबुल्लाह ही थे जिनके कहने पर पंडित नेहरु संयुक्त राष्ट्र गए और उन्होंने&amp;nbsp;कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के हवाले कर दिया था ,जिसे हम पाकिस्तान मक्बूजा कश्मीर के नाम से जानते है . ओमर साहब को यह भी याद दिलाने की जरूरत है कि युसूफ शाह १९८९ तक एक आम कश्मीरी एक आम भारतीय ही था . भारतीय लोकतंत्र में उसे गहरी आस्था थी और उसने एम् एल ए के लिए पर्चा भी भरा था . लोग कहते है कि युसूफ शाह की जीत पक्की थी . लेकिन फारूक अब्दुल्लाह ने उसके सपने पर पानी फेर दिया उसे एम् एल ए नहीं बनने दिया गया . युसूफ शाह सैयेद शालाहुद्दीन बन गया . वह हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर चीफ &amp;nbsp; बन बैठा . और जब कश्मीर में आतंकवाद का दौर शुरू हुआ तो फारूक अब्दुल्ला कश्मीर छोड़कर लन्दन भाग खड़े हुए . राजीव गांधी की भावुकता का नाजायज फायदा उठाकर फारूक अब्दुल्लाह १९९६ में ही दुबारा मुख्यमंत्री&amp;nbsp; बनकर लौटे .जम्हूरियत का जितना बलात्कार ओमर साहब आपके खानदानो ने&amp;nbsp; कश्मीर में किया&amp;nbsp; शायद ऐसा भारत में कही हुआ हो . &amp;nbsp;३० साल तक शेख अब्दुल्लाह खानदान का जबरन कब्जा वादी मे&amp;nbsp; लोगों का&amp;nbsp; लोकतंत्र से भरोसा ख़त्म कर दिया था . .&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TLBUVfJU6_I/AAAAAAAAAbc/PQMLHQEDTLI/s1600/chidam.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TLBUVfJU6_I/AAAAAAAAAbc/PQMLHQEDTLI/s1600/chidam.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;पिछले &amp;nbsp;वर्षों में भारत सरकार&amp;nbsp;ने &amp;nbsp;एक लाख&amp;nbsp; &amp;nbsp;हजार करोड़ से ज्यादा खर्च कश्मीर मे &amp;nbsp;शायद इस भ्रम में किया&amp;nbsp;है कि विकास की रफ़्तार के सामने में अलगाववाद की आवाज धीमी पड़ जायेगी । लेकिन ऐसा नही हुआ । पैसे की बौछार से कश्मीर में रियल स्टेट में बूम है । कस्बाई इलाके में भी शोपिंग मौल खुल गए हैं । लेकिन जब भी कोई आग भड़कती है&amp;nbsp;तो वादी में जीवे जीवे पाकिस्तान की आवाज सबसे ज्यादा गूंजती है.... । क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश कि क्या पैसा कश्मीर मसले का समाधान है ? भ्रष्टाचार के आकंठ मे&amp;nbsp;&amp;nbsp;डुबे&amp;nbsp;&amp;nbsp;कश्मीर&amp;nbsp;के सियासतदान&amp;nbsp;&amp;nbsp;कभी भी यह स्वीकार नही करते है कि लोगों का भरोसा उन्होंने खोया है बल्कि हर बार वे कश्मीर को एक अलग समस्या बताते हुए सारा ठीकरा केंद्र के सर फोड़ देता देता है&amp;nbsp; कलतक सोपोर मे केंद्रीय विश्विद्यालय की मांग करने वाले गिलानी साहब आज अगर दोबारा जनमतसंग्रह की मांग करने लगे है तो माना जायेगा कि कश्मीर मे अलगाववाद की सियासत को वहां की सरकारों ने जिन्दा रखी है .कश्मीर के लोग पाकिस्तान की हालत से भली भाति वाकिफ है सो वह गिलानी साहब के कहने से पाकिस्तान नही चले जायेंगे .उन्हें यह भी पता है अगर जनमतसंग्रह हुए भी तो उन्हें भारत और पाकिस्तान मे से किसी एक को चुनना होगा .आज़ादी का तीसरा विकल्प नही है .उन्हें यह भी पता है कि जनमत संग्रह कराने के लिए पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र की शर्तों को मानना होगा और उसे पाक अधिकृत कश्मीर से लेकर गिलगित बल्तिस्तान से अपने फौज हटाने होंगे और उन इलाकों को भारतीय फौज के हवाले करने होंगे .क्या पाकिस्तान कभी संयुक्त राष्ट्र की शर्तो को मानने के लिए तैयार होगा .क्या पाकिस्तान कभी भी इन इलाकों से पंजाब ,सिंध और पख्तून के लाखों लोगों को निकाल बाहर&amp;nbsp;करेगा&amp;nbsp;&amp;nbsp;.पाकिस्तान खुद संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्ताव को बीते दिनों की बात कह रहा है लेकिन कश्मीर मे अलगाववादी संयुक्त राष्ट्र की बात करते है .जाहिर है वे लोगों से झूठ बोल रहे है और उनका यह झूठ तबतक चलता रहेगा जबतक कश्मीर मे भ्रष्टाचार कायम रहेगा और राजगद्दी की वंश परंपरा चलती रहेगी.आज अगर ओमर अब्दुल्ला विलय के ऐतिहासिक दस्तावेजो पर सवालिया निशान लगा रहे है तो यह माना जायेगा कि इन अब्दुल्लाओं ने भारत &amp;nbsp;सरकार को बड़े ही हलके से लिया है .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-3751794239769644974?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/3751794239769644974/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=3751794239769644974&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3751794239769644974'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3751794239769644974'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/10/blog-post.html' title='कश्मीर का सच : ओमर अब्दुल्ला'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TLAzlzNHYHI/AAAAAAAAAbY/dyS9r__3ymc/s72-c/omar+abdulla.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-4507522332374291104</id><published>2010-09-19T12:21:00.000-07:00</published><updated>2010-09-19T12:21:21.741-07:00</updated><title type='text'>ऑटोनोमी का मतलब शेख अब्दुल्ला या फिर गिलानी</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TJTuYABJMSI/AAAAAAAAAa8/I64wle3asyE/s1600/gilani.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TJTuYABJMSI/AAAAAAAAAa8/I64wle3asyE/s320/gilani.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;सैयद अली शाह गिलानी आज कश्मीर मे सबसे&amp;nbsp; बड़े कद्दाबर लीडर है या फिर राज्य की ओमर अबुल्ला की सरकार ने उन्हें इस मुकाम पर पहुँचाया है यह बहस का विषय है लेकिन इतना तो तय है कि गिलानी आज कश्मीर मे सियासी धारा को मोड़ने की ताक़त रखते है .सवाल यह है कि कश्मीर मे आज ओमर अब्दुल्ला सरकार की रिट चल रही है या गिलानी की ? इसका जवाब गिलानी साहब का हर्ताली कैलेण्डर है .कश्मीर मे कब बाजार खुलेंगे ,किस दिन ऑफिस खुलेंगे ,किस दिन बच्चे स्कूल जायेंगे यह तय गिलानी साहब करते है न कि ओमर अब्दुल्ला की सरकार .यानी व्यवस्था पर पूरी तरह से अलगाववादी नेता हावी है ,चुनाव से जीतकर आये जनप्रतिनिधि या तो कश्मीर छोड़ चुके है या फिर कही कोने मे दुबके है लेकिन सरकार ओमर अब्दुल्ला की चल रही है .क्योंकि यह जिद फारूक अब्दुल्ला की है या फिर ओमर अब्दुल्ला राहुल गाँधी की पसंद है . बाप फारूक अब्दुल्ला की सियासी महत्वाकांक्षा अगर कश्मीर मे भारत के अबतक किये गए तमाम प्रयासों पर पानी फेर रही है तो शेख अब्दुल्ला बनने की सियासी महत्वाकांक्षा पाले गिलानी साहब नौजवानों को इस खेल मे बली का बकरा बना रहे है .चार महीने पहले कश्मीर की हालत यह थी कि कश्मीर मे देशी -विदेशी शैलानियो की तादाद ७&amp;nbsp; लाख से ऊपर पहुँच गयी थी ,अमन के उस माहोल मे कोई गिलानी साहब का नाम लेने वाला नही था .कश्मीर की सियासत मे लगभग अपने को ख़ारिज मानकर सैयद अली शाह गिलानी दिल्ली स्थित अपने घर की&amp;nbsp; चारदीवारी मे सिमट गए थे लेकिन ओमर अब्दुल्ला की सियासी नादानी इस शख्स को रातो रात हीरो बना दिया .आज कश्मीर मे शायद लोग जितने शेरे कश्मीर शेख अब्दुल्ला को नही जानता होगा उससे ज्यादा लोग आज गिलानी को जानते है&lt;br /&gt;.एक मासूम तुफैल अहमद की मौत से उठा बवाल ने अबतक १०० से ज्यादा नौजवान&amp;nbsp; और बच्चो की जिन्दगी लील ली है लेकिन अबतक यह पता लगाया जाना बाकी है कि ये पत्थर चलाने वाले बच्चे गुस्से मे क्यों है ?&lt;br /&gt;२० -२५ साल का पढ़ा लिखा नौजवान आज क्यों गिलानी साहब के सुर मे सुर मिला रहा है ?क्यों पढ़े लिखे बच्चे गिलानी साहब के पीछे आज़ादी का नारा लगा रहा ?क्यों बरसो बाद कश्मीर मे&amp;nbsp; एक बार फिर जीवे जीवे पाकिस्तान का नारा बुलंद है ?&lt;br /&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TCxallllZII/AAAAAAAAAZc/kvrTotasD9w/s1600/kasssm.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" rw="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TCxallllZII/AAAAAAAAAZc/kvrTotasD9w/s200/kasssm.jpg" width="116" /&gt;&lt;/a&gt;फारूक अब्दुल्ला कहते है कि इन बच्चो को ऑटोनोमी चाहिए ,गिलानी कहते है कश्मीर के बच्चे टोटल आज़ादी चाहते है .यही बात दुसरे अलगाववादी नेता भी कहते है .महबूबा से पूछिये ओ कहेंगी फौज को कश्मीर से हटालो बच्चे अपने आप खुश हो जायेंगे .हमारे गृह मंत्री कहते है कि कश्मीर की एक यूनिक समस्या है इसका हल भी यूनिक होना चाहिए ,सो वे मानते है कि इसका हल राजनीतिक है .गृह मंत्री कभी इस गुस्साए लोगों से नही मिले है लेकिन उन्हें कहा जाता है कि बच्चे आर्म्स फाॅर्स एक्ट हटाने से खुश हो जायेंगे तो कहते है इसे हटाना चाहिए ,उन्हें कहा जाता है कि कश्मीर से जो वादे किये गए थे उसे पूरा करने से गुस्साए नौजवान खुश हो जायेंगे तो गृह मंत्री उन तमाम पुराने समझौते को खंगालने मे व्यस्त हो जाते है लेकिन उनके साथ दिक्कत यह है कि उनके साथ मंत्रिमंडल और पार्टी मे कश्मीर के खेल मे उनसे बड़े खिलाडी है और चिदम्बरम साहब चुप चाप पहल करते करते अचानक खामोश हो जाते है .&lt;br /&gt;गृह मंत्री जी कश्मीर समस्या के राजनीतिक हल ढूंढने से पहले अगर&amp;nbsp; नौजवानों के&amp;nbsp; गुस्से को समझने की कोशिश की होती तो शायद उन्हें पुराने समझौते को लेकर उतनी माथा पच्ची नही करनी पड़ती .यह समस्या&amp;nbsp; भ्रष्टाचार के आकंठ मे डुबे रियासत की है .कश्मीर मे सियासत की कीमत है&amp;nbsp; अगर आप भारत के साथ है तो आपकी कीमत है अगर आप पाकिस्तान के साथ है तब भी आप की कीमत है .यानी यहाँ हर सियासी नारे की कीमत है .पिछले वर्षों मे यहाँ पानी की तरह पैसा बहाया गया है ,आर्थिक पैकेजों की झड़ी लगा दी गयी है . भारत सरकार का अनुदान यहाँ&amp;nbsp; कर्ज नही है बल्कि यह मुफ्त का राशन है जिसे कुछ लोग आपस मे बाट लेते है .जिस कश्मीर&amp;nbsp; को&amp;nbsp; पिछले पांच&amp;nbsp; वर्षों मे एक लाख करोड़ रूपये से ज्यादा रूपये मिले हों और उस कश्मीर मे आज भी अगर एक पढ़े लिखे नौजवान को सरकारी नौकरी के अलावा कोई विकल्प नही हो तो माना जायेगा कि इस रकम&amp;nbsp; को कहीं लूट ली गयी है .कश्मीर मे किसी नेता पर कभी आपने भ्रष्टाचार का मामला नही सुना होगा .ओमर अब्दुल्ला सरकार के तीन मंत्रियों पर दुबई मे घर खरीदने की चर्चा अख़बारों मे आई लेकिन यह चर्चा कभी किसी लीडर ने नही उठाई क्योंकि इस हमाम मे सभी नंगे है .छोटे मुलाजिम से लेकर बड़े अधिकारी तक कश्मीर मे यह तादाद ९ लाख से ऊपर है .पिछले तीन महीने से स्कूल बंद है ,कॉलेज बंद है ,दफ्तर बंद है और मुलाजिम घर मे बैठे है लेकिन महीने की पहली तारीख को उनकी तनख्वा अकाउंट मे पहुँच जाती&amp;nbsp; है.प्रति महिना कश्मीर की सरकार २००० करोड़ रुपया सैलरी बाटने पर खर्च करती है लेकिन उस सरकार की आमदनी १०० करोड़ के आंकड़े को भी नही पार कर पाती .यानी पैसा भारत सरकार का है तो ओमर अब्दुल्ला को दरिया दिली दिखाने से कौन रोक सकता है. क्या&amp;nbsp; ओमर अब्दुल्ला आजतक अपने मुलाजिम को यह कह पाए है कि काम नही तो पैसा नही .कश्मीर के आज हर घर मे कोई न कोई सरकारी फर्द है लेकिन आज़ादी की बात आज हर घर से उठ रही है क्योंकि पैसा अपने आप हर घर मे पहुच रहा है ..क्या वे यह नही जानते कि कश्मीर की सरकार अपने बदौलत अपने मुलाजिम को एक दिन का भी तनख्वा नही दे सकती .लोग यह जानते है लेकिन भ्रष्ट व्यवस्था के लिए आज़ादी की मांग सबसे बड़ी ढाल है .&lt;br /&gt;कश्मीर के इन नौजवानों को पाकिस्तान की हालत हमसे ज्यादा पता है .उन्हें पता है कि पाकिस्तान के साथ उनका वही हश्र होगा जो कभी बंगलादेश&amp;nbsp; का हुआ था ,आज बलूचिस्तान का हो रहा है .उन्हें पता है कि मजहब के नाम पर बने स्टेट मे लोगों की आज़ादी का मतलब क्या होता है .यही वजह है कि जब कभी भी जम्हूरियत की बात होती है तो आम लोग इस अमल मे बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है ये अलग बात है कि वे हर बार ठगे जाते है ..क्योंकि सरकार के नाम पर वही पुराने चेहरे और वही भ्रष्ट लीडरों की फौज सामने आ जाती है .&lt;br /&gt;सत्ता और पैसे का खेल जितना भारत समर्थित दल मे है उसे कही ज्यादा भारत विरोधी जमातों मे है .गिलानी साहब को इस दौर मे कड़ी चुनौती पूर्व आतंकवादी मशरत आलम से मिल रही है तो अपना आधार खो चुके मिरवैज ओमर फारूक गिलानी के असर को कम करने के लिए ओमर अब्दुल्ला से मदद मांगता है .अगर यह सियासत आग जलाने से ही चलती है तो कश्मीर मे ईद के दिन आग जलाने की छूट मिरवैज ओमर फारूक को भी मिली .सरकार आज तक गिलानी पर कुछ करवाई नही कर सकी तो मिरवैज अपने है .&lt;br /&gt;ये सारे खेल इस लिए नही चल रहे है क्योंकि कश्मीर एक मुस्लिम बहुल राज्य है या फिर वहां के लोग अतिवादी है यह खेल इसलिए चल रहा है क्योंकि वहां लोग अपने को भारत से अलग मानते है .वहां जम्हूरियत अपनी ज़मीन नही बना सकी है .यह ज़मीन कभी ऑटोनोमी से नही बनेगी यह ज़मीन फौज हटाने से नही बनेगी या फिर ये ज़मीन आज़ादी मिलने से नही बनेगी .भारत के रहने वाले ११ करोड़ मुसलमानों का समर्थन आज अगर कश्मीरियों के साथ नही है तो यह जाहिर है कि वे उनके पाखंड को जानते है .जो मुसलमान फिलिस्तीन के सवाल पर इराक के सवाल पर दुनिया के किसी हिस्से मे मुसलमानों पर हुए अत्याचार के खिलाफ पुरे भारत मे जोरदार प्रदर्शन करता है आज वे कश्मीर मे तथाकथित ज्यादतियों के खिलाफ चुप क्यों है ?इस अर्थ को समझना होगा . कश्मीर का मतलब सिर्फ वादी के दस जिले नही है उसमे जम्मू और लद्दाख का भी अस्तित्व है ..धारा ३७० की बात हो या स्पेशल एस्टेट्स की इससे आम लोगों का कुछ भी भला नही हुआ है इस स्पेशल ने कुछ लोगों को कश्मीरियों को धोके मे रखकर अपना उल्लू सीधा करने का मौका जरूर दे दिया है .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-4507522332374291104?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/4507522332374291104/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=4507522332374291104&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/4507522332374291104'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/4507522332374291104'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/09/blog-post_19.html' title='ऑटोनोमी का मतलब शेख अब्दुल्ला या फिर गिलानी'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TJTuYABJMSI/AAAAAAAAAa8/I64wle3asyE/s72-c/gilani.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-1212880802847015216</id><published>2010-09-04T05:34:00.000-07:00</published><updated>2010-09-04T05:34:54.847-07:00</updated><title type='text'>नक्सली समस्या की जड़ दिल्ली है</title><content type='html'>&lt;div style="border-bottom-style: none; border-bottom-width: medium; border-color: initial; border-left-style: none; border-left-width: medium; border-right-style: none; border-right-width: medium; border-top-style: none; border-top-width: medium;"&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TII2jSyWUdI/AAAAAAAAAak/xubz6CZTH44/s1600/naxal1.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="166" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TII2jSyWUdI/AAAAAAAAAak/xubz6CZTH44/s200/naxal1.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px; text-align: left;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="line-height: 25px;"&gt;नक्सल आतंक के खिलाफ पिछले साल&amp;nbsp; से जोरदार हमले की तैयारी थी . ऑपरेशन ग्रीन हंट की तैयारी मीडिया के द्वारा छन छन कर लोगों के बीच आ रही थी . नगारे बज रहे थे मानो फाॅर्स बस्तर के जंगल में घुसेंगे और गणपति से लेकर कोटेश्वर राव तक तमाम आला नक्सली लीडरों को कान पकड़ कर लोगों के बीच ले आयेंगे . लेकिन भारत सरकार यह अबतक यह नही तय कर पायी की इस जंग की कमान किसके हाथ मे होगी ?.अभियान के कप्तान गृहमंत्री चिदंबरम को पार्टी और पार्टी से बाहर लगातार नशिहते मिल रही थी कि नक्सली पराये नही है वे पार्टी के लिए पहले भी हितकर रहे है और उनका उपयोग कभी भी चुनाव मे हो सकता है .यही वजह है कि&amp;nbsp; चिदम्बरम साहब नक्सल के खिलाफ जंग भी लड़ना चाहते है लेकिन सामने नही&amp;nbsp;&amp;nbsp;आना चाहते .वो राज्य सरकारों को मदद दे रहे, वे ४० से ५० बटालियन सी आर पी ऍफ़&amp;nbsp; नक्सल प्रभावित राज्यों को भेज रहे .लेकिन लड़ाई की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर छोड़ रहे है .लेकिन राज्य सरकार चाहती है कि यह लड़ाई चिदम्बरम खुद लड़े. &amp;nbsp;यह देश का सवाल नही है वोट का सवाल है .बेचारा नीतीश कुमार कल तक नक्सल के खिलाफ सख्त बयानवाजी के कारण चिदंबरम को नशिहत दे रहे थे .वे यह मान रहे थे कि बिहार मे नक्साली कोई बड़ी समस्या नही है और वे अपने लोग है .नीतीश यह बात इसलिए कह रहे थे क्योंकि लालू यादव नक्सल के खिलाफ किसी जंग या&amp;nbsp; अभियान के खिलाफ थे .लेकिन नक्सलियों ने बिहार पुलिस के जवानों और अधिकारियो को &lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: small;"&gt;अगवा करके नीतीश को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया &amp;nbsp;.&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TII48G_KmuI/AAAAAAAAAa0/slnGQl7AF4c/s1600/chidam.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TII48G_KmuI/AAAAAAAAAa0/slnGQl7AF4c/s320/chidam.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px; text-align: left;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="line-height: 25px;"&gt;भारत सरकार यह तय नही कर पायी है कि बिहार की यह समस्या नीतीश की है या देश की ?खुद गृह मंत्री कहते है कि यह बिहार सरकार को तय करना है कि इस स्थिति से कैसे निपटे .यानी देश की संप्रभुता के खिलाफ लड़ रहे नक्सलियों के साथ इस देश की सियासत उनके साथ है .&lt;/span&gt;नक्सालियों के गिरफ्त से &amp;nbsp;पुलिस ऑफिसर अतिन्द्र्नाथ दत्त को बाहर निकलने के लिए पशिम बंगाल सरकार को अकेली मसक्कत करनी पड़ी थी . अतिन्द्र्नाथ के बदले में पश्चिम&amp;nbsp; बंगाल सरकार को २३ नाक्सालियो को छोड़ना पड़ा था&amp;nbsp; । &amp;nbsp;इस रिहाई को नक्सली नेता कोटेश्वर राव डंके के चोट पर अंजाम दे रहे थे &amp;nbsp;और बेवस सरकार हाथ पर हाथ धरे नक्सालियों के हर आदेश का पालन करती रही । मालूम हो कि भारत सरकार ने ऐसे मामले मे किसी तरह का समझौता नही करने का प्रण लिया था और होस्टेज पालिसी के नाम पर देश को एक कड़े कानून भी गिफ्ट मे दिए गए थे लेकिन हर बार सरकार बेवस ही नज़र आई .ऐसा पहली बार हुआ कि नक्सालियों राजधानी एक्सप्रेस को अगवा करके राज्य&amp;nbsp;सरकार को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था .ट्रेन मे सवार ५०० से ज्यादा लोगों को घंटो तक नक्सलियों के रहमो करम पर छोड़ दिया गया था .उस वक्त भी नक्सलियों ने अपनी बात मनवाली थी ,ये अलग बात है इस अगवा मे शामिल लोगों को राजनीतिक समर्थन खुद रेल मंत्री दे रही है .ये पश्चिम बंगाल सरकार का आरोप है लेकिन पी सी पी ऐ के रैली मे शामिल होकर ममता ने यह साबित कर दिया है कि नक्सालवाद भले ही इस मुल्क की समस्या हो लेकिन बंगाल की सत्ता मे लौटने के लिए &amp;nbsp;उन्हें&amp;nbsp;नक्सालियों की&amp;nbsp; बन्दूक ही सबसे बड़ा सहारा हो सकती है .क्योंकि लेफ्ट की बाहूबली फौज से मुकाबला &amp;nbsp;करने के लिए ममता दीदी को किसी और बाहुबली की ताकत का दरकार है . .लेकिन वोट की सियासत&amp;nbsp; झारखण्ड के पुलिस इंसपेक्टर फ्रांसिस इन्दिवेर साथ नही थी इसलिए यहाँ होस्टेज पालिसी काम कर गयी ..नक्सलियों की बात नही मानी गयी तो&amp;nbsp; बदले मे नक्सलियों ने इन्दीवर को गला रेत कर मार डाला था ।&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px; text-align: left;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TII2tHn6jGI/AAAAAAAAAas/Uz6KupHxyKk/s1600/manmohan.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" src="http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TII2tHn6jGI/AAAAAAAAAas/Uz6KupHxyKk/s200/manmohan.jpg" width="143" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px; text-align: left;"&gt;&amp;nbsp;प्रधान मंत्री बार बार कह चुके है कि नक्सली&amp;nbsp; आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है लेकिन पार्टी के आलाकमान और दुसरे कद्दावर नेता नक्सलियों से नरमी बरतने पर जोर देते है . &amp;nbsp;प्रधानमंत्री कोई सियासी जोखिम नही उठाना नही चाहते है और नही ऐसा कोई जोखिम गृह मंत्री लेना चाहते है सो बिहार पुलिस के अगवा &amp;nbsp;मामले मे केंद्र सरकार हर मदद का भरोसा देती है लेकिन करवाई के नाम पर चुप कर बैठी है .सवाल यह है कि इस मामले के लिए ट्रेंड एस पी जी ,ब्लैक कैट कमांडो और सेना का अगर उपयोग नही होता है तो यह माना जायेगा कि केंद्र सरकार सिर्फ तमाशा देखना चाहती है&amp;nbsp; ।&amp;nbsp;..इस साल की बात करे तो ४००&amp;nbsp; से ज्यादा पुलिस कर्मी मारे गए है ३०० से ज्यादा आम आदमी नक्सल हमले के शिकार हुए है फ़िर भी यह कहा जा रहा है कि नक्सली सिर्फ व्यवस्था परिवर्तन की बात करते है देश की संप्रभुता पर कोई आंच नही पंहुचा रहे है तो यह माना जायेगा कि ऐसे लोग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से नक्सालियों की मदद कर रहे है .&lt;/div&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: medium;"&gt;६ अप्रैल २०१०, दंतेवाडा . भारत के आतंक विरोधी अभियान&amp;nbsp;का &amp;nbsp;कला दिवस माना जा सकता है नक्सली हमले मे&amp;nbsp; .एक नहीं दो नहीं ७६ से&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="line-height: 28px;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: medium;"&gt;ज्यादा सुरक्षा वल मौत के घाट उतार दिए गए .नक्सली आतंकियों द्वारा किया गया यह सबसे बड़ा हमला था लेकिन केंद्र सरकार की जांच कमीशन इस के लिए मारे गए सुरक्षा जवानों को दोषी ठहराते है .इसे एक मजाक ही कहा जा सकता है कि जंगल मे नक्सलियों से जूझने के लिए ऐसे जवानों को भेजा जाता है जिनका न तो जंगल से सरोकार है न ही गुरिल्ला वार से लेकिन उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है . .&lt;/span&gt;&lt;/span&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: medium;"&gt;.यकीन मानिये अबतक नक्सल विरोधी अभियान मे २००० से ज्यादा जवानों की मौत हो चुकी है .लेकिन भारत सरकार की यह जिद है कि यह लड़ाई राज्य सरकारे लड़ेगी केंद्र सरकार&amp;nbsp; सिर्फ उन्हें सहायता देगी&amp;nbsp; .सियासत ऐसी कि नक्सल के खिलाफ अभियान को राज्यों मे ऑपरेशन ग्रीन हंट का नाम दिया जा रहा है लेकिन हमारे गृह मंत्री ऐसे किसी ग्रीन हंट ऑपरेशन से इनकार करते है&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: medium;"&gt;पश्चिम बंगाल मे नक्सालियों का हमला होता है तो ममता दीदी नक्सालियों से तुरंत बात करने की सलाह देती है .खुद&amp;nbsp;गृह&amp;nbsp;&amp;nbsp;मंत्री&amp;nbsp;जब तब राज्य&amp;nbsp;सरकार को&amp;nbsp;&amp;nbsp;निकम्मा साबित&amp;nbsp;करने&amp;nbsp;&amp;nbsp;से&amp;nbsp;&amp;nbsp;नहीं चुकते.&amp;nbsp;&amp;nbsp;. हमला बिहार मे हो तो केंद्र सरकार राज्य पुलिस व्यवस्था को लचर बताती है .यही हमला छत्तीसगढ़ मे हो तो बीजेपी सरकार की अकर्मण्यता सामने आती है ..यानि हर सरकार के सामने नक्सली वो तुरुप के पत्ते है जिसका इस्तेमाल अलग अलग राज्यों की सरकार अपने सियासी&amp;nbsp;फायदे&amp;nbsp; &amp;nbsp;और नुक्सान को देखकर कर रही है .और केंद्र सरकार विपक्षी सरकार को नकारा साबित करने में लगी है .&amp;nbsp;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin-bottom: 0px; margin-left: 0px; margin-right: 0px; margin-top: 0px;"&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;.&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: medium;"&gt;&amp;nbsp;.देश के तकरीबन १४&amp;nbsp; राज्यों में नक्सलियों का दबदवा कायम है .पिछले साल नक्सलियों ने १५०० से ज्यादा वाकये को अंजाम देकर ७०० से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी ,जिसमे ३०० से ज्यादा सुरक्षाबलों ने अपनी जान की कुर्वानी दी है .अरबों खरबों रूपये के निवेश नक्सली सियासत की भेट चढ़े है &amp;nbsp;बिहार सरकार नक्सली साजिश से जूझ रही है लेकिन उसी बिहार मे राहुल गाँधी की भव्य रैली निकाली जा रही है .उड़ीसा मे नक्सली वेदांता का विरोध करते है तो कांग्रेस इस जनमानस का विरोध मानती है और आन्दोलनकारियों के सामने राहुल गाँधी को पेश किया जाता है .उनकी सरकार निवेश को बढ़ावा देने के लिए पूरी तत्परता दिखा रही है लेकिन राहुल को समाजवादी बनाकर पेश किया जा रहा है .कह सकते है कि&amp;nbsp;.नक्सली आतंक का&amp;nbsp; समर्थन दिल्ली से मिल रहा&amp;nbsp; है न कि बस्तर के आदिवासी इलाके से . ,बुधिजीबी और मानवाधिकार संगठन के सियासी खेल का ताना बना इसी दिल्ली से रचा जाता है .जाहिर है नक्सल समस्या की जड़ दिल्ली है न कि बस्तर और झारखंड के जंगल ..&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: medium; line-height: 28px;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-1212880802847015216?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/1212880802847015216/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=1212880802847015216&amp;isPopup=true' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/1212880802847015216'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/1212880802847015216'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/09/blog-post.html' title='नक्सली समस्या की जड़ दिल्ली है'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TII2jSyWUdI/AAAAAAAAAak/xubz6CZTH44/s72-c/naxal1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-2900819877724056817</id><published>2010-08-07T04:35:00.000-07:00</published><updated>2010-08-07T04:35:13.196-07:00</updated><title type='text'>तो क्या कश्मीर मसले का हल सिर्फ जनमतसंग्रह है ?</title><content type='html'>&lt;div style="border-bottom: medium none; border-left: medium none; border-right: medium none; border-top: medium none;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TF1C1BUeaCI/AAAAAAAAAaU/1cjVgl3cblM/s1600/chidam.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" bx="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TF1C1BUeaCI/AAAAAAAAAaU/1cjVgl3cblM/s320/chidam.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="border-bottom: medium none; border-left: medium none; border-right: medium none; border-top: medium none;"&gt;गृह मंत्री पी चिदम्बरम शायद कश्मीर को लेकर ज्यादा चिंतित है .उन्हें इस बात का अफ़सोस है कि २००४ मे जो नौजवान यहाँ आई आई टी और आई आई एम् के लिए अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे वही नौजवान आज कश्मीर की आज़ादी की मांग&amp;nbsp; कर रहे है .यह एक बड़ा सवाल है कि पिछले वर्षों मे जिन इलाकों मे लोगों ने भारी तादाद मे शिरकत करके भारत के लोकतंत्र मे अपनी आस्था जताई थी आज उन इलाकों मे लोगों का भरोसा अलगाववादियों ने जीत लिया है .कश्मीर पिछले ६० दिनों से बंद ,हड़ताल और कर्फु की चपेट मे पूरी तरह अस्त व्यस्त है लेकिन कही से उजाले की किरण नहीं दिखाई दे रही है .&lt;/div&gt;पिछले जून महीने से अबतक कश्मीर मे ४० से ज्यादा नौजवान मारे गए है .सैकड़ो की तादाद मे लोग जख्मी हुए है . सरकार की ओर से यह दलील दी जा रही है १२०० से ज्यादा सुरक्षाबल घायल हुए है .यानि सरकार यह समझाने मे लगी है कि सुरक्षाबलों ने जब भी फायर खोला है वह उनकी मजबूरी रही है .सरकार की यह भी दलील है कि इन पत्थरबाजों के साथ आतंकवादी मिले हुए है .पत्थरबाजी की यह वारदात पाकिस्तान के इशारे पर हो रही है .अगर यह सब पाकिस्तान के इशारे पर हो रहा है तो फिर गृह मंत्री चिदम्बरम का यह अभियान कि वे &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TF1BaKo8q9I/AAAAAAAAAaM/y4BBgvDPUF4/s1600/pelter.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" bx="true" height="200" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TF1BaKo8q9I/AAAAAAAAAaM/y4BBgvDPUF4/s200/pelter.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;कश्मीरियों के दिल और दिमाग को दुबारा जीतेंगे शायद ही कामयाब हो . यानी मौजूदा हालत को समझे बिना एक बार फिर वही पुराने फोर्मुले दोहराने की कोशिश की जा रही है .आज चिदम्बरम कह रहे है कि अगर हालत मे सूधार हो तो वे आर्म्स फ़ोर्स स्पेशल पॉवर एक्ट और फौज मे कटौती जैसे मसले की समीक्षा कर सकते है .चिदम्बरम पिछले एक वर्षों से यह लगातार कह रहे है कि कश्मीर का एक यूनिक प्रॉब्लम है जिसका यूनिक सोलुसन जरूरी है .शायद इसी सोच के बिना पर गृह मंत्री ने चुपचाप बातचीत की पहल शुरू की थी .लेकिन ऐसी बातचीत पहले&amp;nbsp;भी &amp;nbsp;टीवी कैमरे की नजरो के बीच&amp;nbsp; हुई है लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला .नुकसान यह हुआ कि कश्मीर मे आज कोई बातचीत के लिए तैयार नहीं है .हुर्रियत का &amp;nbsp;एक ग्रुप भारत सरकार से चार रौंड की बातचीत कर चुका है लेकिन कभी भी उनकी मांग पर गौर नहीं किया गया .मिरवैज उमर फारूक केंद्र से यही मांग करते रहे हैं कि आर्म्स फ़ोर्स स्पेशल पॉवर एक्ट की समीक्षा हो ,फौज मे कटोती का एलान हो . आज चिदम्बरम भी &amp;nbsp;वही बात कह रहे है जो हुर्रियत के कुछ लीडर कह रहे थे .अगर उनकी बात पर पहल होती तो शायद मिरवैज जैसे लीडर गृहमंत्री से बात करने के लिए आज &amp;nbsp;फ़ौरन हाज़िर होते .लेकिन आज मिरवैज जैसे उदारवादी हुर्रियत की कश्मीर मे कोई जगह नहीं है .आज एक अदना सा साबिक आतंकवादी मुशरत आलम कश्मीर मे अलगाववाद की आवाज़ बन गया है तो यह सवाल उठाना लाजिमी है कि पढ़े लिखे नौजवानों का यह अनपढ़ आतंकवादी लीडर कैसे बन गया ?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रधानमंत्री एक बार फिर कश्मीर मसले पर आल पार्टी मीटिंग कर रहे है लेकिन उन्हें शायद यह याद नहीं होगा कि मसले कश्मीर पर उन्होंने तीन बार रौंड टेबल कान्फेरेंस कर चुके है .आल पार्टी के उस चिंतन बैठकों से पांच वर्किंग ग्रुप भी बनाये थे .बुद्धिजीवियों के उन तमाम ग्रुपों ने अपनी रिपोर्ट भी सरकार को सौप दी .लेकिन उस पर कभी करवाई की चर्चा नहीं हुई .यानी जिस तरह अबतक कश्मीर पॅकेज के नाम पर करोडो अरबो बहाए गए उसी तरह वर्किंग ग्रुप का श्रम और पैसा पानी मे चला गया .यानी जो प्रयोग पिछले ६० साल से कश्मीर को लेकर चल रहे है वैसा ही प्रयोग आज भी जारी है .राज्य के मौजूदा मुख्यमंत्री उसी प्रयोग का एक हिस्सा है&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;याद कीजिये ओमर अब्दुल्ला का वह जोशीला भाषण । विश्वास प्रस्ताव पर संसद में महज दो मिनट के भाषण से वे मिडिया के हीरो बन गए थे ।अलगाववाद की भाषा बोलकर ओमर अब्दुल्ला ने कश्मीर में नौजवानों के बीच अपनी पहचान बनाई थी . उन्हें लोगों ने हाथो हाथ लिया था । कांग्रेस के आलाकमान इस भाषण से इतने प्रभावित हुए थे कि जब बारी मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो उन्होंने सिर्फ़ ओमर अब्दुल्ला के लिए हामी भरी । लेकिन इस अब्दुल्ला ने जल्द ही सबको निराश किया । पिछले दिनों जब ओमर अब्दुल्ला घायलों को देखने कश्मीर के एक अस्पताल पहुंचे तो लोगों के गुस्से का आलम यह था कि कुछ लोग उनपर झपटने तक की कोशिश की थी &lt;br /&gt;.&lt;br /&gt;यही मुख्यमंत्री अगर ११ साल के तुफैल की मौत पर गम जताने अगर उसके घर गए होते दोषियों के खिलाफ&amp;nbsp;&amp;nbsp;कारवाई की होती तो शायद कश्मीर ये आग नही भड़कती&amp;nbsp;&amp;nbsp;और न ही बेवजह ४० नौजवानों की मौत होती .यानी संवेदनशील कश्मीर का ओमर अब्दुल्ला असंवेदनशील मुख्यमंत्री साबित हुए है &lt;br /&gt;पिछले पाँच वर्षों में भारत सरकार&amp;nbsp;ने &amp;nbsp;६० हजार करोड़ से ज्यादा खर्च कश्मीर मे &amp;nbsp;शायद इस भ्रम में किया&amp;nbsp;है कि विकास की रफ़्तार के सामने में अलगाववाद की आवाज धीमी पड़ जायेगी । लेकिन ऐसा नही हुआ । पैसे की बौछार से कश्मीर में रियल स्टेट में बूम है । कस्बाई इलाके में भी शोपिंग मौल खुल गए हैं । लेकिन जब भी कोई आग भड़कती है&amp;nbsp;तो वादी में जीवे जीवे पाकिस्तान की आवाज सबसे ज्यादा गूंजती है.... । क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश कि क्या पैसा कश्मीर मसले का समाधान है ? भ्रष्टाचार के आकंठ मे&amp;nbsp;&amp;nbsp;डुबे&amp;nbsp;&amp;nbsp;कश्मीर&amp;nbsp;के सियासतदान&amp;nbsp;&amp;nbsp;कभी भी यह स्वीकार नही करते है कि लोगों का भरोसा उन्होंने खोया है बल्कि हर बार वे कश्मीर को एक अलग समस्या बताते हुए सारा ठीकरा केंद्र के सर फोड़ देता देता है&amp;nbsp; कलतक सोपोर मे केंद्रीय विश्विद्यालय की मांग करने वाले गिलानी साहब आज अगर दोबारा जनमतसंग्रह की मांग करने लगे है तो माना जायेगा कि कश्मीर मे अलगाववाद की सियासत को वहां की सरकारों ने जिन्दा रखी है .कश्मीर के लोग पाकिस्तान की हालत से भली भाति वाकिफ है सो वह गिलानी साहब के कहने से पाकिस्तान नही चले जायेंगे .उन्हें यह भी पता है अगर जनमतसंग्रह हुए भी तो उन्हें भारत और पाकिस्तान मे से किसी एक को चुनना होगा .आज़ादी का तीसरा विकल्प नही है .उन्हें यह भी पता है कि जनमत संग्रह कराने के लिए पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र की शर्तों को मानना होगा और उसे पाक अधिकृत कश्मीर से लेकर गिलगित बल्तिस्तान से अपने फौज हटाने होंगे और उन इलाकों को भारतीय फौज के हवाले करने होंगे .क्या पाकिस्तान कभी संयुक्त राष्ट्र की शर्तो को मानने के लिए तैयार होगा .क्या पाकिस्तान कभी भी इन इलाकों से पंजाब ,सिंध और पख्तून के लाखों लोगों को निकाल बाहर&amp;nbsp;करेगा&amp;nbsp;&amp;nbsp;.पाकिस्तान खुद संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्ताव को बीते दिनों की बात कह रहा है लेकिन कश्मीर मे अलगाववादी संयुक्त राष्ट्र की बात करते है .जाहिर है वे लोगों से झूठ बोल रहे है और उनका यह झूठ तबतक चलता रहेगा जबतक कश्मीर मे भ्रष्टाचार कायम रहेगा और राजगद्दी की वंश परंपरा चलती रहेगी .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-2900819877724056817?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/2900819877724056817/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=2900819877724056817&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/2900819877724056817'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/2900819877724056817'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/08/blog-post.html' title='तो क्या कश्मीर मसले का हल सिर्फ जनमतसंग्रह है ?'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TF1C1BUeaCI/AAAAAAAAAaU/1cjVgl3cblM/s72-c/chidam.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-2662823847003326893</id><published>2010-07-16T06:48:00.000-07:00</published><updated>2010-07-16T06:48:04.034-07:00</updated><title type='text'>कश्मीर ,कृष्णा और कुरैशी ; सियासत मे हम अभी कच्चे है</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TEBLw-J0zII/AAAAAAAAAZs/fe6oQsieRwg/s1600/qureshi.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="148" hw="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TEBLw-J0zII/AAAAAAAAAZs/fe6oQsieRwg/s200/qureshi.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;गुन्नार मिर्डल ने लिखा था कि इंडिया एक सॉफ्ट स्टेट है । इसे समझने के लिए ज्यादा तह तक जाने की जरूरत नहीं है .भारत के विदेश मंत्री एस एम् कृष्णा का हालिया पाकिस्तान दौरा इस तथ्य को समझने के लिए काफी है .मुंबई हमले के बाद भारत पाकिस्तान के बीच यह पहला विदेश मंत्री स्तर की बैठक थी .यह चर्चा इस बहस से परे है कि लगभग दो साल बाद हुए इस बैठक के लिए क्या कोई विदेशी दवाब था या फिर पाकिस्तान से दोस्ती का हाथ बढ़ाना भारत की मजबूरी थी .लेकिन पाकिस्तान ने अपने रूख से यह साबित कर दिया है कि रिश्ते सूधारने के लिए उसे कोई जल्दी नहीं है भारत के विदेश मंत्री एस एम् कृष्णा अभी पाकिस्तान से रवाना भी नहीं हुए थे कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह&amp;nbsp;मुहम्मद&amp;nbsp;कुरैशी&amp;nbsp;ने भारत के विदेश मंत्री के दौरे&amp;nbsp;पर&amp;nbsp;ही&amp;nbsp;सवालिया&amp;nbsp;निशान&amp;nbsp;लगा दिया .उन्होंने&amp;nbsp;कहा&amp;nbsp;कि बैठक के लिए कृष्णा के कोई तैयारी&amp;nbsp;नहीं थी ,कृष्णा को बातचीत&amp;nbsp;के लिए&amp;nbsp;पूरी&amp;nbsp;छूट&amp;nbsp;नहीं मिली&amp;nbsp;थी ,बातचीत&amp;nbsp;के दौरान&amp;nbsp;कृष्णा को बार&amp;nbsp;बार भारत फोन&amp;nbsp;करने&amp;nbsp;की बात&amp;nbsp;कह&amp;nbsp;कर कुरैशी ने इसे और&amp;nbsp;मजाक&amp;nbsp;बना&amp;nbsp;दिया .तो&amp;nbsp;क्या&amp;nbsp;शाह मुहमद&amp;nbsp;कुरैशी&amp;nbsp;सारी बात झूठ&amp;nbsp;बोल रहे&amp;nbsp;थे ? लेकिन एक&amp;nbsp;बात तो बिलकुल&amp;nbsp;सच&amp;nbsp;है कि भारत के विदेश मंत्री बगैर&amp;nbsp;किसी&amp;nbsp;तैयारी के बगैर मौजूदा&amp;nbsp;हालत&amp;nbsp;को समझे&amp;nbsp;पाकिस्तान गए थे .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TEBg1HwrIfI/AAAAAAAAAZ8/W6Y-t7Dt-3I/s1600/kasssm.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" hw="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TEBg1HwrIfI/AAAAAAAAAZ8/W6Y-t7Dt-3I/s320/kasssm.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;वर्षो बाद पाकिस्तान को कश्मीर मे एक आशा की किरण दिखाई दी है .जो काम पाकिस्तान से भेजे गए बन्दूक बरदार नहीं कर सके उसे कश्मीर के कुछ पत्थरबाजों ने कर दिखाया है .यानी वर्षो बाद कश्मीर मे अलगाववाद अपनी पकड़ मजबूत की है .पिछले पंद्रह दिनों से कश्मीर हड़ताल ,बंद और कर्फ्यू से प्रभावित है .जन जीवन अस्तव्यस्त है .यानी पूरी दुनिया मीडिया के जरिये यह देख रही है कि कश्मीर के लोगों ने भारत के खिलाफ एक मुहीम चला रखी है जाहिर यह सारी चीजे पाकिस्तान के पक्ष मे&amp;nbsp;जाती&amp;nbsp;&amp;nbsp;दिखती&amp;nbsp; .पिछले वर्षों से पाकिस्तान दुनिया को यही कहते आया है कि कश्मीर पर भारत ने जबरन कब्ज़ा कर रखा है लोग भारत मे रहने के लिए तैयार नहीं है .जाहिर है ऐसे मौके पर पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवाद फ़ैलाने की बात को भी सिरे से ख़ारिज कर सकता है कि यह आज़ादी के लिए कश्मीरियों का संघर्ष है .कश्मीर मे यह लोग मान रहे है कि मौजूदा सूरते हाल स्थानीय इंतजामिया के नाकामी के खिलाफ एक गुस्से का इजहार है लेकिन इसे इसतरह प्रदर्शित किया जा रहा है मानो यह गुस्सा भारत के खिलाफ है तो क्या सिर्फ ओमर अब्दुल्ला को बचाने के लिए भारत ये सारी बदनामी झेल रहा है .पाकिस्तान के आक्रामक रवैये को इस तरह भी समझा जा सकता है कि भारत के गृह सचिव के आई एस आई को लेकर दिए गए बयान के कारण उन्हें लश्करे तोइबा के चीफ हाफिज सईद के श्रेणी मे रख&amp;nbsp;दिया जाता&amp;nbsp;&amp;nbsp;है .यानि पाकिस्तान मौजूदा हालत मे बातचीत के इस पहल को आगे बढाकर कश्मीर मे भड़की आग पर पानी नहीं फेरना चाहता .&lt;br /&gt;&amp;nbsp;भारत पाकिस्तान के बीच बनते बिगड़ते रिश्ते और विभिन्न समझौते पर गौर करे तो&amp;nbsp;यह &amp;nbsp;आपको जरूर लगेगा कि भारत शक्ति ,वैभव, ज्ञान के मामले में भले ही अपनी पहचान दुनिया&amp;nbsp;मे &amp;nbsp;बनाए हो लेकिन स्टेट के रूप में उसे हमेशा उसे एक लचर , ज्यादा विवेकशील , कुछ ज्यादा ही धैर्यवान शाशक से पाला पड़ा है। १९४७ से लेकर आजतक कश्मीर के मामले में हुक्मुतों के फैसले ने इस मुद्दे को सुलझाने के वजाय उलझाया ही है। जम्मू कश्मीर में मौजूदा सूरते हाल के लिए हुकूमत की अदूरदर्शिता ने ही छोटे से&amp;nbsp;मामले&amp;nbsp;&amp;nbsp;को तील का तार बना दिया है ।पत्थरबाजों की कुशल रणनीति ने आज आम लोगों को हुकूमत के खिलाफ कर दिया है लेकिन रियासत की &amp;nbsp;हुकूमत आमलोगों के बीच जाने के बजाय केंद्र से कश्मीर मसले के हल करने की बात करती है .&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; एक बार फ़िर यह संदेश दुनिया में गया कि जम्मू कश्मीर का मतलब सिर्फ़ कश्मीर से है लेकिन&amp;nbsp;जिस &amp;nbsp;कश्मीर को दुनिया समझ रही है उसका&amp;nbsp;सरोकार&amp;nbsp;&amp;nbsp;सिर्फ़ २० फीसद सुन्नी मुसलमानों से है ।इन्ही २० फीसद में&amp;nbsp;अलगाववादी&amp;nbsp;&amp;nbsp;भी हैं जो तथाकथित आजादी कि जंग लड़ रहे है , इन्ही में कुछ पाकिस्तान में जम्मू कश्मीर के विलय के लिए सियासी रूप में सक्रिय हैं । तो इन्ही में कुछ मुख्यधारा कि सियासत का दावा करते हें तो इसी २०&amp;nbsp;फीषद &amp;nbsp;के हाथ सरकारी इंतजामिया भी है। और हर बार बांकी ८० फीसद कि चिता को दरकिनार किया जाता रहा है। २० साल बीत जाने के बावजूद अगर कश्मीर से पलायन कर गए लाखों लोग घर नहीं लौट पाए है तो यह माना जायेगा कि कश्मीर के मामले मे भारत की &amp;nbsp;सरकारें अपनी मजबूत राजनितिक इच्छाशक्ति का परिचय नहीं दे पाई है .और भारत की यही कमजोरी पाकिस्तान भली भाति जनता है .मुंबई हमले की जांच को लेकर भारत सरकार की तमाम ठोस सबूत को दरकिनार करके पाकिस्तान&amp;nbsp; की हुकूमत जिस तरह हाफिज़ सईद के साथ मजबूती से खड़ी&amp;nbsp;&amp;nbsp;है उसे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वहां की मौजूदा हुकूमत की पाकिस्तान की पालिसी मे कितनी दखल है .&lt;br /&gt;&amp;nbsp;हेडली और राणा जैसे सैकड़ों पढ़े लिखे पाकिस्तान के नौजवान आज पूरी दुनिया मे आतंक&amp;nbsp;का परचम&amp;nbsp;लहरा&amp;nbsp;रहे&amp;nbsp;है .अल&amp;nbsp;कायदा&amp;nbsp;और तालिबान&amp;nbsp;के लिए काम कर रहे है तो क्या इन&amp;nbsp;&amp;nbsp;आतंकवादियों&amp;nbsp;&amp;nbsp;का लीडर हाफिज़ सईद हो सकता है ?क्या मदरसा के भोले भाले अनपढ़ लोगों को जिहादी बनाने वाले मौलवी अब पढ़े लिखे सभ्रांत घरानों के लोगों को जिहादी&amp;nbsp;बना&amp;nbsp;&amp;nbsp;रहा है ? यकीनी तौर पर कहा जा सकता है कि इन जिहादियों का लीडर कोई और है जो परदे के पीछे है .जाहिर है इसका नेतृत्वा पाकिस्तानी फौज कर रहा है .जाहिर इसका सूत्र धार आई एस आई है सिर्फ दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान मे एक हुकूमत है जिसे लोकतंत्र का चोगा पहना दिया गया है .आज अमेरिका से पाकिस्तान जाने वाले राजनयिक वहां&amp;nbsp;फौजी&amp;nbsp;&amp;nbsp;जनरल और आई एस आई के चीफ के साथ ज्यादा वक्त बिताता है उसे भरोसे मे लेता है ,हुकूमत के लोग उनके लिए ज्यादा मायने नहीं रखते है .पाकिस्तान की फौज और आई एस आई ने कुरैशी जैसे लीडर को आगे करके भारत को कड़ा जवाब दिया है कि उनके खिलाफ मोर्चा खोलकर वे कुछ भी हासिल करने वाले नहीं है .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-2662823847003326893?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/2662823847003326893/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=2662823847003326893&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/2662823847003326893'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/2662823847003326893'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/07/blog-post_16.html' title='कश्मीर ,कृष्णा और कुरैशी ; सियासत मे हम अभी कच्चे है'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TEBLw-J0zII/AAAAAAAAAZs/fe6oQsieRwg/s72-c/qureshi.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-3732236066707762117</id><published>2010-07-01T05:29:00.000-07:00</published><updated>2010-07-01T05:29:20.838-07:00</updated><title type='text'>ओमर अब्दुल्ला की नाकामी बनी  देश की परेशानी</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TCxallllZII/AAAAAAAAAZc/kvrTotasD9w/s1600/kasssm.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" rw="true" src="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TCxallllZII/AAAAAAAAAZc/kvrTotasD9w/s200/kasssm.jpg" width="116" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;कश्मीर आज जल रहा है .अलगाववाद एक बार फिर कश्मीर मे हावी है .आज वहां आतंकवादियों की पकड़ ढीली हो चुकी है लेकिन अलगाववाद ने फिनिक्स की तरह फिर से समाज मे अपना आधार बना लिया है लेकिन सवाल यह उठता है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है .पिछले दिनों एक के बाद एक हुई घटना मे १० से ज्यादा बच्चे और नौजवान मारे गए है .यानि बन्दूक वरदारों की जगह पत्थर वाजों ने ले ली है .पत्थरवाजों के हाथों पिटते जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों देखकर यह कहा जा सकता है पत्थर वाजों को लेकर सरकार मे अभी यह तय होना बांकी है इन हुडदंगियों से कैसे निपटे .जब&amp;nbsp;&amp;nbsp;&amp;nbsp; कोई नौजवान सी आर पी ऍफ़ की करवाई मे मारा जाता है तो रियासत की हुकूमत यह दावा करती है कि इस फाॅर्स पर उनका कोई कंट्रोल नहीं है .यानी कश्मीर मे सी आर पी ऍफ़ बेलगाम है .जबकि सच यह है कि सी आर पी ऍफ़ बगैर राज्य पुलिस की इजाज़त के एक कदम भी मूव नहीं कर सकता .लेकिन सियासत ऐसी की सरकार कभी इन पत्थर वाजों को भारत दर्शन टूर के लिए प्रोग्राम बनाती है तो कभी इन पत्थर वाजों को पुचकारने के लिए आर्थिक पाकेज का ऐलान करती है .लेकिन पिछले वर्षों मे अलगाववाद की सियासत को इन पत्थर वाजों ने हैजक कर रखा है और सरकार को इनसे निपटने के लिए कोई रणनीति नहीं है .&lt;br /&gt;.भारत सरकार का मानना है कि इन पत्थर वाजों के पीछे आतंकवादियों का खेल है .यानी इस समस्या से निपटने मे अक्षम सरकार बहाना ढूंढ़ रही है .राज्य पुलिस &amp;nbsp;यह मान रही है कि वादी मे आतंकवादियों का असर समाप्ति के दौर मे है फिर इस फेस लेस आतंक से लड़ने के लिए सरकार के पास क्या रणनीति है इसका खुलासा होना बांकी है .&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TCxpG-GSrAI/AAAAAAAAAZk/YoNwbTG7jlE/s1600/kasss.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; cssfloat: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="133" rw="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TCxpG-GSrAI/AAAAAAAAAZk/YoNwbTG7jlE/s200/kasss.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;गृह मंत्री इन बवाल के पीछे लश्कर ऐ तोइबा का हाथ मान कर समस्या से मुहं मोड़ रहे है तो राज्य के मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्लाह हर वाकये के बाद इसलिए परेशान हो जाते है कि इसका सियासी फायदा कही पी डी पी के महबूबा न ले जाय .ओमर अब्दुल्ला मानते है कि श्रीनगर के कुछ इलाके सोपोर और बारामुला के शहरी इलाके मे सिर्फ यह फसाद है लेकिन शायद वह भूल जाते है कि इन तमाम इलाकों से उनकी पार्टी नेशनल कांफेरेंस ही चुनाव जीती है .यानि यह एन सी का इलाका है लेकिन यहाँ सियासत अलगाववादियों की चलती है तो फिर यहाँ ओमर अब्दुल्ला किस&amp;nbsp;काम के है&amp;nbsp;महज १०० २०० के पत्थर वाजों की टोली ने लाखों कश्मीरियों के उम्मीदों पर पानी फेर दिया है .&lt;br /&gt;&amp;nbsp;गौर करने वाली बात यह है कि १.५ साल पहले&amp;nbsp;इसी&amp;nbsp;&amp;nbsp;कश्मीर मे चुनाव हुए थे जिसमे ६५ फिसद से ज्यादा लोगों ने वोट डालकर भारत के तई अपना भरोसा जताया था लेकिन आज आज़ादी के हक मे नारे लगा रहे है यानी मजबूरी मे सज्जाद गनी लोन जैसे अलगाववादी नेता चुनावी मैदान मे उतरे थे तो माना जा सकता है कि कश्मीर मे अलगाववादी लीडरों ने लोगों के बीच अपना आधार खो चुके&amp;nbsp;थे .&amp;nbsp;लेकिन वही अलगाववादी नेता आज नौजवानों के आदर्श है .. भूल हुकूमत से हुई है .हुकूमत ने कश्मीर मे बदले मिज़ाज को पहचाना नहीं .जाहिर है यह कहा जा सकता है कि मुख्यमंत्री ओमर ओब्दुल्ला फ्लॉप शो साबित हुए है .&lt;br /&gt;याद कीजिये ओमर अब्दुल्ला का वह जोशीला भाषण । विश्वास प्रस्ताव पर संसद में महज दो मिनट के भाषण से वे मिडिया के हीरो बन गए थे ।अलगाववाद की भाषा&amp;nbsp;बोलकर&amp;nbsp;ओमर अब्दुल्ला&amp;nbsp;&amp;nbsp;कश्मीर में नौजवानों के बीच अपनी पहचान बनाई थी . उन्हें लोगों ने हाथो हाथ लिया था । कांग्रेस के आलाकमान इस भाषण से इतने प्रभावित हुए थे कि जब बारी मुख्यमंत्री चुनने की आई तो उन्होंने सिर्फ़ ओमर अब्दुल्ला के लिए हामी भरी । लेकिन इस अब्दुल्ला ने जल्द ही सबको निराश किया । &lt;br /&gt;पिछले ६० वर्षों में भारत सरकार ने जितना तब्बजो कश्मीर को दिया है .उतना ध्यान शायद ही कोई राज्य आपनी ओर कर पाया हो । कश्मीर में इन वर्षों में जो माहौल बना है उसके लिए इस देश को भारी कुर्बानिया भी देनी पड़ी है । पैसे का हिसाब किताब आप भूल जाए । महज इन &amp;nbsp;वर्षों में कश्मीर को ६०००० करोड़ रूपये से ज्यादा केंद्रीय सहायता मिले है । सबसे बड़ी बात यह कि कश्मीर में अमन पाने के लिए हमने २०००० से ज्यादा जवानों को शहीद किया है । और जब अमन के इस माहोल को आगे ले चलाने की बात आती है तो&amp;nbsp; अब्दुल्ला के अलावा और कोई चारा क्यों नही होता है ? कश्मीर मे अस्सेम्ब्ली सत्र के दौरान यह पूछा जाता है कि मुख्यमंत्री कहाँ है ?तो जाहिर है यही सवाल कश्मीर के लोग भी पूछ रहे है कि ओमर अब्दुल्ला किसका मुख्यमंत्री है ?अगर नौजवान मुख्यमंत्री से लोगों का संवाद नहीं है तो कहा जा सकता है कि ओमर अब्दुल्ला न केवल रियासत का बल्कि इस देश का भी भारी नुकसान कर रहे है .कश्मीर मे अमन लौटने और माहोल बनाने के लिए हमारे हजारो जवानों ने कुर्वनिया दी है .यह कुर्वानी इस लिए नहीं दी गयी थी राजगद्दी ओमर अब्दुल्ला को मिले .&lt;br /&gt;कांग्रेस का समर्थन ओमर अब्दुल्ला को अगर इसलिए है कि वह राहूल के दोस्त है तो यह हमें नही भूलना चाहिए कि कभी इस देश ने पंडित नेहरू और शेख अब्दुल्ला की दोस्ती के कारण काफ़ी नुकशान सहा है । ये परेशानी आज तक पीछा नही छोड़ रही । अगर इसी दोस्ती के नाम पर यह सिलसिला जारी रहा तो कश्मीर में पाने के वजाय हम ज्यादा खोएंगे ।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-3732236066707762117?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/3732236066707762117/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=3732236066707762117&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3732236066707762117'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/3732236066707762117'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/07/blog-post.html' title='ओमर अब्दुल्ला की नाकामी बनी  देश की परेशानी'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TCxallllZII/AAAAAAAAAZc/kvrTotasD9w/s72-c/kasssm.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-7206413977702095014</id><published>2010-06-19T03:44:00.000-07:00</published><updated>2010-06-19T03:55:59.153-07:00</updated><title type='text'>नीतीश का सेकुलरिज्म या लालू का खौफ</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TByHXztknjI/AAAAAAAAAZM/s2rM5wA4fIA/s1600/nitis.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TByHXztknjI/AAAAAAAAAZM/s2rM5wA4fIA/s320/nitis.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;बिहार एक बार फ़िर चर्चा में है । चर्चा के कई कारण है . ६ महीने बाद वहा चुनाव होने वाले है लेकिन असली चर्चा का विषय सत्ता समीकरण को लेकर जोड़ -तोड़ है. नॅशनल मिडिया मे खबर के लिए कुछ लोग आदर्श है जिसमे नरेन्द्र भाई मोदी का नाम सबसे ऊपर है .सो राष्ट्रीय मिडिया मे प्राइम टाइम झटकने के लिए नीतीश ने नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाया है .कोशी&amp;nbsp; बाढ़ पीड़ित&amp;nbsp; सहायता राशि गुजरात को लौटकर नीतीश ने&amp;nbsp; अपने सेकुलर छवि पर बने दाग को लगभग धो लिया है .वह पैसा गुजरात के लोगों का था लेकिन नीतीश ने उसे मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को लौटा दिया है .वह पैसा कोशी के बाढ़ पीड़ितों के नाम था लेकिन वह कर्ज नीतीश जी ने खुद उतरा है .हो सकता है कि आने वाले समय मे गुजरात के लोग और लम्बा फेहरिस्त दे ,तो नीतीश जी पाई पाई चुकाने के लिए केंद्र से कुछ उधार भी लें .हो सकता है इस बहाने वे कांग्रेस के कुछ और करीब आयें .जहाँ तक मुझे याद है गुजरात से करोड़ों रूपये की राहत सामग्री बाढ़ पीड़ितों को लिए भेजी गयी थी .लेकिन सवाल इमेज का है सवाल वोट का है तो नीतीश जी अपने को सेकुलर मनवाने के लिए कुछ भी कर सकते है .हो सकता है कि अगर गुजरात से यह मांग तेज हुई कि अपने बिहारी मजदूर को वापस ले जाओ तो नीतीश जी एक क्षण भी गुजरात सरकार का यह एहसान नहीं लेंगे और तमाम मजदूरों को वापस बिहार ले आयेंगे .सवाल सेकुलर का है सवाल ईमान का है सो हो सकता है कि नीतीश अपने सरकार को भी दाव पर लगा दे .क्योंकि उन्हें पता है कि इस देश के सियासी दूकान मे&amp;nbsp; सेकुलारिजम सबसे ज्यादा बिकता है .&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TByascU4xLI/AAAAAAAAAZU/vxUs68Eb_zU/s1600/nittee.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="166" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TByascU4xLI/AAAAAAAAAZU/vxUs68Eb_zU/s200/nittee.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp; पिछले एक दशक से बीजेपी के साथ गलबहिया डाल कर नीतीश अपनी सियासी नैया को पार लगा रहे है .बिहार मे बीजेपी के साथ मिलकर सरकार चला रहे है .बिहार मे बीजेपी विधायकों की संख्या ५५ है लेकिन सरकार को वन मैन शो की तरह नीतीश चला रहे है .नीतीश को बीजेपी से परहेज नहीं है लेकिन उन्हें नरेन्द्र मोदी से परहेज है क्योंकि वे&amp;nbsp; लालू की राजनीती से आज भी डरते है, क्योंकि&amp;nbsp; वे कांग्रेस को एक बेहतर ओपसन मानते है&amp;nbsp; अगर ये पार्टियाँ मोदी को सांप्रदायिक कह रही है तो नीतीश को मोदी से परहेज करना ही होगा .बिहार मे लोग कहते है कि नीतीश को गुड से नहीं गुलगुले से परहेज है .लेकिन सवाल यह है कि जब भारत के एक संवैधानिक दायित्वा की जिम्मेदारी नरेन्द्र मोदी पर है देश के किसी अदालत ने उसे आज तक सांप्रदायिक करार नहीं दे&amp;nbsp; सकी है .चुनाव आयोग के सामने नरेन्द्र मोदी सेकुलर है तो क्या मोदी इसलिए कोमुनल है क्योंकि यह बात कांग्रेस कह रही है ,यह बात लालू यादव कह रहे है .याद कीजिये बिहार मे २० साल लालू ने बीजेपी का खौफ दिखाकर बिहार की व्यवस्था को रौंदा .आज भी वो अपने आप को सबसे बड़ा सेकुलर नेता बता रहे है लेकिन सवाल यह है कि फिर मुसलमानों ने उनका साथ क्यों छोड़ा ?.क्यों उनके २० साल के राज मे भागलपुर के दंगा पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया ?.क्यों बिहार के तमाम हस्तकरघा उद्योग ठप पड़ गए ?.राज्य मे १६ फिसद मुलमानो मे कितने लोग सत्ता और सरकारी नौकरियों मे अपनी जगह बना पाए ?.तो क्या यह नहीं माना जाय बीजेपी का भूत दिखाकर लालू ने मुसलमानों के साथ धोखा किया है&amp;nbsp; .&lt;br /&gt;&lt;div&gt;इंडिया टुडे के हालिया कानक्लेव मे बिहार को तक़रीबन हर मामले मे पिछड़ा राज्य घोषित किया गया था&amp;nbsp; । अग्रिम राज्यों की सूची मे हिमाचल ,दिल्ली से लेकर पंजाब ने लगभग सभी पुरस्कार झटक लिए&amp;nbsp; । बिहार और उत्तर प्रदेश का कोई नाम लेने वाला नही था । कह सकते है की आर्थिक प्रगति ने उत्तर और दक्षिण की खाई को बढ़ा दी है ।लेकिन बिहार में नीतीश के दौर मे एक भरोसा जगा है विकास की नयी सोच बनी है .ज़मीन पर विकास की परिकल्पना दिखने लगी है .मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विश्वास यात्रा के रथ पर सवार होकर पुरे बिहार का दौरा कर रहे है .जाहिर है उन्हें लोगों का समर्थन भी मिल रहा है .फिर क्या वजह है कि नीतीश लालू -पासवान से इतने भयाक्रांत है कि वे बात बात पर नरेन्द्र मोदी को कोस रहे है और अपने सेकुलर साबित करने के लिए नरेन्द्र मोदी को गुजरात&amp;nbsp; दंगे का दोषी करार दे रहे है .यानि जो फैसला&amp;nbsp; अभी तक देश की अदालत नहीं दे सका है वह फैसला नीतीश सुना रहे है .अगर नरेन्द्र मोदी सांप्रदायिक है तो पूरी बीजेपी सांप्रदायिक है फिर नीतीश को बीजेपी से क्यों परहेज नहीं है . अगर नीतीश सचमुच विकास पुरुष बनना चाहते है तो उन्हें नरेन्द्र मोदी से प्रेरणा लेने की जरूरत है लेकिन अगर नीतीश&amp;nbsp; मोदी से घृणा का स्वांग रच रहे है तो कहा जायेगा कि वे लोगों को धोखा दे रहे है .&lt;/div&gt;&lt;div&gt;आज&amp;nbsp; तरक्की के मामले मे अगर बिहार को तीन प्रमुख राज्यों की सूचि में रखा जाता है तो यह किसी बिहारी के लिए गर्व की बात हो सकती है । पिछले साल बिहार की यह आर्थिक प्रगति हरियाणा के करीब था यानि लगभग ११ फीसद । यह प्रगति औद्योगिग क्रांति की नही है ,यह प्रगति राज्य मे भारी पूजी निवेश की नही है ,यह प्रगति बिहारी कामगारों की बदौलत सम्भव हो सकी है । आज भी बिहार के हजारो गाँव मनिओर्देर इकोनोमी के बूते कामयावी की अलग तस्वीर पेश कर रहे है । वही गाँव जो कल तक कभी बाढ़ तो कभी सुखा के कारण जर्जर हालत मे थे वहां लोगों के चेहरे पर मुस्कान देखी जा सकती है । आज इन्ही गाँव के बच्चे सुपर ३० और सुपर ६० से कोचिंग लेकर आई आई टी मे अब्बल दर्जा पा रहे है । इन्ही गाँव के हजारो बच्चे दिल्ली ,उत्तर प्रदेश , दक्षिण के राज्यों मे माता पिता की मोटी रकम खर्च करके ऊँची शिक्षा हासिल&amp;nbsp; कर रहे है । कह सकते है कि बिहार के मध्यवर्गीय समाज ने देश की मुख्यधारा मे अपने बच्चो को शामिल करने के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर रखा है । अनपढ़ और कम पढ़े माता पिता को भी पता है कि पुरी दुनिया आज ग्लोबल विलेज का हिस्सा है जहा सिर्फ़ ज्ञान का चमत्कार का है ।सुपर ३० और ६० के चमत्कार को पूरी दुनिया ने सराहा है जहाँ दलित ,पिछड़े और गरीबों के बच्चे आई आई टी मे अब्बल आ रहे है .लेकिन आज भी यहाँ की राजनीती दलित -महादलित ,पिछड़ा -अति पिछड़ा ,सेकुलर -कोमुनल मे बाट कर बिहार को दुबारा उसी जातिवाद के दल दल मे धकेल रही है .&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&amp;nbsp;जातीय समीकरण के आधार खिसक रहे है लेकिन राजनीती इस जातीय समीकरण को जिन्दा रखने के लिए जदोजेहद कर रही है&amp;nbsp; । बिहार की चिंता बिहार से बाहर रहने वाले लोग ज्यादा कर रहे है । बिहारी कहलाने का अपमान पी कर भी निरंतर बिहार की सम्पनता में&amp;nbsp; अपनी भूमिका निभा रहे है . सियासत से उन्हें कोई लेना देना नही क्योंकि उन्हें जात से नही बिहार से प्यार है ।ओछी सियासत करने के वजाय नीतीश विकास के नाम पर ही अगर अपने विश्वास यात्रा को कायम रखें तो बिहार के लिए यह भी एक महान कार्य होगा .&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-7206413977702095014?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/7206413977702095014/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=7206413977702095014&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/7206413977702095014'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/7206413977702095014'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/06/blog-post_19.html' title='नीतीश का सेकुलरिज्म या लालू का खौफ'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TByHXztknjI/AAAAAAAAAZM/s2rM5wA4fIA/s72-c/nitis.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-7627495249195877150</id><published>2010-06-09T04:06:00.000-07:00</published><updated>2010-06-09T04:06:23.155-07:00</updated><title type='text'>क्यों याद आते हैं अटल बिहारी वाजपेयी</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TA9gBXgGj9I/AAAAAAAAAYs/i-U_BO7UuHI/s1600/vajpayee.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;/a&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TA9gBXgGj9I/AAAAAAAAAYs/i-U_BO7UuHI/s1600/vajpayee.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="200" src="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TA9gBXgGj9I/AAAAAAAAAYs/i-U_BO7UuHI/s200/vajpayee.jpg" width="134" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;२००३ के मई महीने मे&amp;nbsp; प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कश्मीर दौरा कई मायने मे खास था .रियासत के विधान सभा चुनाव के बाद वहां नयी सरकार आई थी .लम्बे वक्त के बाद लोगों मे लोकतंत्र के प्रति भरोसा जगा था .जम्मू कश्मीर के इतिहास मे वह पहला चुनाव था जिसमे धांधली के कोई आरोप नहीं लगे थे .वाजपेयी ने जैसा कहा वैसा ही फ्री एंड फेयर चुनाव की बात को साबित किया .जाहिर है १९८७ के बाद अटल जी पहले प्रधान मंत्री थे जिन्होंने कश्मीर के आवाम के साथ सीधा मुखातिव हुए .यह कोई नहीं जान रहा था कि इस आवामी सभा को संवोधन करते हुए&amp;nbsp; वाजपेयी क्या ऐलान करेंगे .उन्होंने गुलाम एहमद महजूर का मशहूर शेर पढ़ा "बहारे फिर से आयेंगी .... और लोगों को दिल जीत लिया .कश्मीर से ही&amp;nbsp; उन्होंने पाकिस्तान की तरफ दोस्ती का हाथ आगे बढा कर हर को सकते मे डाल दिया था .पाकिस्तानी सद्र परवेज़ मुशर्रफ़ के भारत विरोधी अभियान की काट मे वाजपेयी के इस नए प्रस्ताव ने सबको चौका दिया था .वाजपेयी के साथ गए उनके सलाहकार भी प्रधान मंत्री के ऐलान से अचंभित थे .लेकिन लोगों के&amp;nbsp; प्रधानमंत्री ने ये तमाम फैसले लोगों के बीच करना उचित समझा था ..वाजपेयी को किसी ने पूछा हुर्रियत के लोग संविधान के दायरे मे बात नहीं करेंगे ,उन्होंने कहा था वे संविधान के दायरे मे नहीं तो दिल के दायरे मे तो बात कर ही सकते है .१७ साल के बाद वादी के अलगाववादी जमात ,हुर्रियत कांफ्रेंस वाजपेयी से बात करने दिल्ली आयी&amp;nbsp; थी&amp;nbsp; .यह वाजपेयी का चमत्कार था कि भारत पाकिस्तान के रिश्तो पर जमी बर्फ पिघली तो कश्मीर मे लोगों को भारत को लेकर एक उमीद बनी .उस दौरे पर २४००० करोड़ रूपये का आर्थिक पकेज का ऐलान वाजपेयी ने भी किया था ,कश्मीर मे ट्रेन की कवायद तेज करने की पहल उन्होंने ही की थी लेकिन वे जानते थे कि ये तमाम पॅकेज बेकार है जब तक यहाँ राजनितिक पॅकेज नहीं दिए जायेंगे .हुर्रियत लीडर मौलाना मौलाना&amp;nbsp; अब्बास अंसारी ने एक बार मुझे बताया था कि वाजपेयी का राजनीती से सन्यास उनलोगों के लिए सबसे बड़ा हादसा था .हुर्रियत के लीडर मानते है कि अगर वाजपेयी होते तो यह मसला अब तक ख़तम हो गया होता .यही बात पाकिस्तान से लौटे एक पत्रकार ने मुझे बताया था कि "पाकिस्तान मे आप जहाँ भी जाय अगर लोग ये जान गए कि आप भारत से है तो पहला सवाल वाजपेयी के लिए पूछेंगे .लोग पूछते है क्या वाजपेयी दुवारा नहीं आयेंगे"&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TA90ITp4rtI/AAAAAAAAAY8/n2Wa7hIypTw/s1600/manmoh.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="133" src="http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TA90ITp4rtI/AAAAAAAAAY8/n2Wa7hIypTw/s200/manmoh.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&amp;nbsp;&amp;nbsp; लोगों की ये तड़प अटल जी के लिए क्यों&amp;nbsp; है तो उसकी वजह जानी जा सकती है .मौजूदा प्रधानमंत्री डा.मनमोहन सिंह के कश्मीर के हालिया दौरे को लेकर यहाँ के लोगों मे भारी उम्मीदे थी .लोग प्रधानमंत्री के आर्थिक पॅकेज के लिए व्याकुल नहीं थे उन्हें यह लग रहा था कि बेलगाम अलगाववाद को नियंत्रित करने के लिए प्रधानमंत्री कुछ ऐलान करेंगे .कश्मीर मे बंद हड़ताल से अस्त व्यस्त जिन्दगी को उनके महज एक सियासी ऐलान से लोगों को काफी राहत मिल सकती थी .लेकिन प्रधान मंत्री बंद ऑडिटोरियम मे हजार करोड़ पॅकेज के ऐलान मे मशगुल रहे तो बांकी समय कश्मीरी आई ऐ एस टौपर शाह फैसल का गुणगान करते नज़र आये .प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला के पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेसन देखकर इतने गद गद थे कि उन्हें होनहार और लायक मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला मे जम्मू कश्मीर का भविष्य सुरक्षित नज़र आया .लेकिन सवाल यह उठता है कि जो प्रधान मंत्री शायद ही किसी राज्य का दौरा करते है .साल मे वे जितनी बार विदेशों का दौरा करते है उसका अगर एक फिसद मौका किसी राज्य को दे तो लोग धन्य हो जाय .ऐसे ओमर अब्दुल्ला के पॉवर पॉइंट प्रेजेटेसन को देखने कश्मीर जाने की क्या जरूरत थी .यह काम प्रधानमंत्री अपने ऑफिस मे भी कर सकते थे .देश के गृह मंत्री नक्सल समस्या से निपटने के नाम पर यह कह कर पल्ला झाड लेते है कि उन्हें इसके लिए मैंडेट नहीं मिला हुआ है तो क्या हमारे प्रधानमंत्री को किसी सियासी फैसले लेने के लिए मैंडेट नहीं मिला हुआ है ?यह एक बड़ा सवाल है .&lt;br /&gt;रियासत के विकास के लिए ६७ परियोजना पर काम चल रहे है जिस पर ४६&amp;nbsp; हजार करोड़ रूपये खर्च किए जा रहे हैं । श्रीनगर के मुनिसिपल से लेकर डललेक की सफाई पर करोडो रूपये खर्च किए जा रहे है । लेकिन कश्मीर में जब देश के प्रधानमंत्री का दौरा होता है तो लोग हड़ताल पर होते है , बाज़ार बंद होते हैं , गलियां वीरान पड़ी होती है । प्रधानमंत्री का स्वागत कुछ इस तरह होता है कि अगर हिफाजत में थोडी सी ढील दी जाय तो उत्साही नौजवान प्रधानमंत्री के सामने आकर कश्मीर बनेगा पाकिस्तान का नारा लगा सकते&amp;nbsp; है । आप इसे कामयाबी माने या नाकामयाबी प्रधानमंत्री का कश्मीर दौरे के समय पुरे कश्मीर में कर्फु जैसा माहोल होता है&amp;nbsp; ।&lt;br /&gt;पिछले पाँच वर्षों में भारत सरकार का ६०&amp;nbsp; हजार करोड़ से ज्यादा खर्च शायद इस भ्रम में किया गया की विकास की रफ़्तार के सामने में अलगाववाद की आवाज धीमी पड़ जायेगी । लेकिन ऐसा नही हुआ । पैसे की बौछार से कश्मीर में रियल स्टेट में बूम है । कस्बाई इलाके में भी शोपिंग मौल खुल गए हैं । लेकिन जब भारत और पाकिस्तान का मामला सामने आता है तो वादी में जीवे जीवे पाकिस्तान की आवाज सबसे ज्यादा गूंजती है.... । क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश कि क्या पैसा कश्मीर मसले का समाधान है ? हमें यह याद रखना चाहिए कि बिहार में आज २० लाख से ज्यादा लोग कोसी की बाढ़ के कारण&amp;nbsp; घर से बेघर है । इसका समाधान महज २०० -४०० करोड़ रूपये खर्च करके ढूंढा जा सकता था . कोसी पर बाँध और बराज बनाने से मिथिलांचल में विकास की रफ्तार तेज की जा सकती है ,लेकिन ऐसा नही हो रहा है ।&lt;br /&gt;कश्मीर की इन राजनितिक पेचदीगियो पर राज्य के वर्तमान राज्यपाल एन एन वोहरा पिछले १० वर्षों नज़र रखे हुए है लेकिन कामयाबी के नाम पर उन्होंने जम्मू कश्मीर की मौजूदा सूरते हाल को देश को तोहफे के तौर पर दिया है । यही हाल कमोवेश पीएमओ और गृहमंत्रालय की भी है और देश के प्रधानमंत्री एक बार फिर पैसे का बौछार करके खाली हाथ वापस दिल्ली लौट आता है ।&lt;br /&gt;कश्मीर का अलगाववाद मजहब के वजूद पर खड़ा है । हुर्रियत लीडर सैयेद अली शाह गिलानी का अपना तर्क है , मुसलमान होने के नाते कश्मीर सिर्फ़ पाकिस्तान का ही अंग हो सकता है । गिलानी की इस दलील को थोड़ा संशोधन करके ओमर फारूक और यासीन मालिक कश्मीर की आजादी की मांग करते है । यानि हिंदुस्तान से पैसा आ रहा है उन्हें कोई परहेज नहीं है लेकिन कश्मीर में हिंदुस्तान की सियासत नहीं चलनी चाहिए । कश्मीर में भारत की सियासत भी अजीब है , नेहरू जी के लिए कश्मीर का मतलब सिर्फ़ शेख अबुल्लाह से था , शेख साहब ने कहा हमें धारा ३७० चाहिए ,नेहरू जी ने कहा तथास्तु । शेख साहब की जिद थी कि पाकिस्तान कब्जे वाला कश्मीर पाकिस्तान के पास ही रहे , नेहरू जी ने कभी उस कश्मीर का दुबारा नाम नही लिया । शेख अब्दुलाह के बाद फारूक अब्दुल्लाह सामने आए । केन्द्र की सरकार जोड़ तोड़ करके फारूक को सिंहासन सौपती रही । फारूक से जी भरा तो मुफ्ती साहब सामने आए ।&amp;nbsp; उनकी बेटी पाकिस्तान के सद्र के इस बयान की आलोचना करती है की जरदारी साहब ने कश्मीर में सक्रिय आतंकवादियों को दहशतगर्द कहा था । महबूबा के लिए भी ये दहशतगर्द नही है ये जेहादी नहीं हैं । ये स्वतंत्रता सेनानी है । महबूबा&amp;nbsp; जम्मू कश्मीर में अगले मुख्या मंत्री के दावेदार हैं । सोनिया जी और प्रधानमंत्री के साथ उनके बेहतर&amp;nbsp; रिश्ते है .लेकिन भारत विरोधी अभियान छेड़ कर महबूबा कश्मीर मे अपनी सियासी पकड़ और मजबूत करना चाहती है . तो फ़िर कश्मीर की आजादी मांगने वालों के बीच से क्यों न मुख्यमंत्री का दावेदार ढूंढा जाय । पुराने चेहरे को सामने लाकर कश्मीरियों को चिढाने के वजाय क्या यह जरूरी नहीं है कि नए चेहरे को सामने लाया जाय । याद रहे कश्मीर में अलगावाद का जनक माने जाने वाले गिलानी साहब तीन बार एम् एल ऐ रह चुके है । हिजबुल मुजाहिद्दीन के सरबरा सलाहुद्दीन असेम्बली के चुनाव लड़ चुके हैं । ये अलग बात है कि फारूक अब्दुल्लाह के कारण&amp;nbsp; उसे एम् एल ऐ नहीं बनने दिया गया । आज जरुरत है सियासी पहल की , पैकेज को भूल कर हमें एक सर्वमान्य&amp;nbsp; लीडर खोजने होंगे जिसका कश्मीर के आम लोगों में पहुच हो । हमें इस गलती को भी सुधारने होंगे कि कश्मीर का मतलब सिर्फ़ वादी नहीं है , जम्मू का अपना अस्तित्वा है लदाख में भी लोग रहते है जो विशुद्ध भारतीय हैं । लेकिन केन्द्र सरकार कि ग़लत राजनीतिक फैसले ने कश्मीरी पंडित को सियासी धारा से अलग कर दिया , कश्मीर के गुर्ज्जर ,जम्मू की बड़ी आवादी , लदाख और कारगिल के लोग इस धारा से&amp;nbsp; काट दिए गए । यही वजह है की महज २० फीसद सुन्नी मुसलमान&amp;nbsp; की आवाज न केवल सियासी धारा को अपने साथ ले गई बल्कि भारत से आने वाले पैसे का भी जमकर लुत्फ़ उठाया है&amp;nbsp; ।ये बदला हुआ कश्मीर है जहाँ सबसे बड़ा जेहादी सैयेद शालाहुदीन ६३ साल की उम्र मे अपने एक आतंकवादी कमांडर की विधवा से शादी रचा रहा है .हिंसा का दौर लगभग ख़तम हो चूका है .नौजवान एक बेहतर जिन्दगी जीने के लिये जदोजेहद कर रहा है और कामयाब भी हो रहा है .पाकिस्तान लोगों के दिलो दिमाग से बाहर है .ऐसे मौके पर देश के प्रधानमंत्री की एक छोटी सियासी पहल कश्मीर मे बाहर फिर से लौटा सकती है .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-7627495249195877150?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/7627495249195877150/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=7627495249195877150&amp;isPopup=true' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/7627495249195877150'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/7627495249195877150'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/06/blog-post.html' title='क्यों याद आते हैं अटल बिहारी वाजपेयी'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TA9gBXgGj9I/AAAAAAAAAYs/i-U_BO7UuHI/s72-c/vajpayee.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-4271606577654558789</id><published>2010-05-29T04:22:00.000-07:00</published><updated>2010-05-29T04:22:20.365-07:00</updated><title type='text'>ममता दीदी और माओवादी दादा की सियासत मे फसी सरकार</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TADX6JfxdRI/AAAAAAAAAYc/RtV3-coGblI/s1600/train.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="240" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TADX6JfxdRI/AAAAAAAAAYc/RtV3-coGblI/s320/train.jpg" width="320" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;पश्चिम बंगाल के मिदनापुर इलाके मे इस बार मओवादियो के निशाने पर मुंबई -हावरा एक्सप्रेस ट्रेन आई .जिसके चपेट मे १०० से ज्यादा लोग बे मौत मारे गए .पश्चिम बंगाल पुलिस का दाबा है की नक्सली समर्थित पी सी पी ऐ यानि पीपुल्स कमिटी अगेंस्ट पुलिस अट्रोसिटी के दस्ते का यह कुकृत्य है .यानी वह वही कमिटी है जिसने मिदनापुर के तीन जिलों मे ममता बनर्जी का आधार मजबूत किया है .माता दीदी की ट्रेन निशाने पर है लेकिन मारे जा रहे है आम लोग .भला दीदी के सेहत पर क्या फर्क पड़ता है ?.लेकिन पश्चिम बंगाल के मुनिसिपल चुनाव ने ममता दीदी की मुश्किलें बढा दी है .सो ममता कह रही है कि कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है यानि इस हादसे की जिम्मेदारी राज्य सरकार को लेनी चाहिए .जब की राज्य सरकार सारा दोष ममता के सर डाल रही है और नाक्साली चुप चाप तमाशा देख रहे है .राजधानी एक्सप्रेस से लेकर कई गाड़िया मिदनापुर इलाके मे नक्सालियों के सोफ्ट टार्गेट बने है लेकिन हर बार ममता दीदी ख़ामोशी ही बरती है .तो क्या नक्सलियों ने अपनी रणनीति मे परिवर्तन लाया है .क्या बड़े हमले करके नक्सली राष्ट्रीय स्तर पर इसकी धमक बनाना चाहते है .लेकिन सरकार खामोश है .बीजेपी कह रही है कि नक्सली राष्ट्रीय समस्या है लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री कह रहे है कि उन्हें नक्सलियों के खिलाफ अभियान छेड़ने के लिए मैंडेट नहीं मिला हुआ है .ये मैंडेट वे किससे मांग रहे है यह एक बड़ा रहस्य है .हालत यह है कि दंतेबाड़ा मे नक्सली हमले मे&amp;nbsp; सी आर पी ऍफ़ के ७६ जवानों की मौत से आह़त गृह मंत्री चिदंबरम ने कहा था कि बक स्टॉप विथ मी यानि बड़ा दिल दिखाते हुए इस नाकामयाबी कि जिम्मेदारी खुद पर ली थी लेकिन ठीक एक हफ्ते के बाद उसी दंतेबाड़ा मे नाक्साली हमले मे मारे गए ५६ एस पी ओ और आम आदमी को लेकर गृह मंत्री ने जम कर राज्य सरकार की खिचाई की .आखिर एक ही हप्ते मे&amp;nbsp; क्यों बदल गए है गृह मंत्री ?यह उनकी राजनितिक मजबूरी है या फिर आलाकमान का दवाब .आज अगर नक्सल समस्या को लेकर कांग्रस नेता द्विगविजय सिंह अगर चिदम्बरम को नशिहत दे रहे है तो समझा जा सकता है कि कहानी मे दर्द कहाँ है ?&lt;br /&gt;पिछले वर्षो मे नक्सली हमले का जायजा ले तो हर साल नक्सली तक़रीबन १५०० वारदातों को अंजाम दे रहा है जिसमे ७००-८०० के करीब आम आदमी मारे जा रहे है .इस साल के आंकड़े पर गौर करे तो तक़रीबन ५ से ७ लोग हर दिन नक्सली हमलों के शिकार हो रहे है .लेकिन सरकार की ओर से राजनीती का सिलसिला जारी है .नक्सल समस्या को जानने की कोशिशे जारी है .नक्सल के खिलाफ किस तरह का ऑपरेशन हो और इसकी जिम्मेदारी कौन ले ,इसपर भी बहस जारी है .यह बहस प्रधान मंत्री के कार्यालय से लेकर क्लबो और फैव स्टार होटलों मे चलाये जा रहे है लेकिन ठोस पहल अभी कोसो दूर है .यानी जिस तरह पिछले वर्षों मे कश्मीर की आतंकवादी समस्या को लेकर कई दूकाने खुली ठीक उसी तरह नक्सल समस्या को लेकर दुकाने सजाई जा रही है .आईडिया बेचने के लिए हर के पास कुछ न कुछ जरूर है .&lt;br /&gt;लेकिन इन तमाम बहस को पीछे छोड़ते हुए एक कुशल युद्ध विशेज्ञ की तरह नक्सली न केवल अपना आधार मजबूत कर रहा है बल्कि सरकार को हर मोर्चे पर शिकस्त दे रहा है .यानी बड़ी ही चतुराई से नक्सली इस जंग मे केंद्र सरकार को चुनौती दे रहा है और नोर्थ ब्लोक मे बैठे कमांडर इन चीफ बचाव की मुद्रा मे कोई न कोई बहाना ढूंढ़ रहा है .अगर आप नक्सलियों का कश्मीर के आतंकवादियों के साथ तुलना करे तो नक्सली कई मामले मे उनसे २० है .यानी सुरक्षावालों&amp;nbsp;  के खिलाफ कारवाई मे नक्सली को&amp;nbsp; कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ रहा है .अगर नुकसान की तुलना करे तो १० जवानों की मौत के बदले नक्सली अपने एक या दो कैडर खोता है .जबकि हर नक्सली हमले के बाद सुरक्षावालों को अपना कैम्प बदलने या बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ता है .कश्मीर मे आज आतंकवादी और सुरक्षवालो के बीच मौत का अंतर १:३३ है जबकि नक्सल प्रभवित राज्यों मे यह आंकड़ा १०:१ है .लेकिन सरकार के सामने कोई रणनीति नहीं है .खास बात यह है कि वोट की सियासत नक्सलियों को और मजबूत कर रही है .पश्चिम बंगाल इसका सबसे बड़ा उदाहरण है .&lt;br /&gt;&lt;div&gt; ये ममता दीदी का मिदनापुर&amp;nbsp; है या माओवादी दादा का ठीक ठीक कहना थोड़ा मुश्किल है लेकिन यह दावे के साथ कहा जा सकता है &lt;span class=""&gt;कि &lt;/span&gt;यह अव्यवस्था का लालगढ़ है । बस्तर के बाद यह नक्सालियों का सबसे बड़ा लिबरेटेड &lt;span class=""&gt;जोन &lt;/span&gt;बना और सरकार को मजबूरन करवाई करनी पड़ी । ३० साल के वामपंथी सरकार की अव्यवस्था का जीता जगता सबूत है लालगढ़ । पिछलेसाल&amp;nbsp; से नक्सली बुद्धदेव सरकार को खुली चुनौती दे रहे है&amp;nbsp; । लालगढ़ में नाक्साली रैली &lt;span class=""&gt;निकाल &lt;/span&gt;रहे थे प्रेस कांफ्रेंस कर रहे थे और राज्य सरकार चुपa चाप तमाशा देख&amp;nbsp; रही थी तो &lt;span class=""&gt;माना &lt;/span&gt;जा सकता है कि सरकार ने नक्सालियों के आगे हथियार &lt;span class=""&gt;डाल &lt;/span&gt;दिया था । या यु कहे कि ममता की खौफ ने वाम सरकार के हाथ पैर बाँध दिए थे । वाम पंथी सरकार चाह रही थी कि केन्द्र करवाई करे और राज्य सरकार तमाशा देखे । कम्युनिस्ट पार्टी  का आरोप है कि ममता ने माओवादी से मिलकर राज्य सरकार के ख़िलाफ़ साजिश रची है ,लेकिन सवाल यह है क्या ममता का पश्चिम बंगाल मे इतना असर है &lt;span class=""&gt;कि &lt;/span&gt;१००० से ज्यादा गाँव ,कई जिले वाम सरकार से नाता तोड़कर नक्सालियों के शरण में चले गए । अगर वाकई ऐसी हालत है तो सरकार को इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि सरकार से लोगों का भरोसा उठ गया है । &lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TADYFrZQTFI/AAAAAAAAAYk/bT3KKWD1gbw/s1600/mamta.jpg" imageanchor="1" style="clear: right; float: right; margin-bottom: 1em; margin-left: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="170" src="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TADYFrZQTFI/AAAAAAAAAYk/bT3KKWD1gbw/s200/mamta.jpg" width="200" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;३० साल के वामपंथी शासन&amp;nbsp; की कामयाबी &lt;span class=""&gt;के &lt;/span&gt;रहस्यों से मिदनापुर&amp;nbsp; ने परदा उठा दिया है । यानि लोगों ने बुद्धदेव सरकार के फ्रेंचैजे पॉलिसी को नकार दिया है । और इस फैसले में लोगों का साथ दिया है नक्सालियों ने । नरेगा में किस आदमी को काम मिलेगा ,किसको पैसे मिलेंगे किसे घर &lt;span class=""&gt;मिलेगा,&lt;/span&gt; किसे राशन कार्ड मिलेंगे किसे नही ये वहां सरकारी कर्मचारी तय नही करते है&amp;nbsp; बल्कि ये फ़ैसला वाम दल के कार्यकर्त्ता लेते है । नदीग्राम से लेकर लालगढ़ तक लोगों के गुस्से को ममता ने हवा दी तो नक्सालियों ने ममता की झोली में वोट डाल कर अपने लिए दूसरा लिबरेटेड ज़ोन बना लिया । यह सियासी लेन देन का सौदा है ।आज ममता दीदी के ट्रेन को निशाना बनाकर नक्सली अपना दाम मांग रहे है .यानी मुफ्त की मलाई नक्सली ममता दीदी को किसी भी सूरत मे खाने नहीं देंगे .लेकिन खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है .&lt;/div&gt;&lt;div&gt;नाक्साल्बाड़ी में अपनी हार से आह़त मओवादिओं को ३० साल बाद बंगाल में अपना आधार मजबूत करने का मौका मिला है । माओवादी की विचारधारा आज भी वही है जो ३० साल पहले&amp;nbsp; चारू मजुमदार ने दिया था । लेकिन वाम दल भले ही ऑफिस में लेनिन और माओ की तस्वीर लगाते हों लेकिन व्यवहार में उनका रबैया किसी सामंती से कम नही है । सत्ता और सरकार पाने और बनाये रखने के लिए वामपंथी सरकार ने बंगाल से लेकर केरल तक जो हथकंडे अपनाए वही प्रयोग आज दूसरी जमात भी दुहरा रही है । &lt;/div&gt;&lt;div&gt;३२ साल पहले नक्सली&amp;nbsp; सामंती विरोध का नारा देकर अपने लिए सत्ता पाने का आसन तरीका खोजा था । बन्दूक से सत्ता पाने का यह तरीका लोगों ने पसंद नही किया और नक्सली&amp;nbsp; आन्दोलन की भ्रूण हत्या हो गई । लेकिन इस दौर में भ्रष्टाचार और&amp;nbsp; ,सरकारों की ऑर से आम आदमी की लगातार उपेक्षा ने नक्सालियों को फिनिक्स बना दिया है । देश के नक्सली प्रभावित ८० जिलो मे शिशु मृत्यु दर ५० फिसद से ज्यादा है .हस्पतालों का वहा कोई नामोनिशान नहीं है .इन जिलों के तकरीबन २०००० गाँव मे आज भी न कोई स्कूल है न ही कोई पक्का माकन .सड़कों का तो इन इलाकों मे नमो निशान नहीं है .इंडिया शायनिंग का यह बदसूरत चेहरा कई संस्थाओं ने दिखाया है लेकिन हर बार सरकार बड़ी बड़ी योजनाओं की बात करके मूल समस्या से मूह मोड़ लेती है .केंद्र सरकार कहती है कि ग्रामीण इलाके के विकास के लिए भरपूर फंड दिए जा रहे है लेकिन पैसा कहाँ जाता है यह उन्हें नहीं पता है .देश मे गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को सस्ते दर पर अनाज उपलब्ध कराने की बात की जा रही है लेकिन राशन कार्ड इन गरीबों के बदले उन्हें मिले हुए है जो आर्थिक रूप से संपन्न है .एक शर्वे के मुताबिक ४० फिसद से ज्यादा रासन कार्ड फर्जी है .उत्तर प्रदेश मे सार्वजनिक वितरण प्रणाली मे हुए करोडो रूपये के घोटाले का क्या हुआ यह अब तक रस्य बना हुआ है .लेकिन सरकारी महकमा यह दलील देता है इन पिछड़े इलाके मे नक्सली काम होने नहीं देते या फिर हर प्रोजेक्ट मे अपना हिस्सा मांगते है अगर बहती गंगा मे नक्सली अपना हाथ धो रहे है तो इसके कौन जिम्मेदार है यह सवाल पूछा जा सकता है .यानी भ्रष्टाचार के आकंठ मे डूबा यह देश आज अगर नक्सली हमलों से कराह रहा है तो इसका जिम्मेवार सिर्फ इस देश की राजनीती है&lt;br /&gt;इस देश की गरीबी ने&amp;nbsp; नक्सलियों को ऐसी उर्बरा ज़मीन दी है कि आज जिन इलाके मे जहाँ सबसे ज्यादा गरीबी है नक्सलियों को वहां उतना ही ज्यादा दवदबा है&amp;nbsp; .नक्सली इस बात को अच्छी तरह जानते है कि नेपाल और भारत मे काफी अंतर है वो यह भी जानते है कि नेपाल मे आर्म्स रेवोलुसन के जरिये सत्ता पाना नेपाली माओवादियों के लिए आसन था ,भारत मे यह प्रयोग कभी संभव नहीं है .यही वजह है कि नक्सलियों ने बातचीत से लेकर चुनाव के प्रक्रिया मे शामिल होने की हर पेशकश को ठुकराया है .उसे यह भी पता है इस देश मे वोट और सत्ता के भूखे नेता उसका कभी कुछ बिगाड नहीं सकते .ममता दीदी को पश्चिम बंगाल मे सत्ता चाहिए तो उन्हें हर हाल मे नक्सलियों का बचाव करना होगा .छतीसगढ़ से लेकर झारखण्ड मे कांग्रेस को अपना आधार बढ़ाना है तो इन राज्यों के कोंग्रेसी नेता को नक्सल के खिलाफ अभियान को रोकने होंगे .बिहार मे अगले साल चुनाव है तो नितीश जी गृह मंत्री को ज्यादा न बोलने की नशिहत दे रहे है .लेकिन सबसे बड़ा हादसा यह है कि नक्सल के खिलाफ अभियान के मजबूत कप्तान और&amp;nbsp; गृह मंत्री चिदम्बरम खामोश हो गए है .&lt;br /&gt;&amp;nbsp;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-4271606577654558789?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/4271606577654558789/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=4271606577654558789&amp;isPopup=true' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/4271606577654558789'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/4271606577654558789'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/05/blog-post_29.html' title='ममता दीदी और माओवादी दादा की सियासत मे फसी सरकार'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/TADX6JfxdRI/AAAAAAAAAYc/RtV3-coGblI/s72-c/train.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-1928938510360812506</id><published>2010-05-15T03:41:00.000-07:00</published><updated>2010-05-15T03:41:22.526-07:00</updated><title type='text'>इन जातिवादी नेताओं से नक्सली क्या बुरे हैं</title><content type='html'>&lt;div style="text-align: left;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S-5hPr6uGBI/AAAAAAAAAYE/dcpbqWqERw0/s1600/resevation.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S-5hPr6uGBI/AAAAAAAAAYE/dcpbqWqERw0/s320/resevation.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;देश में नक्सली हमलों का कहर जारी है .लेकिन सरकार यह तय नहीं कर पायी है कि नक्सली देश के दुश्मन है या दोस्त .देश के प्रधान मंत्री कहते है कि नक्सली आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है .लेकिन गृह मंत्री नक्सली के खिलाफ असफल अभियान छेड़ने के&amp;nbsp; वाबजूद यह कहने से कतराते है कि नक्सली देश का दुश्मन है .यानी यह तय करने में असमर्थ है कि इस मुल्क का, इस मुल्क के प्रगति का कौन दुश्मन है कौन दोस्त? .नक्सली बन्दूक के जोर पर व्यवस्था परिवर्तन की बात करते है .यानी देश के पिछड़े लोगों को ढाल बनाकर वो शासन पर कब्ज़ा करने की कोशिश मे लगे है .कही उनके समर्थन मे तो कही उनके विरोध में राजनीती का माहोल भी गर्म है .यानी ये बयान राजनीति में नफा नुकसान के आधार पर दिया जा रहा है .लेकिन जो लोग&amp;nbsp; सत्ता पर अपनी प्रभुसत्ता बनाये रखने के लिए देश को टुकड़े टुकड़े मे बाटने की कोशिश में लगे है वे हमारे राज&amp;nbsp; नेता के रूप मे स्थापित है .और हम यह पहचानने मे आज भी धोखा खा रहे है कि ये इस देश की प्रगति के दोस्त है या दुश्मन .यानी दुश्मन को पहचानने मे सरकार भी धोखा खा रही है और हम भी .&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S-5mhOq7izI/AAAAAAAAAYM/5DZOo-bzt68/s1600/laloo.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" height="320" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S-5mhOq7izI/AAAAAAAAAYM/5DZOo-bzt68/s320/laloo.jpg" width="218" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;बाबा भीमराव आंबेडकर ने कहा था मुझे यह बात समझ मे नहीं आती कि हजारों जातियों -उपजातियों मे बटा समाज एक देश का स्वरुप कैसे&amp;nbsp; ले सकता है ? जाति तोड़ने उसे हतोत्साहित करने का काम सबसे ज्यादा काम बाबा भीमराव आंबेडकर और लोहिया जी जैसे नेताओं ने ही किया था .लेकिन जातिवादी नेताओं ने अपनी सियासत मे सबसे ज्यादा इस्तेमाल इन्ही लोगों को किया है .जातिवाद के आधार पर सत्ता पाने वाले लोगों ने कभी लोहिया जी को तो कभी आंबेडकर की&amp;nbsp; दुहाई देकर सत्ता जरूर हथिया लिया .लेकिन उसका हस्र समाज ने करीब से देखा .विकास के नाम पर आज उत्तर प्रदेश और बिहार का स्थान सबसे नीचे है तो सबसे ज्यादा सामाजिक विद्वेश्ता इन्ही राज्यों मे है .यानी ये राज्य आज भी विभिन्न जातियों का एक समूह है जहाँ कुछ लोग आरक्षण के नाम पर मलाय खा रहे है तो कुछ लोगों को फाके का सामना करना पड़ रहा है .यानि आरक्षण और सामाजिक समता के प्रयोग को ये राज्य आयना दिखा रहे है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;लोहिया जी के चेलों ने अपनी सियासी जमीन खिसकती देखकर पिछले दिनों संसद मे जनगणना मे जाति की गणना की जोरदार मांग की तो सरकार यह तय नहीं कर पायी कि यह फैसला देश हित मे है या यादव बंधुओ के हित मे .जनगणना मे जाति का समवेश के फैसले ने&amp;nbsp; जातिवादी नेताओं को गद गद कर दिया है .यानि ये नेता घडी को उलटी दिशा मे घुमाने मे काफी हद तक कामयाब होते हुए दिख रहे है .यानी मंडल के बाद मलाई पर अपना कब्ज़ा बरक़रार रखने का फ़ॉर्मूला इन्होने ढूंढ़ लिया है .सवाल यह उठता है कि १९३१ मे जनगणना मे जाति को शामिल करने का विरोध तत्कालीन सेन्सस कमिश्नर जे एच हन्त्तन ने क्यों किया था ?उन्होंने बताया था कि सुविधा लेने के नाम पर हर जगह लोग&amp;nbsp; अपनी फर्जी जाति लिखवायेंगे .अगर सुविधा हडपने का इस देश मे एक ही कामयाब फ़ॉर्मूला जाति है तो निश्चित रूप से इस मौके को पाना हरकी चाहत होगी और अगर इस बार के जनगणना मे जाति का कलम जोड़ा गया तो ७० फिसद से ज्यादा लोग अपने को पिछड़ी जाति बताएँगे और आरक्षण मे अपनी हक की मांग एकबार फिर जोरदार तरीके से करेंगे. &lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;.जाति के नाम पर सत्ता हडपने वाले लालू जी ,मुलायम प्रसाद जी ,मायावती जी पर आज भी करोड़ों रूपये के नाजायज़ सम्पति इकठा करने के केस दर्ज है लेकिन फिर भी वे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए है .सामाजिक रूप से रामविलास पासवान जैसे दर्जनों नेताओ ने अपने को अग्रिम पंक्ति मे ला खड़ा किया है लेकिन आरक्षण की मलाई को हड़पने के लिए वे आज भी सबसे आगे है .यानी सत्ता और मलाय की राजनीति ने संविधान की धज्जिया उड़ा दी है .लेकिन हम फिर महान लोकतंत्र का गुणगान कर रहे है .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;सामाजिक समानता लाने के लिए आंबेडकर ने संविधान मे महज दस साल के लिए आरक्षण की व्यवस्था की थी .लेकिन आज़ादी के&amp;nbsp; साठ साल बाद भी आरक्षण की मियाद बढ़ाने के लिए संशोधन&amp;nbsp; की प्रक्रिया जारी है .कभी यह भी नहीं पूछा गया कि जिनके तीन पुश्ते आरक्षण की मलाई खा रहे है और उच्च प्रशासनिक पदों से लेकर सरकार मे ख़ानदान दर ख़ानदान बने हुए है क्या उन्हें आज भी सामजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ा कहा जायेगा .अगर यह आरक्षण सिर्फ इन्ही चंद मुठी भर लोगों के लिए है तो यह व्यवस्था समाज के अंतिम व्यक्ति के साथ गद्दारी कर रही है .&lt;/div&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S-5xkegjG0I/AAAAAAAAAYU/R699ZUUf1rA/s1600/super+30.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S-5xkegjG0I/AAAAAAAAAYU/R699ZUUf1rA/s320/super+30.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;जनगणना मे जाति की वकालत करने वाले नेता&amp;nbsp; पटना के सुपर ३० से कुछ सबक जरूर ले सकते है .बिहार जैसे पिछड़े राज्यों मे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े परिवार के बच्चों को यह संस्था मुफ्त मे आई आई टी की कोचिंग प्रदान करती है और हर साल इसके बच्चे आई आई टी अब्बल दर्जे के साथ चुने जाते है .ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले बच्चों से उनकी जात नहीं पूछी जाति है बल्कि उनका आर्थिक परिवेश को सामने रखा जाता है और उन्हें देश की मुख्यधारा मे शामिल करवाया जाता है .ऐसा ही प्रयोग कभी इनफ़ोसिस के नारायणमूर्ति ने किया था&amp;nbsp; और पिछड़े -दलित परिवार के बच्चों को आई टी की कुशल ट्रेनिंग देकर उन्हें मुख्यधारा मे शामिल करने की पहल की थी .लेकिन जात की सियासत पर अपने ख़ानदान चलाने वाले लोगों को सिर्फ आरक्षण से मतलब है ताकि आरक्षण की मलाई का लाभ उनके ख़ानदान दर ख़ानदान को मिलता रहे .&lt;/div&gt;&lt;div style="text-align: left;"&gt;लेकिन हैरानी की बात यह है १९३१ मे जनगणना मे जाति को शामिल करने की बात को इसलिए पुरजोर विरोध हुआ था आज किस आधार पर उसी जाति के जिन्न को जनगणना मे जोड़ने की बात की जा रही है .हर राजनितिक दलों के सामने अस्तित्व का संकट है देश के सबसे बड़ी पार्टी यह नहीं तय कर पा रही है क़ि वह किसके साथ जाय .यानी देश से नहीं सबको वोट बैंक से दरकार है .यह जाति की गणना राज्य स्तरीय जातिवादी पार्टियों के वोट बैंक बढा सकते है ,लेकिन इसका खामियाजा आख़िरकार इस देश को ही भुगतना पड़ेगा .इसलिए अगर अमिताभ बच्चन अपनी जाति की सूचि मे भारतीय लिखते है तो यह कर्तव्य हर हिन्दुस्तानी का है क़ि अपनी जाति भारतीय लिखकर अपनी सियासी&amp;nbsp; दूकान चलाने वाले लोगों के मनसूबे पर पानी फेरें .&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em; text-align: center;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-1928938510360812506?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/1928938510360812506/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=1928938510360812506&amp;isPopup=true' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/1928938510360812506'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/1928938510360812506'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/05/blog-post_15.html' title='इन जातिवादी नेताओं से नक्सली क्या बुरे हैं'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S-5hPr6uGBI/AAAAAAAAAYE/dcpbqWqERw0/s72-c/resevation.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-2827276013002289544</id><published>2010-05-01T03:55:00.000-07:00</published><updated>2010-05-01T03:55:51.793-07:00</updated><title type='text'>कश्मीर: पत्थर युग मे लौटने की कबायद तेज</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S9vu9oqF79I/AAAAAAAAAX0/xB0wSKvir6U/s1600/pelter.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S9vu9oqF79I/AAAAAAAAAX0/xB0wSKvir6U/s320/pelter.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;घर से ऑफिस निकले शफीक अहमद शेख को नहीं पता था कि अगले चौक पर कुछ पत्थर वाले उनका इंतजार कर रहे है .जैसे ही उनकी मिनी बस मगरमाल बाग पहुची एक पत्थर सीधे बस की ओर उछाला गया .ओर सीधे चोट शेख के सर पर लगी .कुछ ही पल में शेख सदा सदा के लिए खामोश हो गए .&lt;br /&gt;बारामुला के अब्दुल अजीज अपने ११ दिन के बच्चा इरफ़ान को हस्पताल ले जा रहे थे लेकिन उन्हें हस्पताल नहीं जाने दिया गया एक उत्साही नौजवान ने एक पत्थर उछाला और पल भर में वह दिन का बच्चा दम तोड़ गया .यानी पत्थर के खेल के शौकीन कश्मीर का नौजवान पत्थरों से लोगों की जान ले रहे है लेकिन सियासत ऐसी कि हुकूमत पत्थर वाजों को रोक नहीं पा रही है और सियासी नेता इसे नौजवानों की हतासा मान रही है .यानि पत्थर युग में पहुच चूका कश्मीर एक नयी संस्कृति को अपना लिया है .&lt;br /&gt;हर जुम्मे के दिन पत्थर वाजी का यह आम नज़ारा होता है .श्रीनगर के जामा मस्जिद के इलाके ,पुराने बारामुला और सोपोर मे अचानक हर शुक्रवार को चौराहे पर एक महफ़िल सजाई जाती है जिसमे उत्साही नौजवानों की टोली हाथ मे पत्थर लिए पुलिस कर्मी को आगे बढ़ने के उकसाती है .इनका नारा होता है जीवे जीवे पाकिस्तान ,हम क्या चाहते आज़ादी . कुछ ही देर पहले ही ये मस्जिदों से नमाज अदा करके ये बाहर निकले होते है .मौलवी शौकत कहते है खुदा की इवादत के बाद दरअसल आदमी सकून पाता है मन में एक शांति होती है लेकिन न जाने ये&amp;nbsp; उत्साही नौजवान मस्जिदों से क्या सीख़ कर वापस लौटते है .तो क्या अंग्रेजी दा मौलवी मिरवैज ओमर फारूक नौजवानों को मस्जिद नमाज के लिए बुलाते है और उनके जेहन मे जहर भरकर उन्हें पत्थर वाजी के लिए उकसाते है .या फिर बुजुर्ग हुर्रियत लीडर नमाज पढने के बहाने हर शुक्रवार को लोगों को किसी मस्जिद मे इकठा करते है और फिर उस भीड़ को भड़का कर गायब हो जाते है .तो क्या पत्थर वाजों के यही नायक है तो क्या इन पत्थर वाजों के हाथों हुई मौत का जिम्मेवार इन्हें नहीं मानना चहिये ?क्या दंगा भड़काने के सजा इन्हें नहीं मिलनी चाहिए ?लेकिन हुकूमत खामोश है .&lt;br /&gt;पी डी पी की नेता महबूबा मुफ्ती कहती है कि हुकूमत को यह तय करना है कि इन पत्थर वाजों को सरकारी खर्चे पर भारत दर्शन की यात्रा पर भेजे या इन पथ्तःर्वाजों को कानून के दायरे में लायें .लेकिन यही महबूबा अगले दिन नौजवानों की गिरफ्तारी को इंसानी हकूक के खिलाफ बताती है .दरअसल यह पत्थर वाजी यहाँ के नौजवानों ने फिलिस्तीन के नौजवानों से सीखी है .इनके लीडरों ने इन्हें बताया है कि फिलिस्तीन में नौजवानों ने अपने इंतिफादा के लिए पत्थर वाजी को सबसे कारगर हथियार बनाया था . अमरनाथ ज़मीन के मामले मे उठा विवाद को अलहदगी पसंद लीडरों ने इंतिफादा माना और नौजवानों के हाथों पत्थर पकड़ा दिया .नौजवान मुख्यमंत्री ओमर अब्दुल्ला अपनी बेचारगी दिखाते हुए इन पत्थर वालों को कुछ इस तरह बचाव करते है कि "हमारी पुलिस व्यवस्था ने दहशतगर्दों से लड़ने की ट्रेनिंग ली है वे आतंकवादी से तो लड़ सकते है लेकिन इन पत्थर वालों से कैसे लड़ा जाय वह समझ नहीं पायी है .&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S9v-TuSZ1II/AAAAAAAAAX8/MuXyINfg2as/s1600/stone.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S9v-TuSZ1II/AAAAAAAAAX8/MuXyINfg2as/s320/stone.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;लेकिन मुख्यमंत्री यह भी मान रहे है कि पत्थर वाजी&amp;nbsp; कश्मीर मे एक बड़ा कारोबार भी बन गया है .इसे जारी रखने के लिए लाखो करोडो रूपये के फंड मुहैया कराये जा रहे है .लेकिन सवाल यह है कि इस साजिश को नाकाम बनाने मे सरकार क्यों कामयाब नहीं हो पा रही है .इसमें कोई दो राय नहीं कि ये पत्थर वाजी एक बड़ी साजिश का हिस्सा है .कश्मीर मे दहशत गर्दी की आंधी थमी तो इसे एक नए शकल मे पेश किया जा रहा है .खास बात यह है कि यह फ़ॉर्मूला दहशतगर्दों के फोर्मुले से ज्यादा खतरनाक है .पिछले साल इन पथार्वाजों मे १६ साल का नौजवान इनायत खान और १७ साल का फारूक पुलिस के शेलिंग से मारा गया .जाहिर है इस मौत की तीखी प्रतिक्रिया हुई और कश्मीर के प्रमुख शहरो को हफ्ते भर बंद रखा गया .यानी भारत के खिलाफ भड़काने की जो साजिश पाकिस्तान अरबो खरबों खर्च कर&amp;nbsp; नहीं कर पाया उसे अलहदगी पसंद की सियासत लाख दो लाख मे अंजाम दे रही है .जमा मस्जिद के इलाके मे माता पिता को यह पता है कि उनका बेटा जींश लगाकर और रेबोक के जूते पहनकर मस्जिद नमाज पढने नहीं जा रहा है बल्कि वह पत्थर वाजी करने जा रहा है ,लेकिन उसे रोका नहीं जा रहा है .तो क्या यह नहीं माना जाय कि कानून यहाँ अपना काम नहीं कर रहा है या कानून की&amp;nbsp; धार कमजोर साबित हुई&amp;nbsp; है .शैयद अली शाह गिलानी कहते है कि विरोध प्रदर्शन का यह मजबूरी मे नौजवानों ने तरीका अपनाया है .हिजबुल मुजाहिद्दीन के सरगना सैयद सल्हुदीन कहते है कि पत्थर वाजी को&amp;nbsp; गैर इस्लामी मानने वाले ढोंग कर रहे है .कश्मीर के कई उलेमाओं ने बाकायदा फतवा जारी करके इस पत्थर वाजी की निंदा की है और इसे पवित्र कुरान के आदर्शो के खिलाफ बताया है . फिर किस मजहब&amp;nbsp; की दुहाई गिलानी और ओमर फारूक दे रहे है किस मजहब के बिना पर सल्हुद्दीन जेहाद कर रहे है .यानि कश्मीर मे जो कुछ भी हो रहा वह सिर्फ ढोंग है .मजहब के नाम पर इंतिफादा करने वाले ,आज़ादी मांगने वाले सिर्फ पैसे के लिए जेहाद कर रहे है तो सियासत करने वाले दूसरी जमातो का सरोकार भी पैसे से ही है .पत्रकार परवेज़ कहते है कि कश्मीर मे लोग अब इन हिंसा ,हड़ताल ,और अलहदगी पसंद सियासत की परवाह नहीं करते उन्हें सिर्फ पैसा चाहिए चाहे वह पैसा आर से आये या पार से .लोग जानते है कि कश्मीर में जब तक हिंसा का दौर है तब तक भारत की ओर से खजाने खुले रहेंगे .इसलिए गिलानी साहब को लोग अपना लीडर माने या न माने उन्हें इस बात का यकीन है जब तक कश्मीर मे अलहदगी पसंद की सियासत है तब भ्रष्टाचार का बोलबाला है तब तक लूट का बाज़ार गर्म रहेगा .&lt;br /&gt;मैंने कश्मीर के अपने एक मित्र से&amp;nbsp; पूछा था क्या वाकय मे लोग अब हिंसा और बंद की सियासत से तंग आगये है .उसने कहा था यह कहना सरासर झूठ होगा .कश्मीर मे शांति लौटे यह कोई नहीं चाहता ,न ही यहाँ की हुकूमत ,न ही फौज ,न ही केंद्र सरकार .न ही यहाँ के लोग क्योंकि इनमे हरका सरोकार पैसे से है .हालत बदलने की इच्छा ,शांति की कामना सिर्फ यहाँ की माँ को है जिनके बच्चे जाने अनजाने हिंसा के शिकार हो रहे है .अमन की दरकार अगर एक बाप को भी नहीं है तो कह्सकते है कि कश्मीर पत्थर युग में लौट चूका है .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-2827276013002289544?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/2827276013002289544/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=2827276013002289544&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/2827276013002289544'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/2827276013002289544'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/05/blog-post.html' title='कश्मीर: पत्थर युग मे लौटने की कबायद तेज'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S9vu9oqF79I/AAAAAAAAAX0/xB0wSKvir6U/s72-c/pelter.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-405970836547086120</id><published>2010-04-25T00:57:00.000-07:00</published><updated>2010-04-26T22:07:45.547-07:00</updated><title type='text'>भारत का नक्सली और इंडिया का आई पी एल</title><content type='html'>&lt;span class="Apple-style-span" style="font-size: 14px; line-height: 25px;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; margin: 0px; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S9K7uY_NN4I/AAAAAAAAAXs/qou_0ROE7JM/s1600/chidambram.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S9K7uY_NN4I/AAAAAAAAAXs/qou_0ROE7JM/s320/chidambram.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="margin: 0px;"&gt;झारखण्ड के पूर्व विधानसभा स्पीकर इन्दर सिंह नामधारी ने कभी राज्य की सरकार को यह सुझाव दिया था कि एक साल तक झारखण्ड मे सारे विकास के काम रोक दिए जाय .सरकार और मीडिया मे इसका माखौल उड़ाया गया था . नामधारी जी की यह दलील थी की आदिवासी इलाके में विकास के नाम पर जो पैसे का बंदर&amp;nbsp;बाट हो रहा है उसमे सबसे ज्यादा फायदा नक्सालियों को ही हो रहा है .सरकार की हर योजना में नक्सलियों का ३० फिसद देना तय तय है&amp;nbsp; .यानि नक्सली आन्दोलन को बढ़ने से रोकना है तो तो उसके फंडिंग के इस सुलभ तरीके को रोकने होंगे .सरकारी पैसा ,सरकारी हथियार लेकिन नक्सलियों के निशाने पर वही सरकार .यानी पैसे उगाहने के लिए नक्सलियों ने कमोवेश वही प्रबंध किया है जो तरीका आई पी एल के धुरंधरो ने राजनेताओ के साथ मिलकर किया है .&lt;/div&gt;&lt;div style="margin: 0px;"&gt;कभी आई पी एल के बारे मे गृहमंत्री चिदम्बरम ने कहा था कि कुछ चलाक लोगों ने क्रिकेट को मनोरंजन के चासनी मे डाल कर इसे एक फ़ॉर्मूला बना दिया है .लेकिन नक्सलियों के कुसल प्रबंधन को समझने मे वे अब तक नाकाम रहे है .&lt;/div&gt;&lt;div style="margin: 0px;"&gt;दंतेवाडा नक्सली हमले से आह़त गृह मंत्री ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है .पिछले महीनों मे इस तरह की बैठके कई बार हो चुकी है लेकिन इस बार खास यह है इन राज्यों के नक्सल प्रभावित जिलों के सांसदों को भी इस बैठक मे बुलाया गया है .झारखण्ड के एक सांसद इन्दर सिंह नामधारी कहते है ' उन्होंने पिछले महीनो मे गृह मंत्री को चार चिठिया लिखी है ,हमने यह मांग की थी कि&amp;nbsp; नक्सल प्रभावित जिले पलामू और चतरा मे सड़क निर्माण का काम बोर्डर रोड ओर्गनिजसिओन यानि बी आर ओ को दिया जाय .नामधारी का मानना है कि इन इलाके मे सड़के नक्सालियों की मर्जी के बगैर बन नहीं सकती .अपने इलाके के एक सड़क निर्माण को लेकर जब उन्होंने एक ठेकेदार से सवाल किया तो ठेकेदार का जवाब था आर्डर नहीं मिला है यानी ये आर्डर यहाँ ड़ी एम् के ऑफिस से नहीं आते ये आर्डर जंगल से आते है .वो भी&amp;nbsp;३० फिसद हिस्सा लेने के बाद .नामधारी बताते है रोड कैसा बने ये भी तय नाक्साली करते है .झारखण्ड के कई इलाके मे पक्की सड़कों के नीचे&amp;nbsp; ,तारकोल डाले हुए सड़कों के नीचे मिले बारूदी सुरंग चौकाने वाले है .यानी पैसा सरकार का लेकिन नक्सली ठेकेदारों की मदद से इन इलाकों में सुरक्षाबलों के लिए मौत का कुआँ खोद रहे है . केंद्र सरकार कल भी नक्सली समस्या को कानून व्यवस्था की समस्या मान कर राज्यों को आगे कर रही थी कमोवेश वही सूरत आज भी है ,&lt;/div&gt;&lt;div style="margin: 0px;"&gt;दंतेवाडा के हमले के बाद अपने गृह मंत्री का सुर और ताल दोनों बदल गए है .सीधे जंग की बात करने वाले गृह मंत्री इनदिनों यह मानने लगे है कि नक्सली हमारे दुश्मन नहीं है .अचानक बचाव की मुद्रा मे आचुके गृहमंत्री के हालिया बयानों के पीछे कई वजह है .खुद उनकी पार्टी कांग्रेस के कई आला लीडरों ने खासकर दिग्विजय सिंह ,मणि शंकर अय्यर और अजीत जोगी ने सार्वजानिक तौर पर चिदम्बरम के स्टायल और नीतियों को जमकर लताड़ा है .यानि इन नेताओं ने चिदम्बरम के स्टायल को कांग्रेस संस्कृति के अनुरूप नहीं पाया है .हैरानी की बात तो यह है कि नक्सल के किसी भी मामले को लेकर सार्वजानिक रूप से बात करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय ने सिर्फ गृह मंत्री को अधिकृत किया है .पी एम् ओ से इस आशय के पत्र भी निर्गत किये गए थे .लेकिन फिर भी नक्सल समस्या को लेकर भ्रान्तिया फैलाई जा रही है और कांग्रेस आलाकमान चुप है तो मना जायेगा की यह कांग्रेस के अंदर सत्ता के समीकरण की यह सियासी चाल है .बाटला हाउस एन्कोउन्टर मे मारे गए पुलिस ऑफिसर को सरकार मरणोपरांत सम्मानित करती है ,इस साजिश मे लगे गुमराह नौजवानों की धड पकड़ मे पुलिस आज भी लगी हुई है लेकिन यही दिग्विजय सिंह पुलिस की करवाई और बाटला हाउस एन्कोउन्टर पर सवालिया निशान लगाते है .&lt;/div&gt;&lt;div style="margin: 0px;"&gt;दर असल जो वोट की सियासत इस मामले मे है वही सियासत नक्सलियों के मामले मे भी है .छः साल पहले यु पी ऐ के शासन मे मुल्क के ४५ जिले नक्सली आन्दोलन से प्रभावित थे आज उसी कांग्रेस के नेतृत्वा वाली यु पी ऐ सरकार के दौर मे देश के&amp;nbsp;२१० जिलों पर नक्सालियों का दवदबा कायम है .यानी ७ राज्यों के लगभग ३२० विधान सभा क्षेत्रों और ९४ लोकसभा क्षेत्रों मे वोट के सारे समीकरण को नक्सली बना और बिगाड सकते है &amp;nbsp;जाहिर है कांग्रेस पार्टी ऐसा रिस्क कतई नहीं लेना चाहेंगी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&amp;nbsp;देश के प्रधानमंत्री नक्सली समस्या को आंतरिक सुरक्षा के मामले मे सबसे बड़ा खतरा मानते है लेकिन आंतरिक सुरक्षा को चुनौती देने वाले नक्सलियों पर झारखण्ड मे तब तक कारवाई रोकी रखी गई जबतक वहां चुनाव संपन्न न हो गए .यानी अगर केंद्र सरकार विधान सभा चुनाव के कारण राष्ट्रपति शासन के बावजूद ग्रीन हंट अभियान नहीं चला सकी तो आज वही केंद्र सरकार शिवू सोरेन से कैसे अपेक्षा कर सकती है कि वे नक्सलियों के खिलाफ जंग का बिगुल बजाय .जबकि यह बात हर कोई जानता है कि शिबू सोरेन को झारखण्ड की सत्ता दिलाने मे नक्सालियों की अहम् भूमिका रही है आज अगर बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार गृह मंत्री चिदम्बरम को नशिहत दे रहे है तो इसकी वजह बिहार का आगामी&amp;nbsp;&amp;nbsp;चुनाव ही है . चुनावी नैया पार उतरने के लिए नितीश कुमार कोई रिस्क नहीं लेना चाहते है .आज अगर नक्सली यह एलान कर रहे है भारत पर उनके कब्जे का लक्ष्य २०५० है तो वे&amp;nbsp; कोई दिवा स्वप्न नहीं देख रहे है बल्कि उसके लिए उसने जमीन भी तैयार की है&lt;br /&gt;दंतेवाडा के नक्सली हमले मे ७६ जवान मारे गए .हादसे की जांच करने गयी केंद्र की टीम पर भी नक्सालियों&amp;nbsp; ने&amp;nbsp; .फायरिंग की लेकिन आज तक एक भी नक्सली नहीं पकड़ा गया .१००० की तादाद मे जमा होकर नक्सली सुरक्षाबलों पर हमला करते है और तुरंत बिलीन भी हो जाते है तो इसका अर्थ साफ़ है कि नक्सलियों को स्थानीय समर्थन प्राप्त है .दिल्ली मे बैठे बुद्धिजीवी यह दावा करते है कि ग्रीन हंट अभियान आदिवासियों को जंगल से भगाने के लिए चलाया जा रहा है ताकि खनिज सम्पदा पर उद्योगपतियों का कब्ज़ा हो सके .जाहिर है&amp;nbsp; गरीबी और भूख से पीड़ित आदिवासियों को नक्सली कुछ ऐसी ही भ्रान्ति फैला कर अपने गिरोह मे शामिल किया है .खनन और खनिज उद्योग की वसूली से नाक्साली हर साल १५०० करोड़ रूपये से ज्यादा फंड इकठा कर रहे है लेकिन फिर भी उसे बेसहारों का मशीहा कहा जा रहा है .&lt;br /&gt;भारत और इंडिया के बीच बटा यह मुल्क भ्रष्टाचार के आकंठ मे इस कदर डूबा हुआ है कि&amp;nbsp; हर किसी ने अपने हिसाब से उर्बर जमीन तैयार की है .इंडिया के लोगों ने अपने लिए लूट और ऐयाशी का जरिया आई पी एल को बनाया है तो नक्सलियों ने ऐसा ही आई पी एल गरीब भारत को बनाया है .गृह मंत्री के मजबूत इरादे को शक की नज़र से नहीं देखा जा सकता .उनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है लेकिन अगर वे इस साजिश को ख़तम कर पाते है तो इतिहास मे वे इंदिरा गांधी के बाद पहले नेता होंगे जिन्हें लोग हर मुश्किल के दौरान याद करेंगे .लेकिन यह इतिहास कैसा बने यह भी तय उन्ही को करना है . &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-405970836547086120?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/405970836547086120/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=405970836547086120&amp;isPopup=true' title='4 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/405970836547086120'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/405970836547086120'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/04/blog-post_25.html' title='भारत का नक्सली और इंडिया का आई पी एल'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S9K7uY_NN4I/AAAAAAAAAXs/qou_0ROE7JM/s72-c/chidambram.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-379038541057818430</id><published>2010-04-10T06:14:00.000-07:00</published><updated>2010-04-10T06:14:02.775-07:00</updated><title type='text'>गृह मंत्री चिदम्बरम की माया कांग्रेस और बीजेपी पर भारी</title><content type='html'>&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S8BOMPYJvjI/AAAAAAAAAXc/X1v3ngUEGg8/s1600/home+minister.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S8BOMPYJvjI/AAAAAAAAAXc/X1v3ngUEGg8/s320/home+minister.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;"बक स्टॉप आट माय डेस्क " यह उस गृह मंत्रालय के लीडर का बयान था जहाँ यह कभी रिवायत नहीं थी .छत्तीसगढ़ के दंदेवाडा से भी भयानक हमले इस मुल्क पर हुए है .आतंकवादी हमले मे एक एक दिन में २०० से ज्यादा लोग मारे गए है लेकिन गृह मंत्री&amp;nbsp; कभी भी इसकी जिम्मेदारी लेने आगे नहीं आये .कभी कहा गया हर जगह सुरक्षाबल मुस्तैद करना संभव नहीं है&amp;nbsp; . तो कभी कहा गया राज्य सरकारों या फिर आला पुलिस ऑफिसर को ख़ुफ़िया जानकारी पहले ही दे दी गयी थी .यानि हर बार पूर्वर्ती गृह मंत्री ने अपने को बेदाग़ साबित किया .लेकिन ऐसा क्या हो गया कि ७६ सी आर पी ऍफ़ के जवानों की न्रिशंश मौत ने गृह मंत्री को हिला दिया था ?.ऐसा क्या हो गया कि हर बात पर गृह मंत्री का इस्तीफा मांगने वाला विपक्ष गृह मंत्री के साथ मजबूती से खड़ा था ?.दंतेवाडा के नाक्साली हमले के ठीक चार दिन पहले गृह मंत्री चिदम्बरम पशिम बंगाल के मुख्या मंत्री को नशिहत दे आये थे और उन्हें जिम्मेदारी दुसरे पर नहीं थोपने की सलाह दे रहे&amp;nbsp; थे .दंतेवाडा के इस हमले के बाद गृह मंत्री ऐसी ही नशिहत रमण सिंह को भी दे सकते थे और सी आर पी ऍफ़ की मौत की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर थोप सकते थे .लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया .मुझे याद है कि इससे पहले सुरक्षा बालों की मौत पर गृह मंत्रालय का यह जवाब होता था कि चुकी परा मिलिटरी फाॅर्स की तैनाती राज्य सरकार की जिमीदारी है इसलिए सुरक्षाबलों की मौतों की जिम्मेबारी उन्ही को लेनी होगी .खुद चिदम्बरम अब तक ऑपरेशन ग्रीन हंट की बात को पूरी तरह से ख़ारिज कर रहे थे .नक्सल खिलाफ जंग का ढोल सबसे ज्यादा गृह मंत्री पी चिदम्बरम ही बजा रहे थे .लेकिन नक्सल के खिलाफ ऑपरेशन की बात को हमेशा सिरे से ख़ारिज भी कर रहे थे .वजह जो भी हो लेकिन दंतेवाडा नक्सली हमले के बाद&amp;nbsp; गृह मंत्री चिदम्बरम का इस हमले की नाकामयाबी की जिम्मेदारी लेना और इस्तीफे की पेशकस करना सबको चौकाया है .यानी नक्सलियों ने उन्हें मैदान मे खड़ा कर दिया है .अब जीत उनकी है तो हार भी उन्ही की होगी .&lt;br /&gt;गृह मंत्री के रूप मे शिवराज पाटिल को भी कई मायने मे याद किया गया .आतंकवादी हमले को मुआयना करने गए गृह मंत्री के बारे मे बताया गया कि महज एक घंटे मे ही उन्होंने चार बार ड्रेस चेंज किया .किसी ने कहा शिवराज पाटिल की&amp;nbsp; जितनी तत्परता अपने ड्रेस को लेकर है उतनी अगर गृह मंत्रालय के कामो को लेकर होता तो शायद ये हमले नहीं होते .उनके शासन काल मे मुल्क मे तक़रीबन १५० से ज्यादा आतंकवादी हमले हुए जिसमे ३००० से ज्यादा लोग मारे गए .हर हमले के बाद विपक्ष से इस्तीफा माँगा गया लेकिन किसी ने पाटिल साहब की अंगुली भी टेढ़ी नहीं कर सके .नक्सली उनके लिए अपने भाई थे उन्ही के शासन काल मे नक्सलियों ने देश के १३ जिलों से अपना विस्तार ११३ जिलों मे कर लिया .यानी उनके दर्शन ने नक्सली को खूब फलने फूलने का मौका दिया लेकिन सत्ता पक्ष या फिर विपक्ष के लोग उनका बाल बांका नहीं कर सके .इसकी वजह खुद शिवराज पाटिल ने बताई थी .उन्होंने कहा था कि वे कोई लोकप्रिय नेता नहीं है जिसके कारण वे इस पद पर है .मैडम सोनिया गाँधी जब तक चाहेंगी तब तक वे इस पद पर बने रहेंगे .यानी मैडम की कृपा जब तक उनपर बनीरहेगी वे तब तक सत्ता मे रहेंगे .लेकिन मुंबई हमले के बाद एन सी पी ने मैडम का ही खेल बिगाड़ दिया और शिव राज पाटिल को इस्तीफा देना पड़ा था .ये अलग बात है कि मैडम की मेहरवानी से ऐसे काबिल साबिक गृह मंत्री को आज भी उच्च संवैधानिक पद मिला हुआ है&amp;nbsp; .यानी आमलोगों की मौते या फिर सुरक्षाबलों की मौते किसी गृह मंत्री या फिर सरकार के लिए इस्तीफे का कारण नहीं हो सकता था .मुंबई के आतंकवादी हमले के बाद महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार को दुबारा चुनकर आना विपक्ष के लिए यह सबक था कि इस देश मे आतंकवाद और सरकार की विफलता चुनावी मुद्दे नहीं हो सकते .यह बात विपक्ष खासकर बीजेपी जान गयी है .&lt;br /&gt;&lt;div class="separator" style="clear: both; text-align: center;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S8BbusmT6SI/AAAAAAAAAXk/ZVf763mXXV0/s1600/chidambram.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S8BbusmT6SI/AAAAAAAAAXk/ZVf763mXXV0/s320/chidambram.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;/div&gt;गृह मंत्री की तारीफ़ मे आज कशीदे पढ़े जा रहे है .लेकिन हम शायद यह भूल जाते है कि गृह मंत्री चिदम्बरम&amp;nbsp; शिवराज पाटिल की ही परम्परा को आगे बढ़ाते .लेकिन मुंबई हमले ने कांग्रेस आलाकमान&amp;nbsp; को पहले गृह मंत्री को हटाने के लिए मजबूर किया दूसरा, विपक्ष&amp;nbsp; मजबूत सरकार और उसके ठोस इरादे को भी लेकर कांग्रेस की छवि धूमिल कर रहा था .कह सकते है की चिदम्बरम का गृहमंत्री बनाना महज एक फेस सेविंग पहल हो सकती थी लेकिन चिदम्बरम ने जिस तरीके से बदल डालो की रणनीति अपनाई उससे लोगों मे एक जिम्मेदार गृह मंत्री की उनकी छवि बनी .टाडा ,पोटा की बहस को पीछे छोड़ते हुए चिदम्बरम ने यू ऐ पी ऐ के नाम से एक कड़ा कानून बनाकर आतंकवाद के खिलाफ गृहमंत्रालय के इरादे को साफ़ कर दिया था .लेकिन सियासत गृह मंत्री पर हावी रहा ,यही वजह है कि गुजरात सरकार के आतंकवाद निरोधी कानून पर चिदम्बरम अड़चन लगाते रहे .ख़ुफ़िया तंत्र को चुस्त दुरुस्त करने के लिए चिदम्बरम ने एन आई ऐ यानि नेशनल इंवेस्टिगेसन एजेंसी बनाकर तमाम ख़ुफ़िया एजेंसी को अपने अधीन लाया .लेकिन कांग्रेस की सियासत उनपर हावी रही .जाहिर है केरल और झारखण्ड के बोम्ब ब्लास्ट की जांच के लिए एन आई ऐ तुरंत सरगर्म हो जाती है और आतंकवाद के मामले की जांच अपने हाथ ले लेती है लेकिन मुंबई हमले जैसे इतने बड़े आतंकवादी हमले की जांच मुंबई पुलिस के हवाले छोड़ दी जाती है .केरल सरकार की ओर से यह सवाल कई बार आया है कि यहाँ के बस मे हुई ब्लास्ट क्या मुंबई हमले से ज्यादा खतरनाक था .लेकिन चिदम्बरम की छवि पर किसी ने सवाल नहीं उठाया .नेशनल काउंटर तेर्रोरिस्म सेंटर बनाकर गृह मंत्री ने अपने इरादे को साफ़ कर दिया था कि देश को आतंकवाद से लड़ना है तो उसे इस समस्या को गंभीरता से लेना होगा .ये अलग बात है कि आतंकवाद को रोकने के लिए उन्होंने कई अमेरिकी मॉडल को लागू करने की कोशिश की लेकिन कभी वोट की सियासत तो कभी पार्टी की गुटबाजी उनके इरादे पर पानी फेरती रही .पिछले वर्षों मे सरकार मे यह दस्तूर बन गयी थी कि सुरक्षा एजेंसी या फिर ख़ुफ़िया एजेंसी एन एस ऐ के जरिये हर मामले की जानकारी सीधे प्रधानमंत्री को दिया करती थी .यही वजह थी कि चाहे वह ब्रजेश मिश्र हों या फिर एम् के नारायण सत्ता के एक मजबूत केंद्र बन गए थे और गृह मंत्रालय की हालत पी एम् ओ की उपशाखा बनकर रह गयी थी .लेकिन मुंबई हमले की हालत ने गृह मंत्री चिदम्बरम को इतना मजबूत बना दिया था कि और की बात तो छोडिये खुद एम् के नारायण को हर सुबह प्रधानमंत्री से पहले गृह मंत्री के सामने हाजिर होना पड़ता था .यानि जाँच एजेंसी को व्यावसायिक बनाने की चिदम्बरम ने ठोस पहल की तो सत्ता मे बैठे कई लोगों को नागवार गुजरा और एम् के नारायण को जाना पड़ा था .&lt;br /&gt;&amp;nbsp;प्रधानमंत्री की तरफ से चिदम्बरम को यह लगभग अस्वस्त किया गया कि गृह मंत्रालय के मामले मे कोई दखल नहीं होगी&amp;nbsp; .यही वजह है कि बात चाहे कश्मीर की हो या फिर उत्तर पूर्व की या फिर नक्सल प्रभावित राज्यों की चिदम्बरम का फैसला अंतिम फैसला&amp;nbsp; साबित हुआ .कश्मीर के अलगाववादियों से जहाँ उन्होंने गुप चुप बात चित की पहल तेज की वही उन्होंने कश्मीर से सुरक्षाबलों को हटाने की भी पहल करके सबको चौकाया था .यानी चिदम्बरम डंके की चोट पर बात करने के लिए मशहूर है तो कुशल राजनयिक के रूप मे अपनी सूझ बुझ का भी परिचय दिया है .झारखण्ड के मुख्यमंत्री शिबू सोरेन ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान छेड़ने से मना किया तो चिदम्बरम ने राष्ट्रपति शासन लगाने की धमकी देने के वजाय बीजेपी के अरुण जेटली को आगे किया और शिबू सोरेन को नक्सल के खिलाफ अभियान के लिए तैयार किया .ये अलग बात है कि पश्चिम बंगाल मे वे आज तक न तो मुख्या मंत्री बुद्धदेव को समझ पाए न ही अपने ही सहयोगी ममता को समझा पाए .यानी पशिम बंगाल मे नक्सल के खिलाफ अभियान जरूर चल रहे है लेकिन यह कोई नहीं जानता कि इसे कौन चला रहा है यानी .नक्सली किसका दोस्त है या फिर किसका दुश्मन यह तय होना अभी बाकी है .&lt;br /&gt;लेकिन छत्तीसगढ़ मे मुख्या मंत्री रमण सिंह ने यह साफ़ कर दिया है कि यह लड़ाई गृह मंत्री चिदम्बरम लड़ रहे है और छत्तीसगढ़ की सरकार उनके साथ है .यही वजह है कि आर्मी और एयर फाॅर्स की तैनाती पर एयर चीएफ़ की विरोधाभासी बयानों पर सबसे पहले मुख्या मंत्री रमण सिंह का ही बयान आया था कि या तो इसकी दशा और दिशा गृह मंत्री को तय करने दीजिये या फिर देश के नौकरशाह अभियान की दशा और दिशा तय करे .लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि नाक्साली हमले के विरोध मे राज्य कांग्रेस इकाई ने बंद का आयोजन किया था और सरकार पर निकम्मेपन का आरोप लगाया था .उधर दिल्ली मे भी कांग्रेस के एक खेमे मे चिदम्बरम के खिलाफ आवाज बुलंद हुई और अभियान चलाकर कुछ कांग्रेसियों ने मैडम सोनिया गाँधी तक चिदम्बरम की शिकायत पहुचाई .इन लीडरों का मानना था कि जो धर्मनिरपेक्ष और सर्व्हारो की पार्टी की छवि राहुल गाँधी ने बनायीं है .चिदम्बरम उस छवि का नुकशान कर रहे है आतंकवाद के मुद्दे पर .बीजेपी से बढ़ी चिदम्बरम की नजदिकिया कांग्रेस की छवि को तार तार कर रही है&lt;br /&gt;.चिदम्बरम के स्टायल से पहले भी कई कांग्रेसी आहात थे .सो चिदम्बरम ने इस्तीफे को तुरुप के पत्ते के तौर पर इस्तेमाल किया और कांग्रेस मे उनके खिलाफ हो रही गुट बाजी की हवा निकाल दी .लेकिन सवाल यह है कि क्या जो चिदम्बरम कर रहे है वे सिर्फ अपनी छवि के लिए कर रहे है या फिर देश के लिए कर रहे है? .कांग्रेस मे गांधी परिवार से अलग कोई अपनी अलग छवि बनाये यह पार्टी को कभी मंजूर नहीं हुआ है .बढती महगाई और और कई देशी विदेशी मामलों मे लगातार असफल हो रही मौजूदा कांग्रेस की सरकार को चिदम्बरम को आगे रखकर कई फैदे हो सकते है लेकिन चाटुकारों की एक बड़ी फौज यह नहीं चाहती कि चिदम्बरम कल इतने बड़े शख्शियत के रूप मे उभरे की प्रधानमंत्री के रूप मे वे सबसे बड़े दावेदार बने ..लेकिन बीजेपी ने चिदम्बरम को पूरा समर्थन देकर यह साबित कर दिया है कि पार्टी अब लम्बे रेश का घोडा बनने के लिए तैयार हो रही&amp;nbsp; है .&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/2450215968901197033-379038541057818430?l=hamargam.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://hamargam.blogspot.com/feeds/379038541057818430/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=2450215968901197033&amp;postID=379038541057818430&amp;isPopup=true' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/379038541057818430'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/2450215968901197033/posts/default/379038541057818430'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://hamargam.blogspot.com/2010/04/blog-post_10.html' title='गृह मंत्री चिदम्बरम की माया कांग्रेस और बीजेपी पर भारी'/><author><name>vinod kumar mishra</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10008067258866717206</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S0MFGs6oqdI/AAAAAAAAATg/sZMIC_omaEI/S220/parth.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S8BOMPYJvjI/AAAAAAAAAXc/X1v3ngUEGg8/s72-c/home+minister.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-2450215968901197033.post-4877569336351002828</id><published>2010-04-07T03:55:00.000-07:00</published><updated>2010-04-07T04:43:22.068-07:00</updated><title type='text'>सुरक्षाबलों की मौत पर बंद करो ये घडियाली आंसू</title><content type='html'>&lt;div style="border: medium none;"&gt;&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S7xNxKlpU8I/AAAAAAAAAXU/RVK39QXvK04/s1600/maoist+attack.jpg" imageanchor="1" style="clear: left; float: left; margin-bottom: 1em; margin-right: 1em;"&gt;&lt;img border="0" nt="true" src="http://4.bp.blogspot.com/_H4CqmP5bglU/S7xNxKlpU8I/AAAAAAAAAXU/RVK39QXvK04/s320/maoist+attack.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;६ अप्रैल २०१०, दंतेवाडा . भारत के आतंक विरोधी अभियान&amp;nbsp;का &amp;nbsp;कला दिवस .एक नहीं दो नहीं ७६ से &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="border: medium none;"&gt;&lt;span style="font-size: small;"&gt;ज्यादा सुरक्षा वल मौत के घाट उतार दिए गए .नक्सली आतंकियों द्वारा किया गया यह सबसे बड़ा हमला है .&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div style="border: medium none;"&gt;४ अप्रैल २०१० ,कोरापुट ११ जवान नक्सली हमले के शिकार हु
